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Wednesday, September 29, 2021

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यूपी में 102 और 108 एंबुलेंस सेवा ठप्प, 570 एंबुलेंस कर्मी बर्खास्त

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उत्तर प्रदेश में एंबुलेंस कर्मियों की हड़ताल आज चौथे दिन भी जारी है। गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश में 108 और 102 एम्बुलेंस सेवा के एम्बुलेंसकर्मी सोमवार से हड़ताल पर हैं। एंबुलेंसकर्मियों की हड़ताल के चलते 4500 एम्बुलेंस में 4300 के पहिये थम गए हैं और खामियाज़ा यूपी के मरीजों और तीमारदारों को भुगतना पड़ रहा है। राजधानी लखनऊ समेत हरदोई, बलरामपुर, जौनपुर, कानपुर वाराणसी समेत कई जिलों में इन हड़ताल का व्यापक असर दिख रहा है।

यूं तो हड़ताली एंबुलेंसकर्मियों की कुल 6 सूत्रीय मांगे हैं। जिसमें दो प्रमुख है। एक तो एंबुलेंसकर्मी ठेकेदारी प्रथा का विरोध करते हुये नियमितीकरण की मांग कर रहे हैं। और उनकी दूसरी मांग है कि एंबुलेंस सेवा को एनएचएम में जोड़ा जाए। उनकी मांग है कि उनको नियमित किया जाए। सेवा देने वाली कंपनी के बदलने पर उनको हटाया नहीं जाना चाहिए। साथ ही उनकी वेतन विसंगति दूर की जाये। 

चौथ दिन हड़ताल पर डटे हड़ताली एंबुलेंसकर्मियों का कहना है कि कोविड काल में हमने अपनी और अपने परिवार की जान की परवाह किये बिना अपनी सेवाएं दी, लेकिन हमारी बात सरकार नहीं सुन रही है। 

हड़ताल पर गये एंबुलेंसकर्मियों की मांगों को सुनने के बजाय प्रदेश की योगी सरकार ने तानाशाही रवैया अख्तियार करते हुये  एस्मा लगाकर क़रीब 570 कर्मियों को बर्खास्त कर दिया है। एंबुलेंस व्यवस्था को लेकर मुख्यमंत्री ने भी सख्त  निर्देश दिया है। टीम 9 की समीक्षा बैठक में उन्होंने निर्देश दिया कि 108 और 102 एंबुलेंस सेवा का संचालन निर्बाध रूप से किया जाए। एम्बुलेंस सेवा किसी भी दशा में बाधित नहीं होनी चाहिए। यह सुनिश्चित किया जाए कि प्रत्येक ज़‍रुरतमंद को एम्बुलेंस सेवा समय से प्राप्त हो जाए। यदि ऐसा नहीं होता है तो संबंधित एम्बुलेंस प्रोवाइडर के ख़िलाफ़  सख्त कार्रवाई की जाए।

इससे पहले हड़ताल के दूसरे दिन मंगलवार को एंबुलेंस का संचालन करने वाली कंपनी जीवीके ईएमआरआई ने एंबुलेंस संघ के प्रदेश अध्यक्ष समेत 14 कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया था वहीं हड़ताल तीसरे दिन बुधवार को प्रदेश सरकार द्वारा सख्त कदम उठाते हुये 570 एंबुलेंसकर्मियों को बर्खास्त करने के साथ ही राज्य के 

विभिन्न जिलों में पुलिस और प्रशासन की मदद से एंबुलेंसकर्मियों से एंबुलेंस वापस ले ली गई। इन्हें दूसरे चालकों को सौंपी गई है। जीवीके ईएमआरआई के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट टीवीएसके रेड्डी ने कहा कि लोगों की जिंदगी बचाने के लिए एंबुलेंस सेवा में किसी तरह की बाधा डालने वालों के ख़िलाफ़ सख्त कार्रवाई की जाएगी। क़रीब 570 एंबुलेंसकर्मियों को बर्खास्त कर दिया गया है। आगे भी सेवा बाधित करने का प्रयास करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कर्मचारियों से अपील की कि किसी के बहकावे में ना आकर ड्यूटी ज्वाइन करें। 

वहीं दूसरी तरफ एंबुलेंस कर्मचारी संघ के संगठन मंत्री नीतीश कुमार ने मीडिया से कहा कि पूरे प्रदेश में हड़ताल चल रही है। विभिन्न जिलों से एंबुलेंसकर्मी लखनऊ के लिए निकल पड़े हैं। सभी ईको गार्डेन पहुंचेंगे। यहां धरना चलता रहेगा। एंबुलेंस कर्मचारी संघ के अध्यक्ष हनुमान पांडेय ने मीडिया से कहा है कि सोमवार को हुई नेशनल हेल्थ मिशन के अधिकारियों के साथ वार्ता में सहमति नहीं बन सकी, इसीलिए हड़ताल जारी रहेगी।

