Thursday, October 21, 2021

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अनिल अंबानी, पूर्व सीबीआई अफसर अलोक वर्मा और राकेश अस्थाना को भी पेगासस ने नहीं बख्शा

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पेगासस जासूसी में जिस तरह भारतीय नाम सामने आ रहे हैं उससे तो यही प्रतीत हो रहा है कि अभी न्यायपालिका, विधायिका, आर्थिक विशेषज्ञ और सरकार में शामिल बड़े लोगों में बहुत से नाम आने वाले दिनों में सामने आएंगे। ऐसा लगता है कि जो भी मोदी सरकार के प्रति खिलाफत का रुख रखता है, या जिसकी स्वामिभक्ति पर संदेह है, या जो सरकार बनाने बिगाड़ने की क्षमता रखता है वे सभी पेगासस के दायरे में हैं। नए खुलासे में पूर्व सीबीआई चीफ आलोक वर्मा, सरकार के चहेते राकेश अस्थाना, आईपीएस एके शर्मा, सरकार के गोदी उद्द्योगपति अनिल अंबानी, प्रवीण तोगड़िया जैसे नाम सामने आये हैं।

पेगासस जासूसी में अनिल अंबानी और अनिल धीरूभाई अंबानी समूह के कॉर्पोरेट कम्यूनिकेशन अधिकारी टोनी जेसुदासन के साथ उनकी पत्नी का नाम भी इस लिस्ट में शामिल किया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती है कि अनिल अंबानी वर्तमान में उसी फोन नंबर का इस्तेमाल कर रहे हैं या नहीं। ADA की ओर से फिलहाल इस पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।

रिपोर्ट के अनुसार भारत में दसॉल्ट एविएशन (राफेल विमान बनाने वाली कंपनी) के प्रतिनिधि वेंकट राव पोसिना, साब इंडिया के प्रमुख इंद्रजीत सियाल और बोइंग इंडिया के प्रमुख प्रत्यूष कुमार के नंबर भी 2018 और 2019 में विभिन्न अवधि में लीक आंकड़े में शामिल हैं। इसके साथ ही फ्रांस की कंपनी एनर्जी इडीएफ के प्रमुख हरमनजीत नेगी का फोन भी लीक आंकड़े में शामिल है। फ्रांस से राफेल डील को लेकर विपक्ष के नेता केंद्र सरकार पर अनिल अंबानी को फायदा पहुंचाने के आरोप लगाते रहे हैं।

पेगासस जासूसी कांड से देश में राजनीतिक जलजला आ गया है। जासूसी कांड पर हंगामा बढ़ता ही जा रहा है। एक तरफ संसद में इसकी गूंज सुनाई पड़ रही है तो दूसरी तरफ कथित जासूसी वाली लिस्ट दिन-ब-दिन लंबी होती जा रही है। द वायर के नए खुलासे में कहा गया है कि जिन लोगों के फोन की निगरानी की गई, उनमें पूर्व सीबीआई चीफ आलोक वर्मा और उनके परिवार के कुल सात लोगों के नाम भी शामिल हैं। इनके अलावा, सीबीआई के दो और पूर्व सीनियर ऑफिसर राकेश अस्थाना, गुजरात कैडर के आईपीएस एके शर्मा के पर्सनल फोन की निगरानी हो रही थी।

द वायर में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, राकेश अस्थाना, एके शर्मा, आलोक वर्मा और उनके पारिवारिक सदस्यों के फोन नंबर लीक हुए डेटाबेस में कुछ देर के लिए दिखे थे। 31 जनवरी 2019 तक अस्थाना और शर्मा के फोन सहित ये सभी नंबर सूची में बने रहे। उन्हें फरवरी 2019 को लिस्ट से हटा लिया गया। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि आलोक वर्मा के साथ उनकी पत्नी, बेटी और दामाद के फोन की निगरानी हो रही थी। हालांकि, आलोक वर्मा ने इसकी पुष्टि के लिए संबंधित मोबाइलों की फरेंसिक जांच करवाने को तैयार नहीं हैं।

