चर्चित स्वामीनारायण संस्था अमेरिका में भारत से ले गए दलितों को बंधुआ बनाकर मंदिर निर्माण में कर रही थी इस्तेमाल, एफबीआई ने शुरू की कार्रवाई

संयुक्त राज्य अमेरिका में भारतीय श्रमिकों के एक समूह ने बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था (बीएपीएस) के ख़िलाफ़ न्यूजर्सी में एक विशाल हिंदू मंदिर के निर्माण के दौरान मानव तस्करी करने और न्यूनतम मजदूरी कानून का उल्लंघन करने का आरोप लगाकर वहां की जिला अदालत में मुक़दमा दर्ज़ कराया है।

‘इंडिया सिविल वॉच इंटरनेशनल’ (आईसीडब्ल्यूआई) ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि 11 मई को एफबीआई की छापेमारी में करीब 200 श्रमिकों को न्यूजर्सी के रॉबिन्सविले में स्वामीनारायण मंदिर के परिसर से बचाया गया, जिनमें से ‘अधिकतर दलित, बहुजन और आदिवासी हैं। वहीं एनवाईटी ने अपनी रिपोर्ट में बताया है कि तीन संघीय एजेंसियां- एफबीआई, गृह सुरक्षा मंत्रालय और श्रम मंत्रालय, मंगलवार सुबह की गई कार्रवाई में शामिल थीं और बताया जा रहा है कि यह कार्रवाई श्रमिक एवं आव्रजन कानून उल्लंघनों के आरोपों से जुड़ी है।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक संयुक्त राज्य अमेरिका के न्यूजर्सी में बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण (बीएपीएस) नामक एक संस्था पर हिंदू मंदिर बनाने के लिए भारत से 200 से अधिक अनुसूचित जाति के मजदूरों को अवैध रूप से ले जाने और कम वेतन देने के आरोप में मुकदमा दायर हुआ है। अमेरिकी जांच एजेंसी एफबीआई मामले की जांच कर रही है। मुकदमे में कहा गया है कि प्रतिदिन सिर्फ कुछ डॉलर का लालच देकर इन मजदूरों को लंबे समय तक काम के लिए मजबूर किया गया। इतना ही नहीं 200 से ज्यादा दलित कामगारों से जबर्दस्ती रोज़गार समझौतों पर दस्तख़त भी करवाया गया।

मुक़दमे में बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण (बीएपीएस) नामक संस्था के हिंदू नेताओं पर मानव तस्करी और वेतन कानून के उल्लंघन के आरोप लगाए गए हैं। एफबीआई के एक प्रवक्ता ने न्यूयॉर्क टाइम्स से पुष्टि की है कि एजेंसी ने मामले की जांच शुरू कर दी है और अदालत के आदेश पर उसके अधिकारी 11 मई को मंदिर गए थे। मुकदमा दायर करने वाले वकीलों में से एक ने बताया कि मंगलवार को ही कुछ श्रमिक  मंदिर से हटा लिया गया था।

गौरतलब है कि इटैलियन व भारतीय संगमरमर से बना स्वामी नारायण मंदिर न्यूजर्सी की राजधानी ट्रेंटन के बाहर रॉबिन्सविले में मौजूद है। यह मंदिर करीब 162 एकड़ में फैला हुआ है। हिंदू मंदिर बनवा रही संस्था बीएपीएस पर आरोप है कि उसने 200 से भी ज्यादा दलित श्रमिकों से जबरन भारत में ही रोजगार समझौतों पर हस्ताक्षर करवाये। जबकि इन मजदूरों में से अधिकांश को अंग्रेजी नहीं समझ आती है। मजदूरों को अमेरिकी शहर न्यूजर्सी में आर-1 वीजा पर लाया गया जो धार्मिक गुरुओं और प्रचारकों के लिए होता है। मजदूरों के भारत से न्यूजर्सी पहुंचने पर उनके पासपोर्ट ले लिए गए और मंदिर में सुबह 6.30 से शाम 7.30 बजे तक लगातार 13 घंटे काम करवाया गया। अनुसूचित जाति के इन मजदूरों को 450 डॉलर के करीब मासिक वेतन दिया जाता था जो मुकदमे में दी गई गई काम के घंटे की जानकारी के मुताबिक सिर्फ 1.20 डॉलर प्रति घंटे के बराबर था। इन मजदूरों को छुट्टियां भी बहुत कम दी जाती थीं। इनमें से भी कुछ श्रमिक ऐसे थे जिन्हें महीने में सिर्फ़ 50 डॉलर नगद दिये जाते थे और बाकी रक़म उनके भारतीय बैंक खातों में जमा करा दी जाती। श्रमिकों ने आरोप लगाया है कि उन्हें बंद करके रखा गया और न्यूजर्सी में स्वामीनारायण मंदिर बनाने के लिए प्रतिघंटा करीब एक डॉलर पर काम करने के लिए मजबूर किया गया, जबकि अमेरिका में न्यूनतम वेतन 7.25 डॉलर प्रति घंटा तय किया गया है। आरोप में मजदूरों ने कोर्ट को बताया है कि बीएपीएस द्वारा ‘न्यूजर्सी निर्माण स्थल पर अकसर ख़तरनाक परिस्थितियों में कई घंटे’ काम कराया जाता था। जैसे बड़े पत्थरों को उठाना, क्रेन और अन्य भारी मशीनरी का संचालन करना, सड़कों और सीवरों का निर्माण करना, खाई खोदना और जमी बर्फ हटाने जैसे काम दिए जाते थे।

