Thursday, December 2, 2021

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केंद्र चाहता है ट्विटर भी बन जाए ट्रोल

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ट्विटर की पारदर्शिता और भारतीय क़ानून के मुताबिक अभिव्यक्ति की आज़ादी वाली दलील केंद्र सरकार को रास नहीं आई है। पारदर्शिता, अभिव्यक्ति की आज़ादी के तर्क के साथ केंद्र की मोदी सरकार के निर्देश को जनता के साथ साझा करने और भारतीय क़ानून की दुहाई देकर सरकार के आदेश को न मानने के बाद कल भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्राद्योगिकी मंत्रालय के सचिव और ट्विटर की ग्लोबल पब्लिक पॉलिसी की वाइस प्रेसिडेंट मोनीके मेशे के बीच वर्चुअल वार्ता हुई। केंद्र सरकार ने इस मीटिंग की प्रेस रिलीज साझा की है।

इस मीटिंग में केंद्र सरकार ने ट्विटर से सख़्त लहज़े में कहा है कि भारत में उसे भारतीय क़ानूनों का पालन करना ही होगा। इसके अलावा सरकार ने ट्विटर के कुछ अकाउंट को प्रतिबंधित करने के आदेश के पालन में देरी पर भी नाराज़गी ज़ाहिर की है। सरकार की तरफ से कहा गया है कि सरकार ने क़ानूनी प्रक्रिया के तहत ट्विटर को इस हैशटैग के बारे में जानकारी दे दी थी, बावजूद इसके भड़काऊ और भ्रामक जानकारियों को ट्वटिर पर इस हैशटैग से जुड़े कंटेंट को प्रसारित होने दिया गया।

केंद्र सरकार ने कैपिटल हिल हिंसा और 26 जनवरी को भारत के लाल क़िले पर हुए घटनाक्रम की तुलना करते हुए ट्विटर पर दोहरे मापदंड अपनाने के आरोप लगाते हुए कहा है कि ट्विटर को अमेरिका के कैपिटल हिल में हुई हिंसा के दौरान उठाए गए ट्विटर के क़दम भी याद कर लेना चाहिए, जब ट्विटर ने अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप समेत कई लोगों का अकाउंट बंद कर दिया था।

सचिव अजय साहनी ने ट्विटर प्रतिनिधियों से कहा है, “एक टूलकिट से जुड़ी जो जानकारियां सामने आई हैं, उससे साफ़ होता है कि विदेशों में भारत के ख़िलाफ़ सोशल मीडिया पर किसान आंदोलन से जुड़ा अभियान चलाने की योजना बनाई गई। भारत में वैमनस्य और अशांति पैदा करने के लिए डिज़ाइन किए गए ऐसे अभियानों के लिए ट्विटर का दुरुपयोग अस्वीकार्य है। ट्विटर को भारत के ख़िलाफ़ चल रहे ऐसे अभियानों के ख़िलाफ़ क़ानूनों का पालन करते हुए सख़्त कार्रवाई करनी चाहिए।”

भारत सरकार की तरफ़ से जारी बयान में बताया गया है कि मंत्रालय के सचिव अजय साहनी ने ट्विटर के प्रतिनिधियों से कहा है कि भारत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और आलोचना का सम्मान करता है, क्योंकि ये हमारे लोकतंत्र का हिस्सा है, लेकिन अभिव्यक्ति की आज़ादी निरंकुश नहीं है, और इस पर भी उचित प्रतिबंध लागू होते हैं, जैसा कि भारत के संविधान के अनुच्छेत 19 (2) में वर्णित है। भारत के सुप्रीम कोर्ट के कई निर्णयों में भी इस सिद्धांत को कई बार सही ठहराया गया है।

इसके अलावा केंद्र सरकार ने एक व्यापारिक संस्थान के तौर पर ट्विटर की हद बताते हुए कहा है, “ट्विटर का भारत में व्यापार करने के लिए स्वागत है, लेकिन ट्विटर को भारत के क़ानूनों और लोकतांत्रिक संस्थानों का भी सम्मान करना होगा। ट्विटर अपने नियम और दिशा-निर्देश बना सकता है, लेकिन भारत की संसद में पारित क़ानूनों का पालन करना ही होगा। भले ही ट्विटर के अपने नियम और दिशा-निर्देश कुछ भी हों।’

