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सुप्रीम कोर्ट में उठा यूपी की संवैधानिक मशीनरी फेल होने का मामला

उत्तर प्रदेश में सरकार और सरकारी मशीनरी लंबे समय से गैरकानूनी, मनमाने, सनकपन और अनुचित तरीके से कार्य कर रही है, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ काम कर रही है और अपने अधिकार का लगातार दुरुपयोग कर रही है, इसलिए उत्तर प्रदेश में संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत आपातकाल लगाया जाए। इस आशय की मांग उच्चतम न्यायालय में दाखिल एक जनहित याचिका में की गई थी, जिसे उच्चतम न्यायालय ने ख़ारिज कर दिया। दरअसल संविधान का अनुच्छेद 356 एक राज्य में संवैधानिक मशीनरी की विफलता को संदर्भित करता है जिस स्थिति में, भारत के राष्ट्रपति, राज्य के राज्यपाल से रिपोर्ट प्राप्त करने पर या अन्यथा, राष्ट्रपति शासन लगा सकते हैं।

चीफ जस्टिस एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और वी रामसुब्रमण्यम की पीठ ने सीआर जया सुकिन नामक वकील द्वारा दायर याचिका को खारिज किया, जिसमें उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को भंग कर राज्य में संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत राज्य आपातकाल लगाने के लिए केंद्र सरकार से निर्देश मांगा था। दरअसल राज्य में एक वर्ष की अवधि में हुई विभिन्न घटनाओं की पृष्ठभूमि में यह याचिका दायर की गई थी और सीआर जया सुकिन के अनुसार लगातार हो रहे इन मामलों को देखते हुए संविधान के प्रावधानों के अनुसार उत्तर प्रदेश राज्य की सरकार को आगे चलने नहीं दिया जा सकता है।

याचिकाकर्ता सीआर जया सुकिन ने तर्क दिया कि यूपी में गैर न्यायिक हत्याएं, मनमानी हत्याएं हो रही हैं, लेकिन आज तक, केंद्र सरकार ने कोई एडवायजरी नहीं दी है। इस पर चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने पूछा कि क्या आपने अन्य राज्यों के अपराध रिकॉर्ड का अध्ययन किया है? याचिकाकर्ता ने उत्तर दिया कि भारत में कुल अपराधों की संख्या का 30 फीसद से अधिक यूपी में है। चीफ जस्टिस ने पूछा कि आपका मौलिक अधिकार कैसे प्रभावित होता है? जया सुकिन ने कहा कि मैं एक भारतीय नागरिक हूं। इस पर चीफ जस्टिस ने कहा कि आप आगे बहस करेंगे तो हम भारी जुर्माना लगाएंगे। खारिज।

सीआर जया सुकिन ने याचिका में मुख्य रूप से जिन घटनाओं का अपनी मांग के समर्थन में उल्लेख किया, उनमें जघन्य हाथरस गैंग रेप केस, डॉ. कफील खान का अवैध निरोध, एएमयू हिंसा के दौरान पुलिस की ज्यादती और मानवाधिकार उल्लंघन, सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों के खिलाफ शर्म बैनर बनाने, अस्पतालों में बेड उपलब्ध नहीं होने के कारण गौतम बुद्ध नगर में आठ महीने की गर्भवती महिला के निधन के संदर्भ में नागरिकों को जीवन और चिकित्सा देखभाल सुनिश्चित करने में विफलता का मामला शामिल है।

याचिका में उन्नाव बलात्कार मामले में पीड़ित को पर्याप्त सुरक्षा देने में विफलता का उल्लेख करते हुए कहा गया कि उत्तर प्रदेश राज्य देश में महिलाओं के लिए सबसे असुरक्षित राज्य है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो की भारत में अपराध रिपोर्ट 2019 के अनुसार, उत्तर प्रदेश में महिलाओं के खिलाफ सबसे अधिक अपराध दर्ज किए गए। भारत में 2019 में 4,05,861 मामले दर्ज किए और इनमें से उत्तर प्रदेश राज्य में 59,853 घटनाएं हुईं। यह आरोप लगाया गया कि राज्य की पूरी आबादी के साथ अन्याय हुआ है, और उत्तर प्रदेश राज्य द्वारा निष्पक्ष तरीके से प्रासंगिक सामग्रियों की सराहना न करने के कारण उनकी बुनियादी सुविधाएं प्रभावित हुई हैं।

याचिका में कहा गया कि इस तरह के कदम से सत्ता के मनमाने और अनुचित प्रयोग पर रोक लगेगी और भारत के संविधान के अनुक्षेद 14, 16, 21 के अनुसार अनिश्चितता भी नहीं होगी।

इसके अलावा याचिका में राज्य की क़ानूनी और प्रशासनिक व्यवस्था फेल होने के संदर्भ में फेहरिस्त दी गई है। गैरकानूनी और मनमानी हत्याएं, जिनमें पुलिस द्वारा की गईं असाधारण हत्याएं (फर्जी मुठभेड़) शामिल हैं, जेल अधिकारियों द्वारा अत्याचार, सरकारी अधिकारियों द्वारा गिरफ्तारी और नज़रबंदी, राज्य में राजनीतिक कैदी, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और प्रेस पर प्रतिबंध, हिंसा सहित, हिंसा की धमकी, या पत्रकारों की अनुचित गिरफ्तारियां या अभियोग, सोशल मीडिया अभिव्यक्ति पर सेंसरशिप, और साइट अवरुद्ध करने के लिए मुकदमा चलाने के लिए आपराधिक परिवाद कानूनों का उपयोग, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) पर अत्यधिक प्रतिबंधात्मक नियम, सरकार के सभी स्तरों पर व्यापक भ्रष्टाचार की लगातार रिपोर्ट (मानव तस्करी सहित), धार्मिक संबद्धता या सामाजिक स्थिति के आधार पर अल्पसंख्यकों को लक्षित करने वाली हिंसा और भेदभाव, दलितों के खिलाफ बढ़ते अपराध, बंधुआ श्रम सहित मजबूर और अनिवार्य बाल श्रम, बेरोज़गारी और गरीबी, महिलाओं के लिए असुरक्षित राज्य, राष्ट्रीय नेताओं पर पुलिस का हमला, अनौपचारिक संचार अवरोध और इंटरनेट शटडाउन, अनियंत्रित ऑनर किलिंग, लगातार मॉब लिंचिंग और बेरोज़गारी में बढ़ोतरी। इसलिए याचिका में तत्काल प्रभाव से राज्य में आपातकाल लगाने की मांग की गई थी।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं। वह इलाहाबाद में रहते हैं।)

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This post was last modified on February 10, 2021 12:02 pm

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