Mon. Sep 16th, 2019

स्ट्रेचर और एंबुलेंस तक न मिली, चादर में लपेट कर ले जाना पड़ा बीजेपी नेता को बेटे का शव

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आशीष के शव को चादर में लपेट कर ले जाते हुए।

नई दिल्ली। ये है जमशेदपुर में बीजेपी नेता विश्वजीत के बेटे का शव। नौकरी जाने के डर से बेटे ने खुदकुशी की। और घटना के बाद जब उसे भर्ती कराया गया तो अस्पताल ने न तो स्ट्रेचर दिया और न ही कोई एंबुलेंस मुहैया करायी। नतीजतन पिता और परिजनों को बेटे का शव चादर में लपेट कर ले जाना पड़ा। यह तब हो रहा है जब सूबे में बीजेपी का शासन है और मृतक का पिता बीजेपी का सोशल मिडिया प्रभारी है।
आप को बता दें कि मृतक आशीष पांडेय टाटा मोटर्स के लिए काम करने वाली एक कंपनी में कंप्यूटर आपरेटर के पद पर कार्यरत था। इस बीच टाटा मोटर्स द्वारा बीच-बीच में अपना उत्पादन को रोकने के चलते उससे जुड़ी दूसरी कंपनियां भी प्रभावित होनी शुरू हो चुकी हैं। उसी कड़ी में जगह-जगह कंपनियों में कर्मचारियों की छटनी शुरू हो गयी है। इसी के चलते आशीष को भी अपनी नौकरी के जाने का भय सताने लगा था। हालांकि उसने पिता के साथ अपने इस डर को साझा किया था और पिता विश्वजीत ने उसे ढांढस भी बंधाया था। लेकिन उनका यह भरोसा काम नहीं आया। और बेटे ने घर के कमरे में पंखे से झूल गया।
पिता विश्वजीत पंखे से उतारकर तत्काल उसको एमजीएम अस्पताल ले गए। लेकिन लाख कोशिशों के बाद भी बेटे को बचाया नहीं जा सका। अब जब पोस्टमार्टम के बाद दाह संस्कार के लिए शव को घर ले जाने की बारी आयी तो अस्पताल ने एक स्ट्रेचर तक मुहैया कराना मुनासिब नहीं समझा। एंबुलेंस की बात तो दूर है। जिसका नतीजा यह हुआ कि परिजनों को आशीष के शव को चादर में लपेटकर ले जाना पड़ा।
हिंदुस्तान अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक परिजन तकरीबन 40 मिनट तक स्ट्रेचर और एंबुलेंस के लिए भटकते रहे लेकिन अस्पताल प्रशासन उन्हें दोनों चीजें मुहैया कराने में नाकाम रहा।
इस बात की जानकारी जब मीडिया के माध्यम से पूर्व मुख्यमंत्री व झामुमो नेता हेमंत सोरेन को मिली तो उन्होंने ट्वीट किया कि आज फिर एक युवा अपना जीवन समाप्त करने को विवश हो गया।
उनके लिए यह सदमा कम था कि ऊपर से मृत्त शरीर को अस्पताल में एम्बुलेंस तक ना मिल सकी। शनिवार शाम को पोस्टमार्टम के बाद आशीष के शव का अंतिम संस्कार कर दिया गया। मुखाग्नि उसके दादा रामजस पांडेय ने दी। उन्होंने बताया कि उनका पोता आशीष उनका सहारा था। उनके बुढ़ापे की लाठी छिन गई है।

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