यानी मोटे तौर पर सरकार ने ट्विटर से कह दिया है कि भारत में बिजनेस करना है तो सरकार का कहा मानना ही होगा। इसके अलावा सरकार की तरफ़ से हैशटैग ‘फार्मर जेनोसाइड’ को लेकर नाराज़गी भी ज़ाहिर की गई। भारत सरकार ने ट्विटर को इस हैशटैग का इस्तेमाल करके ट्वीट करने वाले 250 से अधिक अकाउंट को प्रतिबंधित करने के लिए कहा है। बता दें कि ट्विटर ने सरकार के आदेश पर कुछ दिन पहले कई अकाउंट भारत में प्रतिबंधित भी किए थे, लेकिन अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का हवाला देते हुए उन्हें कुछ ही घंटों में फिर से चालू कर दिया गया था।

दरअसल ट्विटर द्वारा ब्लॉग लिखकर सरकार के निर्देशों का पर्दाफाश किया जाना केंद्र सरकार को रास नहीं आया और ट्विटर के ब्लॉग के जवाब में कल ही केंद्र सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की ओर से एक ट्वीट किया गया है। इस ट्वीट में लिखा है, “ट्विटर के अनुरोध करने पर इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव कंपनी के वरिष्ठ प्रबंधन के साथ बातचीत करने वाले थे, लेकिन इस संबंध में कंपनी द्वारा एक ब्लॉग लिखा जाना एक असामान्य बात है। सरकार जल्द ही इस पर अपनी प्रतिक्रिया साझा करेगी।”

बता दें कि कल माइक्रो-ब्लॉगिंग वेबसाइट ट्विटर ने इस ब्लॉग में यह लिखा था, ‘कंपनी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्ष में है और हाल ही में केंद्र सरकार ने जिस आधार पर ट्विटर अकाउंट्स बंद करने को कहा, वो भारतीय क़ानूनों के अनुरूप नहीं है।’

मंगलवार को समाचार एजेंसी पीटीआई ने सूत्रों के हवाले से लिखा था कि भारत सरकार ने ट्विटर को कथित पाकिस्तान और खालिस्तान समर्थकों से संबंधित 1178 ट्विटर अकाउंट बंद करने का आदेश दिया है, जो किसानों के विरोध प्रदर्शनों को लेकर ग़लत सूचना और उत्तेजक सामग्री फैलाते रहे हैं।

बताया गया कि सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने चार फ़रवरी को इन ट्विटर अकाउंट्स की एक सूची साझा की थी। इन अकाउंट्स की पहचान सुरक्षा एजेंसियों ने खालिस्तान समर्थक या पाकिस्तान द्वारा समर्थित और विदेशी धरती से संचालित होने वाले अकाउंट्स के तौर पर की थी, जिनसे किसान आंदोलन के दौरान सार्वजनिक व्यवस्था को ख़तरा है।

इससे पहले, सरकार ने ट्विटर को उन ‘हैंडल्स’ और ‘हैशटैग्स’ को हटाने का आदेश दिया था, जिनमें दावा किया गया था कि किसान नरसंहार की योजना बनाई जा रही है। सरकार ने कहा था कि इस तरह की ग़लत सूचना और भड़काऊ सामग्री सार्वजनिक व्यवस्था को प्रभावित करेगी। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, केंद्र सरकार ने ट्विटर को निर्देशों का अनुपालन करने में विफल रहने पर दण्डात्मक कार्रवाई की भी चेतावनी दी थी।

ट्विटर के अनुसार, इस दौरान केंद्र सरकार से भी उन्हें आईटी एक्ट के सेक्शन-69ए के तहत कुछ आदेश मिले, जिनमें बहुत से ट्विटर अकाउंट्स को निलंबित करने का अनुरोध किया गया है।

