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मजहब के नाम पर फिर बहा खून, फ्रांस में पैगंबर का कार्टून दिखाने वाले शिक्षक का कत्ल

शुक्रवार को फ्रांस में एक अठारह साल के आतंकवादी ने 47 वर्षीय स्कूल शिक्षक सैमुएल पैटी (Samuel Paty) के सिर को धड़ से सिर्फ़ इसलिए अलग कर दिया, क्योंकि उक्त शिक्षक ने अपनी क्लास के बच्चों को ‘अभिव्यक्ति की आज़ादी, विश्वास करने या न करने की आजादी’ का पाठ पढ़ाते हुए पैगंबर मोहम्मद का कॉर्टून दिखाया था।

घटना को कॉन्फ्लैन्स सेंट होनोरी के पास अंजाम दिया गया जहां कि वो शिक्षक काम करते थे। जवाबी कार्रवाई में फ्रांस पुलिस ने घटना स्थल से महज 600 मीटर की दूरी पर 18 वर्षीय हत्यारे को ढेर कर दिया। एसोसिएट प्रेस के मुताबिक एक छात्र के माता-पिता ने उक्त शिक्षक के विरुद्ध पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई थी। वहीं फ्रांस के एंटी टेरर प्रोस्क्युटर के मुताबिक 10 दिन पहले इसके बाबत संबंधित स्कूल को धमकी भी मिली थी, जबकि हत्यारा 18 वर्षीय चेचन था जो मॉस्को में पैदा हुआ था।

प्रधानमंत्री इमैनुएल मैक्रोन ने इस कुकृत्य को ‘इस्लामी आतंकी हमला’ कहा है। ये हमला उस समय किया गया जबकि फ्रांस की मैक्रोन सरकार संसद में इस्लामिक चरमपंथियों से जुड़ा एक बिल लेकर आ रही है। बता दें कि फ्रांस में करीब 50 लाख मुस्लिम आबादी रहती है। इससे पहले 7 जनवरी 2015 को शार्ली एब्दो के पेरिस स्थित ऑफिस में दो चरमपंथी सगे भाईयों सईद और शरीफ़ कुआशी ने हमला करके कार्टूनिस्ट पत्रकार समेत कुल 12 लोगों की हत्या की थी। इस साल शार्ली एब्दो पत्रिका ने अपने मारे गए पत्रकारों को याद करते हुए उस विवादित अंक को रिपब्लिश किया था, जिसके बाद शार्ली एब्दो को फिर से हमले की धमकी दी गई थी और चरमपंथियों द्वारा दो लोगों पर हमला करके गंभीर रूप से घायल कर दिया गया था।

वहीं भारत के संदर्भ में बात करें तो कर्नाटक के बेंग्लुरु में 11 अगस्त को भाजपा से जुड़े एक युवा पी नवीन द्वारा अपने फेसबुक पर पैगम्बर के कॉर्टून पोस्ट करने के बाद उसके अंकल कांग्रेस विधायक श्रीनिवास मूर्ति के घर और नजदीकी थाने में एक हजार से अधिक लोगों की लाठी-डंडों से लैस भीड़ ने हमला किया था। इसमें तीन लोगों की मौत हो गई थी।

हिंदू देवी-देवताओं की पेंटिंग बनाने के बाद तो भारत के मशहूर पेंटर मकबूल फिदा हुसैन को ये देश ही छोड़ना पड़ा था। आखिर समस्या कहां है? कोई भी धर्म क्या इतना असहिष्णु हो सकता है कि किसी कार्टून या पेंटिंग से ख़तरे में पड़ जाए! अगर इस्लाम के मानने वालों की ये मान्यता है कि इस्लाम बुतपरस्ती को नहीं स्वीकारता, तो ठीक है न स्वीकारे, लेकिन इसका मतलब ये तो नहीं कि किसी पेंटर या कॉर्टूनिस्ट को पैगम्बर पर या उनके अनुयायियों, उनके उपदेशों पर अपने विचारों को अभिव्यक्त ही नहीं करने देंगे।

फिर तो आप में और पैगम्बर को परेशान करने वालों में कोई फर्क़ ही नहीं है, क्योंकि पैगम्बर उस समय की मान्यताओं से अलग एक नई बात कह रहे थे और अपनी अभिव्यक्ति के लिए उन्हें भी संघर्ष करना पड़ा था। क्या पैगम्बर या उनकी नीतियां उनके उपदेश, उनका चरित्र इतना कमजोर है कि आपको या किसी को भी अपने देवी-देवता की रक्षा करने के लिए हत्या के हथियार लेकर लोगों की हत्या करनी पड़े! अगर आपका ईश्वर, अल्लाह, पैगम्बर इतना ही कमजोर है कि वो अपनी रक्षा नहीं कर सकता और वो आपको मदद के लिए चीख-पुकार करके बुला रहा है तो उस कमजोर को ईश्वर या अल्लाह, देवी देवता पैगम्बर होने का भी अधिकार नहीं है। आपके ईश्वर की आलोचना करने वाली अभिव्यक्ति पर यदि आप उस व्यक्ति की हत्या करते हों तो ये जान लो आप अपने ईश्वर, अल्लाह और पैगम्बर को नीचा दिखा रहे हैं।

बेशक आने वाली पीढ़ियां जब इतिहास के पन्ने पलटेंगी, फ्रांस के उस शिक्षक और शार्ली एब्दो के पत्रकारों के ख़ून के दाग़ पैगम्बर के दामन पर ही मिलेंगे।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on October 18, 2020 1:55 pm

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