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अमेरिकाः सरकारी भेदभाव की वजह से श्वेत लोगों के मुकाबले कोरोना से ढाई गुना ज़्यादा मर रहे हैं अश्वेत

कोविड नस्लीय डेटा ट्रैकर की एक रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त राज्य अमेरिका में कोविड-19 से होने वाली मृत्यु दर सबसे ज़्यादा अश्वेत, आदिवासियों, लैटिंक्स और इंडियन समुदाय के लोगों में दिख रही है। कोविड ट्रैकिंग प्रोजेक्ट रिपोर्ट के मुताबिक कोविड-19 से होने वाली मौत दर अश्वेत लोगों में श्वेत की तुलना में 2.4 गुना ज़्यादा है, जबकि मूल अमेरिकी और लैटिनों में होने वाली मृत्यु दर श्वेत समुदाय की तुलना में 1.5 गुना ज़्यादा है।

कोविड-19 से हुई कुल मौतों में अश्वेत समुदाय के लोगों का कुल प्रतिशत 21 है और अब तक कुल 36,765 अश्वेत लोगों की मौत कोविड-19 से हुई है। प्रति एक लाख में 89 अफ्रीकी अमेरिकी, 56 अमेरिकन इंडियन या अलास्का मूल के, 56 लैटिन, 37 फैसिफिक द्वीप वासी और 37 श्वेत लोगों की मौत कोविड-19 से हुई है।

रिपोर्ट के मुताबिक 20 सबसे ज़्यादा मौत दर वाली काउंटी में नौ काउंटी अश्वेत बाहुल्य वाले हैं, जबकि पांच सबसे ज़्यादा मौत दर वाली काउंटी में तीन अश्वेत बाहुल्य हैं। मिशिगन (Michigan) राज्य में कोविड-19 से होने वाली कुल मौत का 40% संख्या अश्वेत समुदाय के लोगों की है। बता दें कि कोविड नस्लीय डेटा ट्रैकर कोविड ट्रैकिंग प्रोजेक्ट और बोस्टन यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर एंटीरेसिस्ट रिसर्च के सहयोग से किया जा रहा है।

कलर ऑफ कोरोना वायरस
एपीएम रिसर्च लैब अप्रैल 2020 से स्वतंत्र रूप से कोविड 19 से होने वाली मौतों में नस्ल और जातीयता के डाटा इकट्ठा करने, उनका विश्लेषण करने और रिपोर्ट करने का काम कर रही है। Color of Corona virus project के मुताबिक 18 अगस्त 2020 तक हुई कुल 1,71,000 मौतों में 15,000 मौतें पिछले दो सप्ताह में हुई हैं, यानि प्रति दिन 1,100 लोगों की मौत। 1,125 में से एक अश्वेत अमेरिकी की मौत हुई है (यानि प्रति एक लाख में 88.4 मौतें)।

1375 में से एक इंडिजिनस अमेरिकी की मौत हुई है। यानि प्रति एक लाख में 73.2 मौत। 1,575 में से एक पैसिफिक आइसलैंडर की मौत। यानि प्रति एक लाख में से 63.9 मौत। 1,850 में एक लैटिन अमेरिकी की मौत। यानि प्रति लाख 54.4 मौत। 2,450 में एक श्वेत अमेरिकी की मौत। यानि प्रति एक लाख में 40.4 मौत।

हर आयु वर्ग में अश्वेत लोगों की मौत दर श्वेत लोगों से ज़्यादा है। ब्रुकिंग इंस्टीट्यूशन ने कोविड-19 से मौतों में आयु और नस्लीय अंतर (race gaps) पर अध्ययन किया है। ब्रुकिंग की रिपोर्ट के मुताबिक कोविड-19 से होने वाली मौतों में नस्लीय फर्क़ जितना दिख रहा है उससे कहीं ज़्यादा है। सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन (सीडीसी) की रिपोर्ट के मुताबिक सभी आयु वर्गों में काले, हिस्पैनिक, लैटिन लोगों में श्वेत लोगों की तुलना में मौत दर कई गुना ज़्यादा है। 55-64 आयु वर्ग वाले अश्वेत लोगों की मौत दर 65-74 आयु वर्ग वाले गोरे लोगों की अपेक्षा ज़्यादा है।

