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झारखंड के क्वारंटीन सेंटरों में बुनियादी सुविधाओं का घोर अभाव, लोगों में आक्रोश

झारखंड सरकार लगातार दावा कर रही है कि क्वारंटीन सेंटरों में कोई कमी नहीं होने दी जायेगी, लेकिन जमीनी हकीकत इस दावे से इतर है। झारखंड के क्वारंटीन सेंटरों में ना तो नहाने व पीने के पानी की सुविधा है, ना तो 24 घंटे बिजली की और ना ही साफ-सफाई की। बहुत सारे क्वारंटीन सेंटरों में शौचालय की सुविधा भी नहीं है, तो कई क्वारंटीन सेंटरों में रह रहे प्रवासी मजदूरों को भरपेट खाना भी नहीं दिया जाता है।

झारखंड सरकार द्वारा 18 मई को रात 8 बजे जारी किये गये कोविड-19 बुलेटिन के अनुसार सरकारी क्वारंटीन सेंटरों में कुल 51 हजार 718 व्यक्ति रह रहे हैं। ज्यादातर क्वारंटीन सेंटर सरकारी विद्यालयों व महाविद्यालय में ही बनाये गये हैं। ग्रामीण इलाके के विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं (पानी, बिजली, शौचालय आदि) का अभाव हमेशा रहा है, ऐसे में अचानक वहाँ क्वारंटीन सेंटर बना कर उसमें प्रवासी मजदूरों को रखा गया है, लेकिन विद्यालयों की बुनियादी सुविधाओं में कोई सुधार नहीं हुआ है। फलस्वरूप क्वारंटीन सेंटर में रह रहे लोगों में सरकार के प्रति आक्रोश गहराता जा रहा है।

खबर के मुताबिक 17 मई को झारखंड के कई क्वारंटीन सेंटरों में जमकर विरोध हुआ और क्वारंटीन सेंटरों में रह रहे व्यक्तियों ने बुनियादी सुविधाओं की मांग की।  

धनबाद के पाॅलिटेक्निक काॅलेज स्थित क्वारंटीन सेंटर में राजस्थान से आए प्रवासी महिला-पुरुष मजदूरों को रखा गया है। यहाँ रह रहे लोगों ने 17 मई को विरोध प्रदर्शन किया। इन लोगों का कहना था कि यहां रहने-खाने-सोने का कोई रूटीन नहीं है। नल में पानी नहीं आने से 5 दिनों से नहा भी नहीं पाये हैं। कपड़ा साफ करने के लिए साबुन भी नहीं दिया जाता है। साफ-सफाई की कोई सुविधा नहीं है। रात में मच्छर भी परेशान करता है।

धनबाद के ही कौशल विकास केन्द्र (डिगवाडीह) स्थित क्वारंटीन केन्द्र में 8 मई को वेल्लौर से इलाज कर आए लोगों को रखा गया था, बाद में महाराष्ट्र से आए लोगों को भी यहीं रख दिया गया। इन लोगों के विरोध करने का कारण यह था कि अभी तक इन लोगों की कोरोना जांच रिपोर्ट नहीं आयी है और महाराष्ट्र से आये लोगों को भी यहीं रख दिया गया है। इससे इन लोगों को संक्रमण का डर मन में समा गया है। साथ ही रात में बिजली कटने के बाद मोमबत्ती की भी सुविधा नहीं है।

बोकारो जिला के नावाडीह प्रखंड के उपरघाट स्थित बिरसा मुंडा इंटर काॅलेज स्थित क्वारंटीन सेंटर 25-30 मजदूरों को रखा गया है। वहाँ रह रहे निर्मल नायक, विशेश्वर महतो, वासुदेव महतो आदि का कहना है कि कोरोना से अधिक सांप-बिच्छू के काटने का डर रहता है। यहाँ न तो बिजली है और ना ही खाने-पीने की व्यवस्था। ये लोग बताते हैं कि बहुत कहने पर जिला परिषद ने एक पैकेट चावल, 5 किलो दाल, 5 किलो आलू और एक लीटर सरसों तेल दिया है। ये लोग सवाल करते हैं कि इतना से क्या होगा ?