कंपनी ने लिखा है कि ‘हमने इनमें से दो आदेशों का अस्थायी रूप से पालन किया था, जिनमें आपातकालीन रूप से अकाउंट ब्लॉक करने की बात कही गई थी, लेकिन बाद में हमने उन्हें बहाल कर दिया, क्योंकि ये भारतीय क़ानून के अनुरूप पाए गए। जब इसकी सूचना भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को दी गई, तो उन्होंने हमें निर्देशों का अनुपालन करने में विफल रहने का एक नोटिस थमा दिया।’

26 जनवरी 2021 की घटना का ज़िक्र करते हुए ट्विटर ने लिखा है, ‘हमारी ग्लोबल टीम ने इस दौरान 24/7 कवरेज प्रदान की और सारे कॉन्टेंट, ट्वीट्स और अकाउंट्स पर न्यायिक और निष्पक्ष रूप से कार्रवाई की, क्योंकि ये ट्विटर के नियमों का उल्लंघन कर रहे थे।’

ट्विटर ने अपने ब्लॉग में लिखा है, ‘जिन ट्वीट्स में नुक़सानदायक कॉन्टेंट था, वो अब कम दिखाई देंगे, क्योंकि कंपनी ने उनकी विज़िबिलिटी घटा दी है। कंपनी ने केंद्र सरकार से सुझाए गए 500 से ज़्यादा ट्विटर अकाउंट्स के ख़िलाफ़ कार्रवाई की है, जिनमें से अधिकांश अकाउंट स्थायी रूप से निलंबित कर दिए गए हैं।’

‘इसके अलावा, कंपनी ने बुधवार को ही सरकार की ओर से रेखांकित किए गए अकाउंट्स में से कुछ को भारत में रोक दिया है। हालांकि, ये अकाउंट भारत के बाहर उपलब्ध रहेंगे, क्योंकि हम नहीं मानते कि हमें भारतीय क़ानून के अनुरूप इन अकाउंट्स के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने को कहा गया। हम अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के पक्षधर हैं और इसी नज़रिये को ध्यान में रखकर हमने मीडिया के लोगों, पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनेताओं के अकाउंट्स के ख़िलाफ़ कोई कार्रवाई नहीं की है।’

कंपनी ने अपने ब्लॉग में लिखा है, ‘हमारा विश्वास है कि सार्वजनिक संवाद और परस्पर विश्वास बनाने के लिए पारदर्शिता बहुत ज़रूरी है। यह हमारे लिए बहुत महत्वपूर्ण है कि लोग इस बात को समझें कि हम अपने प्लेटफ़ॉर्म पर कंटेंट की छटनी कैसे करते हैं और पूरी दुनिया की सरकारों के साथ कैसे संवाद करते हैं। हमारी पारदर्शिता रिपोर्ट में यह देखा जा सकता है कि सरकारें हमसे क्या अनुरोध करती हैं और हम वैश्विक स्तर पर कैसे काम करते हैं।’

कंपनी ने अपने ब्लॉग में लिखा है, ‘मौजूदा दौर में फ़्री इंटरनेट और अभिव्यक्ति की आज़ादी पर लगातार ख़तरा मंडरा रहा है। पिछले कुछ हफ़्तों में भारत में हिंसा की ख़बरों पर हम बारीकी से अपडेट देना चाहते थे, और अपने नियमों और सिद्धांतों को गंभीरता से लागू करने के प्रयास कर रहे थे।’

कंपनी ने आगे लिखा है, ‘ट्विटर की मौजूदगी इसीलिए है, ताकि हम अपने यूज़र्स की आवाज़ को ज़्यादा से ज़्यादा लोगों तक पहुंचा सकें। इसे ध्यान में रखते हुए हम लगातार अपनी सेवाओं में सुधार कर रहे हैं, ताकि हर कोई, चाहे उनका जो भी नज़रिया हो, निर्भीक होकर एक सार्वजनिक संवाद में शामिल हो सकें।’

(जनचौक के विशेष संवदादाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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