Wed. Feb 26th, 2020

नागरिकता कानून के खिलाफ अहमदाबाद में भी दिखा जनता का तेवर, छिटपुट हिंसा के बीच जिग्नेश समेत सैकड़ों लोग गिरफ्तार

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अहमदाबाद में विरोध प्रदर्शन।

अहमदाबाद। नागरिकता कानून के विरोध में आज पूरे देश में ज़बरदस्त विरोध प्रदर्शन हुआ। इस मौके पर आज अहमदाबाद को बंद करने का ऐलान किया गया था। जिसके परिणामस्वरूप अहमदाबाद के बड़े बाज़ार बंद रहे। लोगों ने बंद के काल को समर्थन देते हुए खुद ही कारोबार और दुकानें बंद रखी। 

आज अहमदाबाद में आधे दर्जन से अधिक स्थानों पर नागरिकता कानून के विरोध में प्रदर्शन का आयोजन था। लेकिन बंद के कॉल के चलते पुलिस ने सभी प्रदर्शनों की अनुमति रद्द कर दी थी। अनुमति न होते हुए भी अहमदाबाद में लाखों लोग सड़क पर थे। सबसे पहली गिरफ्तरी और पुलिस से झड़प की खबर अहमदाबाद के जंतर-मंतर कहे जाने वाले सरदार बाग से आई। जहां पर वाम पंथियों और समाजवादियों ने CAA के विरोध में प्रदर्शन रखा था। डेढ़ बजे पुलिस सरदार बाग से प्रदर्शनकारियों को डिटेन कर पुलिस स्टेडियम ले जा रही थी तभी पब्लिक ने गाड़ी को घेर लिया और फिर झड़प के बाद 2 गाड़ी में 20 से 25 लोगों को वो स्टेडियम ले जा सके। डिटेन होने वालों में CPM नेता अरुण मेहता, सोशलिस्ट पार्टी के गुजरात अध्यक्ष कौशर अली सैयद, SUCI के भाविन पटेल इत्यादि थे।

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सबसे बड़ी संख्या में गिरफ्तारी अहमदाबाद स्थित झांसी की रानी पुतले से हुई जहां पर बड़ी संख्या में लोग काले कानून के विरोध में एकत्र हुए थे। राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच के जगदीश चावड़ा ने बताया “लगभग 250 प्रदर्शनकारियों को झांसी की रानी से डिटेन कर सैटेलाइट पुलिस स्टेशन लाया गया है। विधायक जिग्नेश मेवानी को पुलिस ने शाही बाग शिफ्ट कर दिया है। प्रदर्शन करने वालों में जन संघर्ष मंच की निर्जरी सिन्हा और अमरीश पटेल, अनहद के देव देसाई और नूर जहां दीवान, राष्ट्रीय दलित अधिकार मंच से एडवोकेट सुबोध परमार, जगदीश चावड़ा, उमेश परमार, यश मकवाना, बड़ी संख्या में IIM, गुजरात यूनिवर्सिटी, cept यूनिवर्सिटी, निरमा यूनिवर्सिटी के छात्र शामिल थे जिनको पुलिस ने प्रदर्शन से रोका और फिर डिटेन किया।” जिग्नेश मेवानी को झांसी की रानी से डिटेन कर पुलिस पहले सैटेलाइट फिर शाही बाग पुलिस स्टेशन ले गई।

अहमदाबाद को बंद करने का पहला कॉल अल्पसंख्यक अधिकार मंच ने दिया था जिसको अन्य कई समाजिक संगठनों ने समर्थन दिया। मंच के अध्यक्ष शमशाद पठान को सुबह सुबह पुलिस घर से डिटेन करने की नियत से गई थी। लेकिन पठान घर पर नहीं मिले तो केवल सर्च कर वापस आ गई। बाद में उन्हें नज़रबंद कर लिया गया। जिसके चलते वह कहीं भी प्रदर्शन में शामिल नहीं हो पाए। 

सबसे बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी रखियाल में एकत्र हुए जिसके चलते सारंगपुर से अजित मिल का BRTS रूट बंद करना पड़ा। सामान्य आवा जाही के रस्ते भी बदलने पड़े। यहाँ पुलिस ने बहुत ही संयम बरता जिस कारण कोई अप्रिय घटना नहीं हुई। यहां प्रदर्शन का समय 5 बजे का था लेकिन अंतिम क्षणों में पुलिस ने पहले प्रदर्शन करके जाने को कह दिया। पौने चार बजे सबसे पहले आयोजन की अनुमति मांगने वाले सुफियान राजपूत को हिरासत में ले लिया। उसके बाद शहर कांग्रेस अल्पसंख्यक विभाग के प्रमुख ज़ुल्फिकार खान पठान, नगर पार्षद इकबाल शेख और देवेंद्र विषनगरी, पूर्व पार्षद अमजद खान पठान सहित 20 से 25 प्रदर्शनकारियों को रखियाल हिरासत में लेकर उन्हें गोमतीपुर पुलिस स्टेशन में रखा है। 

सभी जगह बंद और प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा लेकिन शाह आलम से पुलिस और प्रदर्शनकारीयों के बीच झड़प हुई जिसमें एक दर्जन पुलिस कर्मी और एक दो मीडिया कर्मी के अलावा दर्जनों प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। शाह आलम के अलावा लाल दरवाजे से भी कुछ हिंसा की खबरें आई हैं। इस समय शाह आलम के आस पास पुलिस कॉम्बिंग ऑपरेशन कर रही है। पालनपुर के छापी में भी पुलिस से झड़प हुई लेकिन सब कुछ शांतिपूर्ण रहा। कुछ जगह हिंसक प्रदर्शन के कारण सौराष्ट्र से अहमदाबाद आने वाली राज्य परिवहन की बसों के रूट भी बदलने पड़े रात आठ बजे तक गिरफ्तार लोगों को छोड़ा नहीं गया था। अहमदाबाद के अलावा गुजरात के कई अन्य शहरों में भी नागरिकता कानून के विरोध में प्रदर्शन और गिरफ्तारियां हुई हैं।

शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर अचानक पुलिस ने लाठी चार्ज कर भीड़ को हिंसक बना दिया किसी भी हिंसा के लिए पुलिस ही जिम्मेदार …

Kaleem Siddiqui ಅವರಿಂದ ಈ ದಿನದಂದು ಪೋಸ್ಟ್ ಮಾಡಲಾಗಿದೆ ಗುರುವಾರ, ಡಿಸೆಂಬರ್ 19, 2019

(अहमदाबाद से जनचौक संवाददाता कलीम सिद्दीकी की रिपोर्ट।)

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