4500 में से 4300 एम्बुलेंस नहीं चल रहीं

उत्तर प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री जय प्रताप सिंह का कहना है की 2020 में निजी कंपनी ने पेमेंट इश्यू के कारण सर्विसेज देने में असमर्थता जताते हुए सर्विस सरेंडर करने का पत्र शासन को भेजा था। पेमेंट का मामला कोर्ट भी पहुंचा पर बाद में आपसी सहमति बनी और निजी कंपनी फिर से 108 और 102 सर्विस संचालन करने को तैयार हुई। सरकार यह कह रही है कि टेंडर नॉर्म्स के तहत इस सेवा प्रदाता कंपनी के ख़िलाफ़ एक्शन लिया जाएगा और प्रदर्शन कर रहे कर्मचारी भी लपेटे में आएंगे। कोई मौत हुई तो ड्राइवर के ख़िलाफ़ हत्या का मामला दर्ज़ किया जाएगा। 

बता दें कि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने मई 2020 में ‘आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम 1966’ को लागू किया था तब से हर 6 महीने पर मियाद खत्म होने से पहले ही योगी सरकार अगले छः महीने के लिये एस्मा एक्ट को आगे बढ़ा देती है। 

एंबुलेंस हड़ताल का बलरामपुर जिला में दिखा असर।

गर्भवती महिला रिक्शे से अस्पताल पहुंची वहीं सड़क हादसे में घायलों को भी परेशानी हुयी। गंभीर बीमार मरीजों को एंबुलेंस सेवा बंद होने से बहुत दिक्कत हो रही है। ग़ाज़ियाबाद जिले में भी एक मरीज की मौत की ख़बर है। प्रदेश के अन्य जिलों में भी मरीजों को दिक़्क़त हो रही है। 

विपक्षी दल एंबुलेंसकर्मियों के समर्थन में उतरे

 उत्तर प्रदेश की मुख्य विपक्षी दलों ने हड़ताली एंबुलेंसकर्मियों की मांगों का समर्थन किया है। 

समाजवादी पार्टी ने अपने आधिकारिक ट्विटर हैंडल पर एंबुलेंसकर्मियों के आंदोलन से संबंधित ख़बरों और रिपोर्ट की अख़बारी कतरने साझा करते हुये इसे सरकार की तानाशाही बताया है।

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने ट्वीट करके लिखा है-” भाजपा सरकार की हठधर्मिता के चलते लोगों की जान जा रही है।108-102 एंबुलेंस कर्मी 3 दिन से हड़ताल पर हैं। लेकिन इसका खामियाजा जनता को भुगतना पड़ रहा है।लखनऊ में एंबुलेंस ना होने पर किशोरी की गई जान”। 

एंबुलेंसकर्मियों के वकील और सहयोगी पर मुक़दमा दर्ज़

जीवीके कंपनी के अधिकारी की तहरीर पर पुलिस ने एस्मा सहित कई संगीन धाराओं में राजधानी लखनऊ के आशियाना थाने में एंबुलेंस सेवा 102 और 108 को बाधित करने की साजिश रचने के आरोप में कर्मचारी संगठन के वकील अभिनव नाथ त्रिपाठी और विक्रम सैनी पर मुक़दमा दर्ज़ किया है। दोनों पर कर्मचारियों को हड़ताल करने के लिए उकसाने और स्वास्थ्य सेवा को बाधित करने की साजिश रचने का आरोप लगा है। 

प्रभारी निरीक्षक आशियाना बृजेंद्र कुमार मिश्रा ने मीडिया को बताया है कि जीवीके के सीएस कमलाकन्नन सुंदरम ने तहरीर दी है। जिसमें कहा गया है कि कंपनी पिछले कई साल से प्रदेश में एंबुलेंस सेवा को संचालित कर रही है। आरोप लगाया कि 26 जुलाई से एंबुलेंस सेवा का संचालन ठप हो गया है। एंबुलेंस सेवा को संचालित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले चालक व अन्य कर्मचारी हड़ताल पर हैं। जिसके कारण पूरे प्रदेश में स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित हो रही है। इस महत्वपूर्ण सेवा को बाधित करने के लिए मुख्य साजिशकर्ता अभिनव नाथ त्रिपाठी हैं। इस कार्य में उनका सहयोग विक्रम सैनी ने दिया। दोनों ने कर्मचारियों को उकसा कर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को प्रभावित किया है। अभिनव नाथ त्रिपाठी अधिवक्ता हैं। वह एंबुलेंस सेवा से जुड़े कर्मचारियों के वकील हैं। प्रभारी निरीक्षक के मुताबिक जीवीके के सीएस की तहरीर पर दोनों आरोपियों पर महामारी अधिनियम, आवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम, साजिश रचने, धारा 144 का उल्लंघन करने, सरकारी काम में बाधा उत्पन्न करने की धाराओं में मुक़दमा दर्ज़ किया गया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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