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सीबीआई बनाम सीबीआईः रिश्वत मामले में पूर्व निदेशक राकेश अस्थाना को क्लीन चिट

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने मंगलवार को सीबीआई के पूर्व विशेष निदेशक राकेश अस्थाना और आर एंड एडब्ल्यू चीफ सामंत गोयल को 2018 में सीबीआई द्वारा दर्ज रिश्वत मामले में क्लीनचिट दे दी। तत्कालीन निदेशक आलोक वर्मा के कार्यकाल में सीबीआई ने स्पेशल डायरेक्टर रहे राकेश अस्थाना और डीएसपी देवेंद्र कुमार समेत दो अन्य लोगों के खिलाफ 2017 से 2018 के बीच में मोइन कुरैशी से रिश्वत लेने के मामले में एफआईआर दर्ज की थी। सीबीआई ने दुबई के मनोज प्रसाद के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया है, जिसे इसने पूर्व में गिरफ्तार किया था।

केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने एजेंसी के पूर्व विशेष निदेशक राकेश अस्थाना से जुड़े रिश्वत के एक मामले में दुबई के उद्योगपति एवं कथित बिचौलिये मनोज प्रसाद के खिलाफ मंगलवार को आरोप पत्र दायर किया। सीबीआई ने विशेष सीबीआई न्यायाधीश संजीव अग्रवाल के समक्ष दायर आरोप पत्र में अस्थाना को क्लीन चिट दी है।

एजेंसी ने साथ ही रॉ प्रमुख एसके गोयल को मामले में पाक साफ करार दिया है जो इस मामले में जांच के घेरे में थे। सीबीआई के डीएसपी देवेंद्र कुमार को भी एजेंसी से क्लीन चिट मिल गई, जिन्हें 2018 में गिरफ्तार किया गया था और जिन्हें बाद में जमानत मिल गई थी। आरोप पत्र में कहा गया है कि मामले में जांच अब भी जारी है और एजेंसी पूरक रिपार्ट दायर कर सकती है।

प्रसाद को 17 अक्टूबर 2018 को गिरफ्तार किया गया था और उन्हें उसी वर्ष 18 दिसंबर को जमानत मिल गई थी। सीबीआई के अनिवार्य 60 दिन की अवधि में आरोप पत्र दायर करने में विफल रहने पर दिसंबर 2018 में दिल्ली की एक अदालत ने प्रसाद को वैधानिक जमानत दी थी। निचली अदालत ने गत वर्ष 31 अक्टूबर को कुमार को जमानत दे दी थी, जब एजेंसी ने उनकी अर्जी का विरोध नहीं किया था। उन्हें 23 अक्टूबर को गिरफ्तार किया गया था।

सीबीआई ने अस्थाना के खिलाफ मामला हैदराबाद के उद्योगपति सतीश सना की शिकायत पर दर्ज किया था जो 2017 के उस मामले में जांच का सामना कर रहा था, जिसमें मांस निर्यातक मोइन कुरैशी कथित तौर पर शामिल था। सना ने आरोप लगाया था कि अधिकारी ने उसे क्लीन चिट में मदद की थी।

सीबीआई ने प्रसाद और शिकायतकर्ता सतीश सना बाबू के बीच की कॉल डिटेल भी प्राप्त की है। जांच एजेंसी ने अदालत में एक आवेदन दिया है, जिसमें कहा गया है कि उसके भाई, सोमेश और सुनील मित्तल के खिलाफ जांच की आवश्यकता है। सीबीआई अधिकारियों के अनुसार, कोई साक्ष्य नहीं है जो दिखाता है कि अस्थाना ने कभी धन शोधन मामले में शिकायतकर्ता बाबू को बचाने के लिए कोई रिश्वत मांगी या दी। यह धन शोधन मामला विवादास्पद मीट निर्यातक मोइन कुरैशी से जुड़ा है।

सीबीआई ने यह भी निष्कर्ष निकाला कि अस्थाना और प्रसाद के बीच कोई संबंध नहीं है। सीबीआई ने यह भी कहा कि बाबू के प्रसाद के साथ हुई चर्चा में किसी भी नौकरशाह की कोई भूमिका नहीं थी। सीबीआई निदेशक ऋषि कुमार शुक्ला ने जांच अधिकारी सतीश डागर और पद क्रम के चार अन्य लोगों के साथ सहमति जताई की अस्थाना सहित अन्य नौकरशाहों के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता।

