Subscribe for notification

अब बांद्रा एफआईआर पर अर्णब पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

महाराष्ट्र सरकार के बाद रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी ने अब एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया है। उन्होंने एक याचिका के जरिये अपने ख़िलाफ़ बांद्रा मामले में दर्ज ताज़ा एफआईआर को रद्द करने की मांग की है। रिपब्लिक चैनल के संपादक अर्णब गोस्वामी के ख़िलाफ़ मुंबई में यह नयी एफआईआर दर्ज की गयी है। इस एफआईआर में अर्णब पर धार्मिक उन्माद पैदा करने का आरोप लगाया गया है।

ग़ौरतलब है कि मुंबई में ट्रेन से प्रवासियों को ले जाने की अफ़वाह के बाद हज़ारों की संख्या में मज़दूर बांद्रा स्टेशन पर इकट्ठा हो गए थे। आरोप है कि इससे सम्बन्धित समाचार देते समय अर्णब गोस्वामी ने बार-बार इस बात पर ज़ोर दिया कि आख़िर सभी प्रवासी मज़दूर बांद्रा स्टेशन के पास स्थित मस्जिद के पास क्यों एकत्रित हुए हैं। उनका ज़ोर बांद्रा रेलवे स्टेशन की जगह मस्जिद पर ज्यादा था। एफआईआर में आरोप है कि 29 अप्रैल को हिंदी चैनल ‘रिपब्लिक भारत’ ने बांद्रा में हुए प्रवासी मजदूरों के प्रदर्शन का फुटेज चलाया, जिसकी एंकरिंग अर्णब गोस्वामी कर रहे थे। बांद्रा में हुए प्रवासी मजदूरों के प्रदर्शन का वहां की मस्जिद से कोई लिंक नहीं था। वहां लोग सिर्फ इसलिए इकट्ठा हुए, क्योंकि मस्जिद के सामने खुली जगह थी। लेकिन अर्णब गोस्वामी ने सोच समझकर मस्जिद को साजिशन इस घटना का केंद्र बना दिया, ताकि शहर में सांप्रदायिक उपद्रव हो सके।

मुंबई के पायधुनी पुलिस स्टेशन में दर्ज हुई इस एफआईआर में अर्णब पर सांप्रदायिक वैमनस्य फैलाने का आरोप लगाया गया है और उनके ख़िलाफ़ तमाम संगीन क़िस्म की धाराएँ लगायी गयी हैं। इनमें कई ग़ैरज़मानती हैं। उनके ख़िलाफ़ लगी प्रमुख धाराओं में 153, 153A, 295A, 500, 505 (2), 511, 120 (B), 505 (1) शामिल हैं।रजा फाउंडेशन वेलफेयर सोसायटी के सेक्रेटरी और नल बाजार निवासी इरफान अबुबकर शेख ने अर्णब गोस्वामी पर यह एफआईआर पायधुनी पुलिस स्टेशन में दर्ज कराई है।

गोस्वामी ने इस प्राथमिकी को रद्द करने की मांग के लिए सर्वोच्च न्यायालय का रुख किया है और एक सरसरी निर्देश देने की मांग की है कि किसी भी अदालत द्वारा किसी भी शिकायत पर संज्ञान न लिया जाए या पुलिस द्वारा दर्ज की गई किसी भी शिकायत पर कार्रवाई न की जाए ।उन्होंने महाराष्ट्र राज्य कर्मियों और एजेंटों के खिलाफ प्रतिबंध लगाने की भी मांग की है, ताकि वे बांद्रा की घटना के मुद्दे पर उनके डिबेट कार्यक्रमों के संबंध में उनके खिलाफ कोई भी प्राथमिकी दर्ज नहीं कर सकें।

अपनी याचिका में, गोस्वामी ने दावा किया है कि कांग्रेस पार्टी के पारिस्थितिकी तंत्र ने मुंबई में एक गढ़े हुए प्रवासी संकट का एक नकली आख्यान बनाने की भी कोशिश की।अपनी याचिका में, उनका दावा है कि रिपब्लिक टीवी इस तथ्य की रिपोर्ट करने वाला पहला चैनल था कि राजनीतिक हित समूह, मुख्य रूप से कांग्रेस के नेता, मुंबई में फर्जी खबरें फैला रहे थे और तालाबंदी उल्लंघन कर रहे थे, जो राष्ट्रीय चिंता का विषय है।

गोस्वामी ने याचिका में दावा किया है कि प्राथमिकी “राजनीति से प्रेरित” है और उनके खिलाफ मुंबई पुलिस ने “हार्बर बीमार” के रूप में प्राथमिकी दर्ज किया है। मुंबई पुलिस ने याचिकाकर्ता के प्रति दुर्भावना से प्रेरित होकर एफआईआर दर्ज किया है, जैसा कि मुंबई पुलिस द्वारा (कांग्रेस कार्यकर्ता द्वारा दायर मानहानि मामले में) के जांच के तरीके से स्पष्ट है। याचिका में कहा गया है कि चूंकि पुलिस को पता है कि सोनिया गांधी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियों से संबंधित मामले में उन्हें “फंसाया” नहीं जा सकता, इसलिए अब एक नई प्राथमिकी दर्ज की गई है। याचिका में लिखा है कि प्रतिवादी संख्या तीन  (इरफान अबुबकर शेख) द्वारा दायर एक शिकायत के आधार पर एफआईआर दर्ज की है, जो कि पूरी तरह गलत है, प्रतिशोधी, तुच्छ, और दुर्भावनापूर्ण है।

गोस्वामी ने अपनी याचिका में दावा किया कि बांद्रा की घटना एक “नकली प्रवासी संकट” थी जिसका पर्दाफाश उन्होंने अपने बहस कार्यक्रम के माध्यम से किया। उन्होंने रिपब्लिक टीवी और अपने परिवार और अपने सहयोगियों को पर्याप्त सुरक्षा मुहैया कराने की भी मांग की है। अपनी पिछली याचिका में उन्होंने केंद्र सरकार से सुरक्षा की मांग की थी।

इसी बीच, महाराष्ट्र सरकार ने अर्णब गोस्वामी को मिले अंतरिम संरक्षण के खिलाफ सोमवार 4 मई को उच्चतम न्यायालय में अर्ज़ी देकर कहा है कि अर्णब गोस्वामी घमंडी हैं, जांच में बाधा डाल रहे हैं, पुलिस को धमकी दे रहे हैं। मुंबई पुलिस की ओर से महाराष्ट्र सरकार द्वारा एक अर्जी उच्चतम न्यायालय में दायर की गई है जिसमें आरोप लगाया गया है कि रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्णब गोस्वामी पुलिस को धमकी दे रहे हैं। 24 अप्रैल को, रिपब्लिक टीवी एडिटर-इन-चीफ को उच्चतम न्यायालय ने उनके खिलाफ दर्ज कई एफआईआर के आलोक में तीन सप्ताह की अवधि के लिए किसी भी आक्रामक कार्रवाई से अंतरिम सुरक्षा प्रदान की थी।

Donate to Janchowk!
Independent journalism that speaks truth to power and is free of corporate and political control is possible only when people contribute towards the same. Please consider donating in support of this endeavour to fight misinformation and disinformation.

Donate Now

To make an instant donation, click on the "Donate Now" button above. For information regarding donation via Bank Transfer/Cheque/DD, click here.

This post was last modified on May 5, 2020 6:49 pm

Share