Saturday, October 16, 2021

Add News

अमेरिकी नागरिक संगठनों ने उठाई संजीव भट्ट की रिहाई की मांग

Janchowkhttps://janchowk.com/
Janchowk Official Journalists in Delhi

ज़रूर पढ़े

सुप्रीम कोर्ट ने हिरासत में हुई मौत के एक मामले में आजीवन कारावास की सजा निलंबित करने को लेकर पूर्व आईपीएस संजीव भट्ट की याचिका पर सुनवाई 22 जनवरी से टालकर 27 जनवरी कर दी है। इससे पहले शीर्ष अदालत ने सोमवार को पूर्व  याचिका को जनवरी के तीसरे हफ्ते में सूचीबद्ध किया है।

कल शुक्रवार को मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस एमआर शाह और जस्टिस आर सुभाष रेड्डी की पीठ ने कहा कि हम इस मामले को 27 जनवरी को सुनेंगे। संजीव भट्ट के वकील फारूख रशीद ने सुनवाई टालने की अपील की थी। रशीद ने पीठ को बताया कि इस मामले में वरिष्ठ वकील अस्वस्थ हैं और मामले को टाल दिया जाए।

बता दें कि अक्तूबर, 2019 में गुजरात हाई कोर्ट ने पालनपुर की जेल में बंद भट्ट की सजा निलंबित करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद संजीव भट्ट ने सुप्रीम कोर्ट में एक हलफनामा दायर किया था।

इससे पहले सोमवार 18 जनवरी को इंडियन अमेरिकन मुस्लिम काउंसिल (IAMC ) और हिंदूज फॉर ह्यूमन राइट्स द्वारा आयोजित एक ऑनलाइन संवाददाता सम्मेलन में नागरिक संगठनों और कार्यकर्ताओं ने दावा किया कि हत्या के एक मामले में भट्ट पर लगे आरोप गलत हैं और झूठे सबूतों पर आधारित हैं। कार्यक्रम में भारत और अमेरिका के कई नागरिक अधिकार कार्यकर्ताओं और संगठनों ने भारत के उच्चतम न्यायालय से अपील की कि 22 जनवरी की सुनवाई में वह पूर्व पुलिस अधिकारी संजीव भट्ट की जमानत मंजूर करे।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री शशि थरूर ने कहा कि वह भट्ट के साथ हुए अन्याय से क्षुब्ध हैं, जिन्हें समाज के लिए कर्तव्यनिष्ठ होकर सेवा करने और ताकतवर से सच बोलने की अदम्य क्षमता के कारण जेल भेज दिया गया।

थरूर ने कहा, ‘‘संजीव का मामला उस खराब दौर को दर्शाता है, जिसमें हम रह रहे हैं, जहां सभी भारतीयों को संविधान द्वारा प्रदत्त संवैधानिक मूल्य एवं मौलिक अधिकार कई मामलों में कमजोर होते और कई बार ऐसी ताकतों द्वारा छीने जाते भी प्रतीत होते हैं जो उदार नहीं हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘जिन भारतीयों की अंतरात्मा संजीव भट्ट की तरह जीवित है, उन्हें खड़े होना चाहिए और इस प्रकार की चुनौतियों के खिलाफ लड़ना चाहिए, जो हमारे गणतंत्र के आधार को कमजोर करने का खतरा पैदा कर रही हैं।’’

प्रख्यात वृत्तचित्र फिल्म निर्माता आनंद पटवर्धन ने कहा कि भट्ट को इसलिए जेल भेज दिया गया, क्योंकि उन्होंने 2002 में हुए नरसंहार का विरोध किया और इसके खिलाफ आवाज उठाई। पटवर्धन ने कहा कि समाज को भट्ट की रिहाई के लिए आंदोलन चलाना चाहिए।

मानवाधिकार कार्यकर्ता, शास्त्रीय नृत्यांगना और अभिनेत्री मल्लिका साराभाई ने कहा कि ऐसा नहीं है कि केवल भट्ट के मामले में उनके खिलाफ निश्चित एजेंडा चलाया जा रहा है, बल्कि मोदी सरकार के अधिकतर आलोचकों के साथ ऐसा हो रहा है।

साराभाई ने कहा, “यदि कोई सरकार के खिलाफ बोलता है या कोई सवाल पूछता है, जो कि हमारे लोकतंत्र में प्रदत्त मौलिक अधिकार है, तो उसे किसी न किसी तरह दंडित किया जाता है। उसके खिलाफ छापे मारे जाते हैं, झूठे मामले चलाए जाते हैं और उन्हें चुप करा दिया जाता है।”

आईएएमसी के कार्यकारी निदेशक रशीद अहमद ने कहा कि भारत सरकार को संजीव भट्ट के मामले का राजनीतिक प्रबंधन बंद कर देना चाहिए और सरकार से डरे हुए या स्वयं राजनीतिक बन चुके न्यायाधीशों के बजाए स्वतंत्र न्यायाधीशों की निगरानी में कानून को अपना काम करने देना चाहिए।”

तत्काल समाचारों के लिए, हमारा जनचौक ऐप इंस्टॉल करें

Latest News

जलवायु सम्मेलन से बड़ी उम्मीदें

जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र का 26 वां सम्मेलन (सीओपी 26) ब्रिटेन के ग्लास्गो नगर में 31 अक्टूबर से...
जनचौक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें

Janchowk Android App

More Articles Like This

- Advertisement -

Log In

Or with username:

Forgot password?

Forgot password?

Enter your account data and we will send you a link to reset your password.

Your password reset link appears to be invalid or expired.

Log in

Privacy Policy

Add to Collection

No Collections

Here you'll find all collections you've created before.