पेगासस स्पाइवेयर बनाने वाली इजरायली कंपनी एनएसओ ग्रुप का कहना है कि कथित जासूसी वाले फोन नंबरों की लीक हुई लिस्ट का न पेगासस से और न ही एनएसओ से कुछ लेना-देना है। हालांकि, सरकार और सत्तारूढ़ बीजेपी ने पेगासस प्रॉजेक्ट रिपोर्ट को मनगढ़ंत और साक्ष्य विहीन करार दिया है। इजराइली समूह एनएसओ ने कहा है कि लीक हुए डाटाबेस तक फ्रांस के गैर-लाभकारी मीडिया संगठन ‘फॉरबिडेन स्टोरीज’ की पहुंच थी।

सिर्फ 22 वर्ष की उम्र में वर्ष 1979 में आईपीएस अधिकारी बने आलोक वर्मा को एजीएमयूटी (अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम, केंद्रशासित प्रदेश) कैडर मिला था। वो दिल्ली के पुलिस कमिश्नर, दिल्ली के जेल डायरेक्टर, मिजोरम और पुदुचेरी के डीजीपी आदि की जिम्मेदारी निभाते हुए सीबीआई के डायरेक्टर बने। सीबीआई के इतिहास में वर्मा पहले ऐसे अधिकारी हैं जिनकी निदेशक पद पर लैटरल एंट्री हुई।

आलोक वर्मा ने 21 अक्टूबर 2018 को सीबीआई में नंबर दो माने जाने वाले तत्कालीन विशेष निदेशक राकेश अस्थाना के खिलाफ भ्रष्टाचार का एक मामला दर्ज किया था। मीट कारोबारी मोईन कुरैशी केस में सतीश साना नाम के एक शख्स से दो करोड़ रुपये लेने के आरोप में अस्थाना पर एफआईआर दर्ज करवाया गया था। वहीं, राकेश अस्थाना ने भी वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार का आरोप लगा दिया। केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) ने आलोक वर्मा पर लगे आरोपों की जांच की और उसकी रिपोर्ट पर प्रधानमंत्री की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय हाई पावर कमेटी ने उन्हें पद से हटाने का फैसला किया। सीबीआई के तत्कालीन निदेशक आलोक वर्मा को 23 अक्टूबर 2018 को पद से हटाए जाने के तुरंत बाद उनके एवं उनके परिवार के सदस्यों के आठ फोन को एक अज्ञात भारतीय एजेंसी ने पेगासस स्पाईवेयर का इस्तेमाल कर जासूसी वाली लिस्ट में डाल दिया था। वर्मा 31 जनवरी 2019 को रिटायर हो गए।

पेगासस स्पायवेयर के जरिये निगरानी करने की संभावना जताई गई है। ये सब उस समय हुआ जब 23 अक्टूबर 2018 की आधी रात को मोदी सरकार ने तत्कालीन सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा और तत्कालीन विशेष निदेशक को छुट्टी पर भेज दिया था। द वायर द्वारा प्राप्त किए गए दस्तावेजों से पता चलता है कि उसी रात कुछ घंटे बाद ही पेगासस स्पायवेयर के माध्यम से एक अज्ञात भारतीय एजेंसी ने वर्मा के नंबर को संभावित टारगेट की सूची में शामिल किया था। सिर्फ वर्मा ही नहीं, बल्कि उनकी पत्नी, बेटी और दामाद समेत उनके परिवार के आठ लोगों के नंबर इस निगरानी सूची में शामिल किए गए थे।

विवादित आईपीएस राकेश अस्थाना को भी उसी रात हटाया गया था और उनके नंबर भी उस समय इस लिस्ट में शामिल किए गए थे। अस्थाना इस समय केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के प्रमुख हैं।