बोकारो जिला के ही चंदनकियारी स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र के निर्माणाधीन भवन स्थित क्वारंटीन सेंटर में लगभग 30 व्यक्ति रह रहे हैं। इन लोगों ने भी 17 मई को  शयन स्थल, शौचालय, पीने का साफ पानी, भोजन की घटिया गुणवत्ता और भरपेट भोजन की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इन लोगों का कहना है कि सुबह में चार पूड़ी और सब्जी, दोपहर में चावल व रात में मात्र 4 रोटी और सब्जी दिया जाता है, जिससे अधिकांश लोगों का पेट नहीं भरता है।

चाइबासा जिला स्थित टाटा काॅलेज परिसर के कोल्हान यूनिवर्सिटी मल्टीपरपज भवन स्थित क्वारंटीन सेंटर में लगभग 100 व्यक्ति रह रहे हैं। कोरोना जांच नहीं होने व भोजन नहीं मिलने के कारण 17 मई को 24 मजदूर सेंटर से भागकर घर जा रहे थे। रास्ते में पुलिस ने रोककर पूछा तो बताया कि क्वारंटीन सेंटर में ना तो कोरोना जांच हो रही है और ना ही भरपेट भोजन मिल रहा है। सुबह में उपमा दिया गया था, जो बच्चों को खाया ही नहीं गया, तो दोपहर में 20 लोगों का खाना घट गया।

गिरिडीह जिला के बगोदर प्रखंड के तुकतुको गांव के हरिजन टोला की निमा टोंगरी में क्वारंटीन सेंटर के अभाव में प्रवासी मजदूरों ने गांव से बाहर प्लास्टिक तिरपाल और बांस से घेरकर क्वारंटीन सेंटर बना लिया है और उसी में रह रहे हैं। ये लोग कोरोना के साथ-साथ सांप और वज्रपात से भी डरे हुए हैं।

गिरिडीह जिला के ही बिरनी प्रखंड के गादी पंचायत अंतर्गत चरघरा विद्यालय स्थित क्वारंटीन सेंटर में भी साफ़-सफाई व पीने के पानी का कोई इंतजाम नहीं है। 18 मई को @Ajaysinghbirni नामक ट्विटर हैंडल से ट्वीट कर यहाँ खराब पड़े चापाकल की तस्वीर को सभी लोगों के संज्ञान में लाया गया था। 

घनी आबादी क्षेत्र में क्वारंटीन सेंटर का विरोध भी चरम पर

एक तरफ झारखंड के क्वारंटीन सेंटर में बुनियादी सुविधाओं की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन हो रहा है, तो दूसरी तरफ घनी आबादी में स्थित विद्यालयों में क्वारंटीन केन्द्र बनाये जाने को लेकर भी लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहा है। 16 मई को रामगढ़ छावनी परिषद के वार्ड नंबर 7 स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय में क्वारंटीन सेंटर बनाने का जैसे ही स्थानीय लोगों को जानकारी हुई, वे लोग विरोध प्रदर्शन करने लगे। फलस्वरूप प्रशासन को पीछे हटना पड़ा इसी तरह हजारीबाग जिला के गिद्दी थानान्तर्गत रेलीगढ़ा कालोनी स्थित एएन सिंह हाई स्कूल के प्राइमरी सेक्शन को क्वारंटीन सेंटर बनाने का भी व्यापक विरोध हो रहा है। गिद्दी थानान्तर्गत कोदवे विद्यालय को क्वारंटीन सेंटर बनाने का विरोध भी चरम पर है। इस विरोध के पीछे स्थानीय लोगों का यही तर्क है कि घनी आबादी के बीच में क्वारंटीन सेंटर बनाने से स्थानीय लोगों में भी संक्रमण का खतरा बढ़ जाएगा। साथ ही विद्यालय में क्वारंटीन सेंटर के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव भी विरोध का एक कारण है।

होम क्वारंटीन में भेजने का भी हो रहा है विरोध

रामगढ़ जिले के दुलमी प्रखंड के उसरा पंचायत के मुखिया शैलेश चौधरी के आवास का सैकड़ों महिलाओं ने 17 मई को घेराव किया। घेराव कर रही महिलाओं का कहना था कि होम क्वारंटीन के बदले बाहर से आए लोगों को सरकारी क्वारंटीन केन्द्र में रखना चाहिए, क्योंकि यहाँ सभी के घर में इतने कमरे नहीं हैं कि एक कमरे में बाहर से आए व्यक्ति होम क्वारंटीन में रह सकें। ऐसी स्थिति में होम क्वारंटीन किये गये लोग खुलेआम गांव में घूमते हैं, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। झारखंड सरकार के द्वारा 18 मई को रात 8 बजे जारी कोविड-19 बुलेटिन के अनुसार वर्तमान में 186313 व्यक्ति होम क्वारंटीन में हैं। झारखंड की एक सच्चाई यह भी है कि सभी के घर में अतिरिक्त कमरे नहीं हैं, जिसमें बाहर से आए व्यक्ति होम क्वारंटीन में रह सकें। 

(रूपेश कुमार सिंह स्वतंत्र पत्रकार हैं और आजकल झारखंड के रामगढ़ में रहते हैं।)

(तस्वीर गिरिडीह जिला के बिरनी प्रखंड के गादी पंचायत के चरघरा विद्यालय के क्वारंटीन केन्द्र की है।)

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This post was last modified on May 19, 2020 12:22 pm

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