Wed. Jan 29th, 2020

सीएबी की आग जला रही है विदेशी रिश्तों का दामन, बांग्लादेश के विदेश मंत्री के बाद अब जापान के पीएम की यात्रा रद्द

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पीएम मोदी और शिंजो अबे।

नई दिल्ली। नागरिकता संशोधन विधेयक के पारित होने के बाद आखिर जिस बात की आशंका थी वही हुआ। पूरा नार्थ-ईस्ट जल रहा है। असम के 11 जिलों में कर्फ्यू लग गया है और सरकार को सेना उतारनी पड़ी है। बीजेपी के मंत्रियों, विधायकों के घरों और आरएसएस दफ्तरों पर हमले हो रहे हैं। सैकड़ों गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया गया है। कमोबेश यही तस्वीर असम से लेकर त्रिपुरा तक है। असम में इंटरनेट समेत ब्राडबैंड सेवाओं को बंद कर दिया गया है। मेघालय के शिलांग में कर्फ्यू है और वहां 100 से ज्यादा लोगों का गिरफ्तार कर लिया गया है।

इसके साथ ही बंगाल की तृणमूल, केरल की लेफ्ट और पंजाब की कांग्रेस सरकार ने इस कानून को अपने सूबों लागू करने से इंकार कर दिया है। तमाम वाम-लोकतांत्रिक संगठनों ने 19 दिसंबर को राष्ट्रीय स्तर पर विरोध का ऐलान किया है। यह मामला जितना घर में गरमाया है उससे ज्यादा विदेश में इसकी चर्चा हो रही है। बांग्लादेश सरकार की ओर से इस पर कड़ी प्रतिक्रिया आयी है। बांग्लादेश के विदेश मंत्री एके अब्दुल मोमन ने अपनी भारत यात्रा रद्द कर दी है। साथ ही उन्होंने कहा है कि सीएबी और एनआरसी से भारत-बांग्लादेश के बीच चल रहा स्वर्णिम रिश्ता प्रभावित हो सकता है।

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दऱअसल भारत और बांग्लादेश के बीच के रिश्ते पहले से भी बेहद घनिष्ठ रहे हैं और इस दौरान शेख हसीना के वहां का प्रधानमंत्री बनने के बाद और गहरा गए थे। लेकिन नागरिकता संशोधन विधेयक में हिंदूओं के उत्पीड़न वाले देशों की सूची में जिस तरह से बांग्लादेश को शामिल किया गया है उससे बांग्लादेश को बड़ा झटका लगा है। यह न केवल दो देशों के बीच की बात रही बल्कि अब एक अंतरराष्ट्रीय मसला बन गया है जिसमें बांग्लादेश की छवि भी प्रभावित होने जा रही है।

लिहाजा उसने विधेयक पर कड़ी आपत्ति जाहिर की है। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक राज्यसभा में गृहमंत्री अमित शाह की टिप्पणी को संज्ञान में लेते हुए विदेश मंत्री मोमन ने ढाका ट्रिब्यून से बातचीत में कहा कि “वे हिदुओं के उत्पीड़न के सिलसिले में जो कह रहे हैं गैरजरूरी होने के साथ ही असत्य भी है।”

उन्होंने कहा कि “दुनिया में कुछ ही देश ऐसे हैं जहां बांग्लादेश जैसा सांप्रदायिक सौहार्द है। हमारे यहां अल्पसंख्यक नहीं हैं। हम सभी बराबर हैं। अगर वह (अमित शाह) बांग्लादेश में कुछ महीनों के लिए रुकते हैं तो वह हमारे देश में सांप्रदायिक सौहार्द की बेमिसालियत को देख सकेंगे। ”

उन्होंने कहा कि हम इस बात की आशा करते हैं कि भारत ऐसा कुछ नहीं करेगा जिससे दोनों देशों के रिश्ते प्रभावित हों।

भारत में बांग्लादेश के उच्चायुक्त रहे सैय्यद मौअज्जम अली ने भारत से जाने से पहले दिल्ली प्रेस क्लब में हुई प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि भारत को बांग्लदेश की विकास दर को खारिज नहीं करना चाहिए। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में देश की जीडीपी 8 से लेकर 8.1 फीसदी की गति से आगे बढ़ रही है। यह इलाके में सबसे तेजी से बढ़ने वाले देशों में से एक है।

इसके साथ ही उन्होंने बांग्लादेश से भारत आने वाले पर्यटकों की तरफ इशारा किया। उन्होंने कहा कि यह तादाद अब अमेरिका को भी पीछे छोड़ने जा रही है। पिछले साल 28 लाख बांग्लादेशी पर्यटकों ने भारत की यात्रा की थी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हमें नहीं भूलना चाहिए कि हजारों भारतीय इस समय बांग्लादेश में नौकरी कर रहे हैं।

इस बीच, जापान के प्रधानमंत्री की भारत यात्रा भी रद्द होने की खबर आ रही है। सिंजो अबे को रविवार को भारत आना था। और संयोग से भारतीय प्रधानमंत्री के साथ उनकी यह बैठक गुवाहाटी में ही होनी थी। लेकिन अब जबकि वहां के हालात सामान्य नहीं हैं तो उन्होंने अपनी यात्रा रद्द करने का फैसला ले लिया है। और बैठक को आगे के लिए टाल दिया गया है।

उधर, अमेरिका ने एक बार फिर इस मुद्दे पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि अमेरिका ने भारत से अपने संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों के तहत धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों की हर तरीके से रक्षा करने के लिए कहा है। अमेरिका ने यह प्रतिक्रिया सिटीजनशिप विधेयक के संसद से पारित होने के बाद विभिन्न राज्यों में भड़की हिंसा के बाद दी है।

प्रवक्ता ने कहा कि “सीएबी के मामले में हम पूरे घटनाक्रम पर बहुत नजदीक से नजर रख रहे हैं। धार्मिक स्वतंत्रता को सम्मान और कानून के तहत बराबरी का व्यवहार हमारे दो लोकतंत्रों का बुनियादी सिद्धांत रहा है।”

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