23 अक्टूबर 2018 को सीबीआई में आधी रात को उठापटक उस समय हुई थी जब इसके दो दिन पहले वर्मा ने भष्टाचार का आरोप लगाते हुए राकेश अस्थाना के खिलाफ केस दर्ज करने का आदेश दिया था। खास बात ये है कि 21 अक्टूबर 2018 को दर्ज किया गया ये केस फोन टैपिंग से ही जुड़ा हुआ था, जिसके चलते सत्ता के शीर्ष स्तर पर असहजता की स्थिति उत्पन्न हो गई थी। अस्थाना की मोदी से करीबी पहले से ही जगजाहिर थी। इसके दो दिन बाद अस्थाना ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) में वर्मा के खिलाफ केस दायर करवा दिया। वर्मा के खिलाफ कार्रवाई करने की एक बड़ी वजह ये भी मानी जाती है कि उन्होंने विवादित राफेल मामले में जांच की मांग को खारिज नहीं किया था।

राकेश अस्थाना गुजरात कैडर के 1984 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं। वो धनबाद में सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा के एसपी रहे। इसके बाद वो रांची में डीआईजी के पद पर भी रहे। अस्थाना ने तत्कालीन बिहार में जब झारखंड अलग नहीं हुआ था, लालू प्रसाद यादव के मुख्यमंत्री रहते हुए चारा घोटाला, 2002 में गुजरात के गोधरा स्थित ट्रेन अग्निकांड जैसे कई महत्वपूर्ण मामलों की जांच की थी। गोधरा मामले के समय अस्थाना इंस्पेक्टर जनरल इंचार्ज थे। वर्ष 1996 में अस्थाना ने चारा घोटाला के सिलसिले में लालू प्रसाद से छह घंटे की लंबी पूछताछ की थी और अगले वर्ष 1997 में उन्हें गिरफ्तार कर लिया था। तब अस्थाना की उम्र महज 35 वर्ष थी। तब वो सीबीआई के एसपी थे।

अरुण कुमार शर्मा मूलतः बिहार से हैं। वो 1987 बैच के गुजरात कैडर के आईपीएस अधिकारी नियुक्त हुए। वर्ष 2015 के अप्रैल महीने में शर्मा को सीबीआई का जॉइंट डायरेक्टर बनाया गया। उसके बाद वो दिल्ली में सीआरपीएफ के एडीजी बने। इससे पहले वो अहमदाबाद डिटेक्शन ऑफ क्राइम ब्रांच के स्पेशल कमिश्नर पद पर तैनात रह चुके हैं। इसी वर्ष की शुरुआत में ही उन्हें फिर से गुजरात वापस भेज दिया गया। अब वो गुजरात पुलिस के अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति और कमजोर वर्ग के खिलाफ अत्याचार पर रोकथाम विभाग के डीजीपी हैं।

पूर्व कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने वर्ष 2018 में शर्मा पर शराब कारोबारी विजय माल्या को देश से भगाने का आरोप लगाया था। उस वक्त वो सीबीआई के जॉइंट डायरेक्टर थे। राहुल ने कहा था कि शर्मा ने माल्या का लुकआउट नोटिस कमजोर कर दिया था, जिस कारण उसे भागने में मदद मिली। उन्होंने 15 सितंबर, 2018 को ट्वीट किया, ‘सीबीआई के जॉइंट डायरेक्टर एके शर्मा ने माल्या का लुक आउट नोटिस कमजोर कर दिया जिससे माल्या भाग निकला। गुजरात कैडर के ऑफिसर  शर्मा सीबीआई में पीएम के चहेते हैं। यही ऑफिसर नीरव मोदी और मेहुल चोकसी को भगाने की योजना में संलिप्त रहे हैं।

द वायर ने कहा है कि अब तक उसने भारत में जासूसी की जद में आने वाले 128 लोगों की लिस्ट तैयार कर ली है। उसके मुताबिक, 16 अन्य मीडिया संस्थान भी इस काम में जुटे हैं। फ्रांस का मीडिया संस्थान ‘फॉरबिडेन स्टोरीज’ ने इजरायली कंपनी एनएसओ ग्रुप के ग्राहकों की तरफ से जिन लोगों को जासूसी के मकसद से टार्गेट किया, उनमें 50 हजार लोगों का डेटाबेस उसे हाथ लग गया है।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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