मुक़दमे में कहा गया है कि पुरुषों के पासपोर्ट जब्त कर लिए गए थे और कड़ी सुरक्षा में रखा जाता था, जहां उन्हें आगंतुकों और धार्मिक स्वयंसेवकों से बात करने की अनुमति नहीं थी।  मजदूरों को खाने के तौर पर दाल और आलू दिया जाता था और छोटी सी गलती जैसे कि बिना हेलमेट के नज़र आने पर उनका वेतन काट दिया जाता था।

द न्यूयॉर्क टाइम्स’ (एनवाईटी) में छपी ख़बर में बताया गया कि मंगलवार को दर्ज़ कराये गये शिक़ायत में छह लोगों के नाम का जिक्र है, जो धार्मिक ‘आर-1 वीजा’ पर 2018 से अमेरिका में लाने शुरू किए गए 200 से अधिक भारतीय नागरिकों में शामिल हैं। शिकायत के मुताबिक, उन्हें धार्मिक वीजा पर या आर-1 वीजा (R-1) पर अमेरिका लाया गया था. आर-1 वीजा एक अस्थायी वीजा होता है, जिसका इस्तेमाल धर्मगुरुओं और मिशनरियों जैसे धार्मिक कार्यकर्ताओं के लिए होता है। शिक़ायत में कहा गया है कि मजदूरों को अक्सर अंग्रेजी में कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने के लिए कहा जाता था और अमेरिकी दूतावास के कर्मचारियों को यह बताने के निर्देश दिए गए थे कि वे नक्काशी करने वाले या चित्रकार हैं।

वहीं मुक़दमे में भारतीय दलित मजदूरों के पक्षकार वकील डेनियल वार्नर ने मीडिया से कहा कि यह काफी स्तब्ध कर देने वाला है। ऐसा हमारी नाक के नीचे हो रहा है, यह और भी हैरत में डालने वाला है। इससे भी ज्यादा परेशान करने वाली बात यह है कि ऐसा सालों से न्यूजर्सी में मंदिर की दीवारों के पीछे हो रहा था।

वकील डेनियल वार्नर ने यह भी बताया कि कुछ श्रमिक वहां एक साल, कुछ दो साल तो कुछ उससे भी ज्यादा समय से थे। ये मजदूर बीएपीएस के किसी व्यक्ति को साथ लिए बिना इस परिसर से बाहर तक नहीं निकल  सकते थे। सुरक्षाकर्मियों और कैमरों के जरिये उनकी गतिविधियों पर नज़र रखी जाती थी। उन्हें बताया गया था कि अगर वो वहां से निकले तो पुलिस उन्हें गिरफ्तार कर लेगी क्योंकि उनके पास पासपोर्ट नहीं थे।

बीएपीएस का पक्ष

मुक़दमे में बीएपीएस के सीईओ कनु पटेल को आरोपी बनाया गया है। उन्होंने अपने मीडिया बयान में कहा है कि मैं आदरपूर्वक वेतन वाले दावे से असहमति व्यक्त करता हूं। संस्था के एक प्रवक्ता मैथ्यू फ्रैंकेल ने बताया कि हम इन आरोपों को बहुत गंभीरता से ले रहे हैं और उठाए गए मुद्दों की गहराई से समीक्षा कर रहे हैं।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, स्वामीनारायण संस्था का भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी पार्टी भाजपा के साथ घनिष्ठ संबंध हैं। साल 2016 में अमेरिका में बीएपीएस को सबसे बड़ा हिंदू संप्रदाय बनाने वाले धार्मिक गुरु प्रमुख स्वामी महाराज को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपना गुरु बताया था। जबकि प्रमुख स्वामी महाराज का साल 2016 में निधन हो गया था। और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके अंतिम संस्कार के दौरान एक भाषण दिया था और अबू धाबी में बीएपीएस के मंदिर की आधारशिला भी रखी थी। वहीं एबीपीएस संगठन ने भी मोदी के चुनावी वादों में से सबसे महत्वपूर्ण अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए आर्थिक मदद का वादा किया गया था।

बता दें कि बीएपीएस हिंदू धर्म के तहत एक वैश्विक संप्रदाय का दावा करता है जिसकी स्थापना 20वीं सदी की शुरुआत में ही हुई थी। संस्था का दावा है की इसने 1100 से भी ज्यादा बड़े मंदिरों का निर्माण करवाया है। यहां काम कर रहे श्रमिकों वकीलों ने मंगलवार को दायर एक मुकदमे में कहा कि बोचासनवासी अक्षर पुरुषोत्तम स्वामीनारायण संस्था, एक हिंदू संप्रदाय है, जिसे बीएपीए के नाम से भी जाना जाता है। इस संस्था का भारत के सत्तारूढ़ दल भाजपा से घनिष्ठ संबंध है।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

This post was last modified on May 15, 2021 1:52 pm

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