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पेट की आग अहमदाबाद की सड़कों पर फैली, लॉकडाउन तोड़कर आदिवासियों और प्रवासी मज़दूरों ने किया प्रदर्शन

अहमदाबाद। फरवरी महीने में आयोजित ‘नमस्ते ट्रंप’ कार्यक्रम के दौरान गुजरात की एक बेहद चर्चित और रोचक खबर आपको याद होगी। जिसमें बताया गया था कि ट्रंप को जिस रूट से एयरपोर्ट से मोटेरा स्टेडियम ले जाया जाना था उस पर सरनीया वास नाम की झोपड़ पट्टी पड़ती है। एयरपोर्ट से जाते समय ट्रंप की नज़र उस झुग्गी झोपड़ी पर न पड़ जाए इस भय के चलते नगर निगम ने सड़क और झुग्गी के बीच 7 फुट ऊँची दीवार खड़ी कर दी थी।

अहमदाबाद के सरदार नगर एयर पोर्ट रोड की इस खबर ने देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में गुजरात मॉडल की पोल खोल दी थी। उसी सरदार नगर से एक और खबर आई है। भील (आदिवासी) और आस-पास रहने वाले प्रवासी मजदूरों ने लॉक डाउन तोड़ कर सरकार के खिलाफ धरना और प्रदर्शन किया है। हालाँकि इस दौरान इन लोगों ने आवश्यक दूरी बनाए रखी। और सभी ने अपने मुँह पर मास्क बांध रखे थे। कार्यक्रम के दौरान सभी प्रदर्शनकारी एयर पोर्ट दीवार के सामने मैदान में खड़े हो गए। इनके हाथ में एक तख्ती थी जिस पर लिखा था “कोरोना से नहीं भूख से ज़रूर मरेंगे” धरना देने वाले अधिकतर आदिवासी और प्रवासी दिहाड़ी मजदूर हैं।

लक्ष्मी बेन अमृतभाई बावरी सरदारनगर स्थित उसी भीलवास की झुग्गी में रहती हैं। आदिवासी समाज से हैं। कड़िया मजदूरी (बांध काम मजदूरी) करके परिवार चलाती हैं। उन्होंने जनचौक को बताया कि “हम लोग कड़िया मजूरी करके रोज़ कमाते थे रोज़ खाते थे। थोड़ा बहुत रुपिया जो था वह भी लॉक डाउन में खर्च हो गया। जिनके पास BPL/APL राशन कार्ड था उन्हें राशन मिला। जिनके पास नहीं था उन्हें नहीं मिला। समस्या सिर्फ राशन की नहीं है। राशन के अलावा तेल, मिर्च, धनिया, मसाले, दूध और गैस की भी आवश्यकता है।

किसी के पास चावल है तो तेल नहीं, तेल है तो आटा नहीं। कुछ लोगों के गैस सिलेंडर समाप्त हो गए भराने को पैसा नहीं है। बच्चों को दूध नहीं मिल पा रहा है”। प्रदर्शन के बाद सरकार की तरफ से राशन कार्ड धारक और बिना राशन कार्ड वालों का सर्वे हुआ है। अधिकारियों ने जानकारी दी है। जिनके पास राशन कार्ड नहीं है। लेकिन सर्वे में नाम है उन्हें दो किलो गेहूं, एक किलो चावल, एक किलो चना दाल, एक किलो नमक मिलेगा। लक्ष्मी बेन आगे कहती हैं कि “तेल, गैस और मिर्च नहीं मिलेगी तो हमारी समस्या तो वहीं की वहीं रही।”

बांध काम मजदूरों के वेलफेयर के लिए बिल्डिंग एंड अंडर कांस्ट्रक्शन वेलफेयर बोर्ड है, जिसमें 2900 करोड़ रुपये हैं। मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने कांस्ट्रक्शन वर्कर्स के बैंक खाते में सीधे पैसे डालने की घोषणा की है। लक्ष्मीबेन भी कांस्ट्रक्शन वर्कर हैं। लेकिन उसकी सच्चाई क्या है सिर्फ़ इस तबके के लोग ही जानते हैं। जनचौक से बातचीत में लक्ष्मी बेन ने साफ कहा कि “मेरे खाते में सरकार की तरफ से एक रुपया भी नहीं आया।”

तुषार देवड़ा राजस्थानी मूल से हैं। शिव शक्ति सोसाइटी में परिवार के साथ रहते हैं।

उन्होंने बताया कि एक NGO से एक वक़्त खाना आ रहा था। वह भी पिछले 15 दिन से बंद हो गया। 10-12 दिनों से चुने प्रतिनिधि नरोड़ विधायक और निगम पार्षदों से लगातार संपर्क कर समस्या को हल के लिए कह रहे थे। लेकिन विधायक उन्हें पार्षद के पास और पार्षद विधायक के पास जाने को कह कर मामले को टाल रहे थे। लिहाज़ा मजबूरन सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए उन्हें विरोध-प्रदर्शन करने का फ़ैसला लेना पड़ा। उनका कहना था कि इस प्रदर्शन के माध्यम से वे अपनी समस्या सरकार के ध्यान में लाना चाहते थे। सरकारी अधिकारी सर्वे कर रहे हैं और आश्वासन भी दिया है।

इस पूरे मामले पर जनचौक ने नरोड़ा से विधायक बलराम खूबचंद थवानी से बात की। उन्होंने बताया कि “सरदार नगर में भूख को लेकर कोई प्रदर्शन नहीं था। कांग्रेस के लोगों ने षड्यंत्र किया था जिसकी मुझे जानकारी समय पर नहीं मिल पाई वरना मैं अपनी सेना लेकर पहुँच जाता। जो प्रदर्शन कर रहे थे उनके घरों में लाख-लाख रुपये की बाइक है। MLA की यह ज़िम्मेदारी नहीं कि वह घर-घर खाना पहुंचाए। फिर भी मैंने सामाजिक, धार्मिक संस्थाओं के हाथ पैर जोड़कर हर ज़रूरतमंद तक खाना पहुंचाया है। मेरे कार्यकर्ता दिन रात मेहनत कर रहे हैं। हमने एक सर्वे कर ज़रुरतमंदों की लिस्ट जिला कलेक्टर को दिया है। मेरी विधानसभा के लिए मुख्य मंत्री ने खुद कलेक्टर से सिफारिश की है। कल से सरकारी राशन किट भी मिलनी शुरू हो जायेगी।”

गुजरात कोरोना प्रभावित राज्यों में दूसरे स्थान पर है। गुजरात में अहमदाबाद सबसे प्रभावित है। 67% कोरोना पॉज़िटिव मामले अहमदाबाद से ही हैं। राज्य के 3574 पॉज़िटिव मामलों में से अकेले अहमदाबाद से 2543 केस है। राज्य में हुई कोरोना से 181 मृत्यु में से 126 अहमदाबाद में हुई है। (आंकड़े 27 अप्रैल तक के हैं)

दूसरे राउंड का लॉक डाउन 3 मई को पूरा होगा। अहमदाबाद रेड ज़ोन में होने के कारण लॉक डाउन की अवधि बढ़ाई भी जा सकती है। यदि ऐसा हुआ तो मजदूर एवं प्रवासी वर्ग की समस्याएँ और बढ़ेंगी।

(अहमदाबाद से जनचौक संवाददाता कलीम सिद्दीक़ी की रिपोर्ट।)

This post was last modified on April 29, 2020 8:32 pm

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