Tuesday, November 30, 2021

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त्रिपुरा में माकपा कार्यकर्ताओं पर बीजेपी संरक्षित गुंडों का हमला, एमएलए समेत 28 लोग घायल

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त्रिपुरा के विभिन्न हिस्सों में रविवार से माकपा और भाजपा के कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प में एक माकपा विधायक सहित कम से कम 28 लोग घायल हो गए। दक्षिण त्रिपुरा जिले के राजनगर से माकपा विधायक सुधन दास उस समय घायल हो गए, जब उन पर भाजपा कार्यकर्ताओं ने हमला किया था। दास अपने निर्वाचन क्षेत्र में ईंधन की बढ़ती कीमतों के विरोध-प्रदर्शन में भाग ले रहे थे। सोमवार को अगरतला के ढलेश्वर में माकपा के एक कार्यालय पर एक अलग हमला हुआ।

पुलिस ने कहा कि हिंसा को लेकर तीन मामले दर्ज किए गए हैं। घायलों में दास के दो निजी गार्ड, एक पुलिस अधिकारी, त्रिपुरा स्टेट राइफल्स (टीएसआर) का एक जवान और भाजपा के 13 कार्यकर्ता शामिल हैं। “अभी तक कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है। हम मामलों की जांच कर रहे हैं,” बेलोनिया उप-मंडल पुलिस अधिकारी सौम्य देबबर्मा ने कहा।

झड़पों पर टिप्पणी करते हुए माकपा के युवा नेता अमल चक्रवर्ती ने कहा, “त्रिपुरा में कानून का कोई शासन नहीं है। एक पार्टी कार्यालय को तोड़ा जाता है, जय श्री राम के नारे लगाते हुए मोटरसाइकिल सवार गुंडों द्वारा लोगों को पीटा जाता है और पुलिस कुछ नहीं करती है।”

अपनी ओर से भाजपा ने वाम दलों के कार्यालयों पर हमलों में किसी भी भूमिका से इनकार किया। भाजपा के एक प्रवक्ता ने कहा, ‘सीपीएम ने अपनी जमीन खो दी है और अब वह शिकायतें करने में व्यस्त है। उनका अंदरूनी कलह खुलकर सामने आ गया है।’

पूर्व मुख्यमंत्री और माकपा के वरिष्ठ नेता माणिक सरकार ने राज्य के विभिन्न हिस्सों में कथित मॉब लिंचिंग और हिरासत में मौत की बढ़ती घटनाओं पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार को घटनाओं की जांच शुरू करनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि राज्य के विभिन्न हिस्सों में दो साल में लोगों पर हमले की कम से कम नौ घटनाएं हुई हैं।

“भीड़ के हमले और पुलिस की हिरासत में मौत और अतिरिक्त न्यायिक हिरासत जैसी घटनाएं चिंता का विषय हैं। हैरानी की बात यह है कि मुख्यमंत्री ने इन पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। पुलिस महानिदेशक की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। यह एक अच्छा संकेत नहीं है,” माणिक सरकार ने अगरतला में सीपीएम कार्यालय में एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान कहा, “सरकार ने अब तक क्या कदम उठाए हैं? क्या किसी को गिरफ्तार किया गया है? हम इन घटनाओं की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं और इन घटनाओं की जांच की मांग करना चाहते हैं।”

पूर्व सीएम ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ‘विफल’ रही है। उन्होंने मौजूदा विधायक बादल चौधरी सहित सीपीएम नेताओं पर हिंसक हमलों के लिए भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया।

इस बीच सत्तारूढ़ भाजपा ने सीपीएम पर पलटवार करते हुए दावा किया कि उसके शासन के दौरान मॉब लिंचिंग और हत्याओं के पीड़ितों को कभी न्याय नहीं मिला। “जब वह मुख्यमंत्री थे, माणिक सरकार ने अपने शासनकाल में उन हिंसक गतिविधियों पर कभी प्रतिक्रिया नहीं दी। और इसलिए, उन्हें इन मुद्दों पर मौजूदा सरकार से सवाल करने का कोई अधिकार नहीं है, ”भाजपा प्रवक्ता नबेंदु भट्टाचार्य ने संवाददाताओं से कहा। उन्होंने यह भी दावा किया कि भाजपा नीत सरकार ने हाल के वर्षों में ऐसी घटनाओं पर उचित कार्रवाई की है।

भट्टाचार्य ने आरोप लगाया कि माकपा के शासनकाल में मॉब लिंचिंग की संस्कृति प्रचलित थी और पार्टी राज्य में फिर से हिंसा आधारित राजनीति कर रही है।

(गुवाहाटी से ‘द सेंटिनेल’ के पूर्व संपादक दिनकर कुमार की रिपोर्ट।)

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