पूर्व आईपीएस अमिताभ ठाकुर को 9 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेजा, नया मुकदमा दर्ज़

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पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर की अखिलेश सरकार के दौरान भाजपा से गलबहियां पूरा प्रशासनिक अमला जानता है। लेकिन सपा के बाद भाजपा की सरकार आने पर अमिताभ ठाकुर को न केवल अच्छी पोस्टिंग नहीं मिली उनके चिर असंतुष्ट होने और उनकी वकील पत्नी के आरटीआई एक्टिविस्ट के रूप में योगी सरकार को कटघरे में खड़े करने की कोशिशों के चलते अमिताभ ठाकुर को सरकार ने अनिवार्य सेवा निवृत्ति दे दी थी। इसके बाद गोरखपुर से चुनाव लड़ने की घोषणा ने आग में घी का काम कर दिया और उच्चतम न्यायालय के सामने दुष्कर्म पीड़िता का आत्मदाह अमिताभ ठाकुर के लिए गिरफ़्तारी का कारण बन गया। अमिताभ ठाकुर को एक महिला और उसके मित्र को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किए जाने के कुछ घंटों बाद लखनऊ की एक अदालत ने उन्हें 9 सितंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया।

इसके साथ ही पुलिस ने शनिवार को अमिताभ ठाकुर और उनकी पत्नी नूतन ठाकुर के खिलाफ गोमती नगर थाने में आईपीसी की धारा 186/189/224/225/323/353/427 के तहत सरकारी कार्य में बाधा उत्पन्न करने में मुकदमा दर्ज किया है। नूतन ठाकुर ने पहले ही आशंका जताई थी कि अभी तो न जाने कितनी और एफआईआर दर्ज कराई जाएंगी।

उच्चतम न्यायालय के सामने आत्मदाह करने वाली 24 वर्षीय महिला, जिसका 2019 में बहुजन समाज पार्टी के सांसद अतुल राय द्वारा कथित रूप से बलात्कार किया गया था, उसने 24 अगस्त को दम तोड़ दिया। उसके 27 वर्षीय मित्र की पिछले सप्ताह इलाज के दौरान मृत्यु हो गई थी। महिला ने आरोप लगाया था कि अमिताभ ठाकुर ने सांसद अतुल राय के खिलाफ मामला वापस लेने के लिए या इसे कमजोर करने की धमकी देने में आरोपी की मदद की थी।

इस घटना के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने महिला द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच के लिए दो सदस्यीय जांच पैनल का गठन किया था। इस पैनल का नेतृत्व डीजीपी (पुलिस भर्ती और प्रोन्नति बोर्ड) राज कुमार विश्वकर्मा ने किया था और इसमें अतिरिक्त डी-जी (महिला पावर लाइन) नीरा रावत शामिल थीं। मामले की जांच करते हुए पैनल ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी और उसी के आधार पर, लखनऊ पुलिस ने ठाकुर और राय के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की और बाद में ठाकुर को महिला को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया।

अतुल राय पहले से ही प्रयागराज के नैनी जेल में बंद हैं। ठाकुर के खिलाफ प्राथमिकी में आईपीसी की धारा 167, धारा 195-ए (झूठे सबूत के लिए किसी व्यक्ति को धमकी देना), 218 (गलत रिकॉर्ड बनाना, आदि), आईपीसी की धारा 504, धारा 506 और आईपीसी 120-बी (आपराधिक साजिश) के तहत आरोप शामिल हैं।

पुलिस महानिदेशक मुकुल गोयल ने शुक्रवार को एक बयान में कहा है कि 16 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट के समक्ष पीड़िता और उसके साथी द्वारा आत्मदाह के प्रयास के संबंध में सरकार ने एक जांच समिति का गठन किया था, जो अपने अंतरिम में जांच रिपोर्ट में घोसी से बसपा सांसद अतुल राय और अमिताभ ठाकुर को प्रथम दृष्ट्या पीड़िता और उसके सहयोगी गवाह को आत्महत्या के लिए उकसाने और अन्य आरोपों का दोषी पाया गया और उनके खिलाफ मामला दर्ज करने की भी सिफारिश की। उत्तर प्रदेश की एक युवती ने 2019 में बसपा सांसद अतुल राय पर बलात्कार का आरोप लगाते हुए केस दर्ज कराया था।

गिरफ़्तारी से कुछ घंटे पहले ही पूर्व आईपीएस अधिकारी अमिताभ ठाकुर ने नई राजनीतिक पार्टी के गठन का ऐलान किया था और मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके हैं।

इस बीच सांसद अतुल राय के भाई ने पिछले साल नवंबर में वाराणसी में युवती के खिलाफ कथित तौर पर उसकी जन्मतिथि के बारे में जाली दस्तावेज बनाने की शिकायत दर्ज कराई थी। इसे लेकर युवती के खिलाफ केस दर्ज किया गया था। जब पुलिस ने अदालत को बताया कि कई छापों के बावजूद वह लापता हैं तो बीते 2 अगस्त को वाराणसी की एक अदालत ने युवती के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था।

दरअसल पूर्व आईपीएस ठाकुर के हाथरस गैंगरेप मामले में डीएम के खिलाफ कार्रवाई करने के बयान और आत्मसमर्पण के बाद गैंगस्टर विकास दुबे को मुठभेड़ में मार गिराए जाने को लेकर आशंका जताई थी, जिससे सत्तारूढ़ भाजपा खफा थी और यह उनके समय से पहले सेवानिवृत्ति का कारण हो सकता है। हाथरस में उच्च जाति के चार युवकों द्वारा दलित लड़की के गैंगरेप और हत्या के बाद ठाकुर ने हाथरस के डीएम के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग की थी। इसके साथ ही गैंगस्टर विकास दुबे के आत्मसमर्पण के बाद उन्होंने (ठाकुर) सार्वजनिक तौर पर यह भी कहा था कि विकास दुबे को मुठभेड़ में मार गिराया जा सकता है। बीते मई महीने में ठाकुर ने आरोप लगाया था कि उत्तर प्रदेश सरकार ने उन्हें दी गई अनिवार्य सेवानिवृत्ति से संबंधित दस्तावेज देने से मना कर दिया है। राज्य के नागरिक सुरक्षा विभाग के पुलिस महानिरीक्षक के तौर पर ठाकुर ने भ्रष्टाचार के आरोप भी लगाए थे।

अमिताभ ठाकुर की उत्तर प्रदेश की अखिलेश सरकार से भी तनातनी रही थी और जुलाई, 2015 में अखिलेश सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव पर उन्हें धमकाने का आरोप लगाया था। अप्रैल, 2016 में उन्हें नौकरी पर बहाल कर दिया गया था।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)

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