65-74 आयु वर्ग वाले अश्वेत लोगों की मौत दर 75-84 आयु वर्ग वाले श्वेत लोगों की अपेक्षा अधिक है, जबकि 45-54 आयु वर्ग वाले अश्वेत की कोविड-19 मौत दर इसी आयु वर्ग के श्वेत लोगों की तुलना में छह गुना ज़्यादा है।

कोविड-19 मौत दर में नस्लीय अंतर (race gaps) को कई तरह के कारक प्रभावित करते हैं। ये कारक संक्रमण के ख़तरे और संक्रमितों में मौत के ख़तरे को प्रभावित करते हैं। अश्वेत लोगों, हिस्पैनिक और लैटिनों में संक्रमण का ख़तरा पेशा, कम सोशल डिस्टेंसिंग और विशेष तौर पर भौगोलिक स्थिति जिम्मेदार हो सकती है। देश का वो हिस्सा जिसे कोविड-19 ने सबसे ज़्यादा बुरी तरह से प्रभावित किया वहां अश्वेत, हिस्पैनिक और लैटिनों की बड़ी आबादी रहती है।

समाजिक अन्याय और ढांचागत नस्लवाद का नतीजा है ये तमाम वर्ग आयु में श्वेत समुदाय की तुलना में काले समुदाय के लोगो में कोविड-19 से होने वाली मृत्यु दर का ज़्यादा होना दरअसल अमेरिकी समाज में फैले सिस्टमेटिक नस्लवाद और समाजिक अन्याय की परणति है। इससे ये पता चलता है कि अमेरिकी समाज के प्रत्येक पहलू में प्रणालीगत नस्लवाद किस हद तक अंतर्निहित है।

इस डेटा से ये भी स्पष्ट होता है कि अमेरिका की पूंजीवादी व्यवस्था में कौन सा जीवन मूल्यवान है और कौन सा नहीं। और हम अकेले मृत्यु दर से देखते हैं कि काला विरोधी नस्लवाद अभी भी मजबूत है जैसा कि सदियों से है। इससे ये भी पता चलता है कि संयुक्त राज्य अमेरिका की राजनीतिक सत्ता में रहने वाले लोग, विशेष रूप से श्वेत समुदाय नेता, सबसे कमजोर समुदायों के प्रति मानवता और करुणा दिखाने में नाकाम रहे हैं और उन्होंने कोविड-19 से संक्रमित होने और मरने के लिए अनिवार्य रूप से अश्वेत समुदाय, लैटिनएक्स और स्वदेशी समुदायों को खतरे में डाल दिया है। इस महामारी ने काले नस्ल के लोगों के लिए स्वास्थ्य सुरक्षा के विभिन्न असमानताओं को उजागर किया है।

आर्थिक रूप से पिछड़े होने के कारण पूँजीवादी स्वास्थ्य सुविधाओं तक कम पहुंच और गरीबी की वजह से छोटे से कमरे में अधिक जनसंख्या भी अश्वेत समुदाय के लोगों में कोविड-19 से अधिक मृत्यु दर होने का कारण हैं। जॉर्ज फ्लायड के कस्टोडियल मर्डर से लेकर जैकब ब्लैक की पीठ में सात गोलियां मारने तक पूरे कोरोना काल में अश्वेत समुदाय के कई युवा पुलिस की गोली का निशाना बने हैं। इसके विरोध में मई से लेकर आज तक अमेरिका के हर राज्य में अश्वेत समुदाय के लोगों ने सड़क पर उतरकर ढांचागत नस्लवाद के खिलाफ़ संघर्ष किया है और लगातार ब्लैक लाइव्स मैटर आंदोलन को चलाया है।

(सुशील मानव जनचौक के विशेष संवाददाता हैं।)

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This post was last modified on September 6, 2020 1:05 pm

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