हैदराबाद के व्यवसायी सतीश बाबू सना द्वारा दायर शिकायत के तहत भ्रष्टाचार रोकथाम अधिनियम की प्रांसगिक धाराओं के तहत अस्थाना के खिलाफ आपराधिक साजिश, भ्रष्टाचार और आपराधिक कदाचार के मामले दर्ज किए गए। अस्थाना ने आरोपों से दृढ़तापूर्वक इनकार किया। सीबीआई ने 15 अक्टूबर, 2018 को अस्थाना के खिलाफ एक प्राथमिकी दर्ज की।

गौरतलब है कि दिल्ली हाईकोर्ट ने 11 जनवरी 2019 को सीबीआई स्पेशल डायरेक्टर राकेश अस्थाना की घूसखोरी के केस रद्द करने की याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा कि एक लोक सेवक पर एफआईआर होना गंभीर है। इस मामले में जो चार्ज लगाए गए हैं उनकी जांच होनी चाहिए। अस्थाना पर सीबीआई निदेशक रहे आलोक वर्मा ने दो करोड़ रुपये की रिश्वत लेने के आरोप लगाए थे।

कोर्ट ने अस्थाना के साथ सह-आरोपी डीएसपी देवेंद्र कुमार के खिलाफ भी केस खारिज करने से इनकार कर दिया। जस्टिस नाजमी वजीरी ने 20 दिसंबर 2018 को कई याचिकाओं पर सुनवाई करने के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया था। सुनवाई के दौरान सीबीआई, केंद्र सरकार, राकेश अस्थाना, डीएसपी देवेंद्र कुमार, आलोक वर्मा और संयुक्त निदेशक एके शर्मा के वकीलों ने पैरवी की थी।

हैदराबाद के व्यवसायी सतीश बाबू सना की शिकायत पर एफआईआर दर्ज की गई थी। उसने एक मामले में राहत पाने के लिए रिश्वत देने का आरोप लगाया था। सतीश ने यह भी कहा था कि वह सीबीआई के साथ जांच में सहयोग करेगा। सीबीआई के नंबर दो अफसर अस्थाना मीट कारोबारी मोइन कुरैशी के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग केस में जांच कर रहे थे। इस दौरान हैदराबाद का सतीश बाबू सना भी घेरे में आया। एजेंसी 50 लाख के ट्रांजैक्शन के मामले में उसके खिलाफ जांच कर रही थी। सना ने सीबीआई चीफ को भेजी शिकायत में कहा कि अस्थाना ने इस मामले में क्लीन चिट देने के लिए पांच करोड़ रुपये मांगे थे। इनमें तीन करोड़ एडवांस और दो करोड़ बाद में देने थे।

इसी मामले में गिरफ्तार एक आरोपी बिचौलिए मनोज प्रसाद ने मजिस्ट्रेट के सामने बयान दिया कि अस्थाना को दो करोड़ रुपये की घूस दी थी। मनोज ने कहा कि उसने यह घूस कुरैशी की तरफ से दी थी। इसके बाद सीबीआई ने अस्थाना के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया। इस मामले में अस्थाना की टीम में शामिल डीएसपी देवेंद्र कुमार को भी गिरफ्तार किया गया था।

इसके पहले सीबीआई के पूर्व विशेष निदेशक राकेश अस्थाना से जुड़ी जांच पूरी न होने को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट ने जांच एजेंसी को कड़ी फटकार लगाई थी। कोर्ट ने कहा था कि राकेश अस्थाना से जुड़ी जांच अगर तीन हफ्ते के भीतर पूरी नहीं हुई तो सीबीआई डायरेक्टर को कोर्ट तलब करेगा। कोर्ट ने कहा कि अगर तीन हफ्ते के भीतर सीबीआई कोर्ट में अपनी जांच रिपोर्ट सौंप देती है तो सीबीआई डायरेक्टर को आने की जरूरत नहीं होगी। जस्टिस विभु बाखरू ने सीबीआई की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश जारी किया।

कोर्ट ने कहा कि लगभग एक साल का वक्त पूरा होने को है और हर बार सीबीआई कुछ और महीनों का वक्त जांच पूरा करने को लेकर मांगती आई है, लेकिन अब इस मामले में कोर्ट और समय जांच पूरी करने के लिए नहीं दे सकता। इसमें सीबीआई ने खुद राकेश अस्थाना पर एफआईआर दर्ज की थी। उस समय सीबीआई डायरेक्टर आलोक वर्मा थे। दरअसल सीबीआई ने स्पेशल डायरेक्टर रहे राकेश अस्थाना और डीएसपी देवेंद्र कुमार समेत दो अन्य लोगों के खिलाफ 2017 से 2018 के बीच में मोइन कुरैशी से रिश्वत लेने के मामले में एफआईआर दर्ज की थी।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और कानूनी मामलों के जानकार हैं। वह इलाहाबाद में रहते हैं।)

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This post was last modified on February 12, 2020 1:56 pm

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