Monday, January 24, 2022

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सीबीआई नहीं चाहती बड़ी बेंच करे नारदा स्टिंग की सुनवाई, टीएमसी नेताओं की अब जेल नहीं घर में नज़रबंदी

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नारदा स्टिंग आपरेशन में सीबीआई द्वारा गिरफ्तार चार टीएमसी नेता अब जेल में नहीं बल्कि अपने अपने घरों में नजरबंद रहेंगे और अब इनके मामले में कलकत्ता हाईकोर्ट की बड़ी बेंच निर्णय करेगी। दरअसल अंदरखाने कुछ बड़ा घटा है, जिससे पहले गुरुवार 20 मई की सुनवाई अपरिहार्य कारणों से टाल दी गयी, फिर आज 21 मई शुक्रवार को सुनवाई के बीच में ही आदेश पारित कर दिया कि टीएमसी नेताओं को हाउस अरेस्ट किया जाए। इस मामले में कई क़ानूनी प्रश्नों ने कलकत्ता हाईकोर्ट को ही नहीं पूरे विधिक समाज को उलझा रखा है। अब एक ओर टीएमसी नेताओं के वकील आज ही बड़ी बेंच के गठन की मांग कर रहे हैं तो सीबीआई नहीं चाहती कि इस मामले पर बड़ी बेंच सुनवाई करे।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी की खंडपीठ ने आज दोपहर सुनवाई के दौरान कलकत्ता हाईकोर्ट के नारदा मामले को लार्जर बेंच को भेजने के फैसले पर रोक लगाने की सीबीआई के इस प्रार्थना को खारिज कर दिया।इससे पहले आज, कोर्ट ने मामले की सुनवाई कर रही डिवीजन बेंच के बुधवार से मामले में अपने फैसले पर असहमत होने के बाद मामले को एक बड़ी बेंच को भेजने का फैसला किया था। कोर्ट ने आज अपना आदेश सुनाते हुए यह भी स्पष्ट किया है कि फ़रहाद हाकिम एक कैबिनेट मंत्री के रूप में अपने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से जारी रख सकते हैं और अदालत इसे नहीं रोकेगी।

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया था कि भीमा कोरेगांव मामले में गौतम नवलखा की नजरबंदी के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले बताई गई शर्तों के अनुरूप सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किए गए चार टीएमसी नेताओं को हाउस अरेस्ट किया जाए। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी की पीठ नारद स्टिंग मामले में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पार्टी के नेताओं फिरहाद हकीम, सुब्रत मुखर्जी, मदन मित्रा और सोवन चटर्जी की गिरफ्तारी से संबंधित मामले की सुनवाई कर रही थी। चारों को सीबीआई की विशेष अदालत ने सोमवार, 17 मई को अंतरिम जमानत दी थी। हालांकि, उसी शाम सुनवाई के बाद उच्च न्यायालय ने इस जमानत आदेश पर रोक लगा दी थी।

नारदा घोटाला मामले में सीबीआई द्वारा गिरफ्तारी के बाद से 17 मई से हिरासत में रहे तृणमूल कांग्रेस के चार नेताओं की जमानत से संबंधित मामले की सुनवाई कर रही कलकत्ता हाईकोर्ट की खंडपीठ में जजों के भिन्न विचार होने के बाद मामले को एक बड़ी पीठ को भेज दिया गया। इस बीच, खंडपीठ ने चार नेताओं मंत्री फिरहाद हकीम और सुब्रत मुखर्जी, विधायक मदन मित्रा और सोवन चटर्जी को हाउस अरेस्ट करने का आदेश दिया। इस दौरान उन्हें सभी चिकित्सा सुविधाएं दी जाएंगी।

हाईकोर्ट ने गिरफ्तार किए गए व्यक्तियों में से दो के नव-निर्वाचित राज्य सरकार में मंत्री और एक के विधायक होने के कारण उन्हें अपने कार्यों के निर्वहन के लिए हाउस अरेस्ट के दौरान फाइलों तक पहुंचने और वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से अधिकारियों से मिलने की अनुमति दी है। पीठ ने मौजूदा आदेश पर रोक लगाने के सीबीआई के अनुरोध को भी खारिज कर दिया। बेंच ने टीएमसी नेताओं के वकीलों द्वारा अंतरिम जमानत पर रिहा करने के अनुरोध को मामले की सुनवाई एक बड़ी बेंच द्वारा नहीं किए जाने तक ठुकरा दिया। हालांकि, उसने नेताओं को फाइलों तक पहुंचने, अधिकारियों से मिलने की अनुमति दी है लेकिन केवल वीसी के माध्यम से।

कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल और न्यायमूर्ति अरिजीत बनर्जी की खंडपीठ ने बुधवार को मामले की लंबी सुनवाई की थी और इस मामले को आगे सुनवाई के लिए गुरुवार को तारीख लगाई थी पर अचानक इस सुनवाई को अपरिहार्य कारणों से टाल दिया गया। जस्टिस अरिजीत बनर्जी ने जहां अंतरिम जमानत देने का आदेश पारित किया है, वहीं कार्यवाहक चीफ जस्टिस बिंदल ने असहमति जताई और कहा कि गिरफ्तार किए गए चार टीएमसी नेताओं को नजरबंद रखा जाना चाहिए। खंडपीठ में मतभेद को देखते हुए मामले को बड़ी बेंच के पास भेज दिया गया।

टीएमसी नेताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने आदेश को सुनवाई के बीच में ही पारित कर दिए जाने पर हैरानी व्यक्त की। उन्होंने आग्रह किया कि जब तक मामले की सुनवाई बड़ी पीठ द्वारा नहीं की जाती, तब तक नेताओं को अंतरिम जमानत पर रिहा किया जाए। इस पीठ का गठन आज (शुक्रवार) ही किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि अंतरिम स्थिति स्वतंत्र होनी चाहिए। ये मंत्री, विधायक हैं। भागने के जोखिम की कोई संभावना नहीं है। उन पर जांच में सहयोग नहीं करने का कोई मामूली आरोप नहीं है।

 इस पर जस्टिस बनर्जी ने जवाब दिया कि पीठ के सदस्यों में से एक ने अंतरिम-जमानत देना उचित समझा। बेंच के अन्य सदस्य सहमत नहीं है। इसलिए अंतरिम जमानत के इस बिंदु पर बड़ी बेंच को विचार करना होगा। इस बीच, महामारी को देखते हुए हाउस अरेस्ट करने का आदेश दिया गया है।

नारदा टीवी न्यूज चैनल के मैथ्यू सैमुअल ने साल 2014 में कथित स्टिंग ऑपरेशन किया था जिसमें तृणमूल कांगेस के मंत्री, सांसद और विधायक लाभ के बदले में कंपनी के प्रतिनिधियों से कथित तौर पर पैसा लेते नजर आए थे। यह टेप पश्चिम बंगाल में 2016 के विधानसभा चुनाव के ठीक पहले सार्वजनिक हुआ था। कलकत्ता हाईकोर्ट ने स्टिंग ऑपरेशन के संबंध में मार्च 2017 को सीबीआई जांच का आदेश दिया था।

दरअसल जिस तरह बिना नोटिस दिए सीबीआई के प्रार्थना पत्र पर हाईकोर्ट ने सुनवाई की और सीएम ममता बनर्जी के सीबीआई मुख्यालय के बाहर धरना प्रदर्शन और उसमें बंगाल के कानून मंत्री के पहुंचने का घालमेल करके सीबीआई कोर्ट के जमानत पर सवाल उठाया, वह कानून के तहत अनुचित है, क्योंकि ममता बनर्जी ने न तो  सीबीआई की गिरफ्तारी में कोई अवरोध उत्पन्न किया न सीबीआई के विशेष जज पर कोई अनुचित दबाव डाला, न ही टीएमसी के चारों नेताओं को जबरन छुड़ाने की कोशिश की।हाईकोर्ट को यह देखना चाहिए था कि गिरफ़्तारी सही हुई है या नहीं और सीबीआई के विशेष जज द्वारा पारित जमानत आदेश उचित है या कानूनन गलत है। सीएम ममता बनर्जी ने इस दौरान किसी कानूनी प्रावधान का उल्लंघन किया तो उस पर अलग से विधिक कार्रवाई हो सकती थी।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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