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छत्तीसगढ़ः पारंपरिक हथियारों के साथ हजारों ग्रामीणों ने किया पुलिस कैंप के विरोध में प्रदर्शन

किरंदुल। छत्तीसगढ़ के किरंदुल में तीन जिलों के हजारों ग्रामीणों ने अपने पारंपरिक हथियारों के साथ प्रदर्शन किया। यह ग्रामीण अपने जल, जंगल, जमीन को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। गुमियापाल में पुलिस कैंप खोला गया है। ग्रामीण उसका मुखर विरोध कर रहे हैं। दरअसल आलनार के पहाड़ में लौह अयस्क की खदान है। एक निजी कंपनी को खनन के लिए यह खदान दी गई है। ग्रामीणों का कहना है कि उनकी जमीन का अधिग्रहण कराने के लिए ही यहां पुलिस कैंप खोला गया है। हमें पुलिस कैंप की नहीं, स्कूल, अस्पताल और आश्रम की जरूरत है।  

न लोकसभा न विधानसभा, सबसे बड़ी ग्रामसभा। अपने गांव में अपना राज! (मावा नाटे मावा राज) इसी उद्देश्य को लेकर आज सोमवार को गुमियापाल पंचायत में तीन जिलों के हजारों ग्रामीणों ने पारंपरिक हथियारों से लैस होकर विरोध प्रदर्शन किया। ग्रामीणों ने हथियार लहराते हुए नारेबाजी कर साफ कहा कि जान देंगे पर जमीन नहीं देंगे। दरअसल गुमियापाल पंचायत के आश्रित ग्राम आलनार के पहाड़ में लौह अयस्क की खदान है और उसे एक निजी कंपनी को खनन के लिए दे दिया गया है। पर नक्सल गतिविधियों की वजह से निजी कंपनी अब तक लौह अयस्क का दोहन नहीं कर सकी है। हाल ही में गुमियापाल में पुलिस का नया कैंप स्थापित करने को लेकर ग्रामीण विरोध जता रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस, कैंप के नाम पर उनकी जमीन का अधिग्रहण करेगी और आलनार की लौह अयस्क खदान निजी कंपनी के लिए शुरू करवाएगी।

बैलाडिला क्षेत्र के ग्रामीण माइंस और जमीन अधिग्रहण का विरोध करते पुन: लामबंद हो रहे हैं। सोमवार को हजारों ग्रामीण किरंदुल थाना क्षेत्र के ग्राम  गुमियापाल में एकत्र होकर अपनी आवाज बुलंद की। ग्रामीणों का कहना है कि प्रशासन वास्‍तविक ग्रामसभा के बजाए फर्जी तरीके से ग्रामसभा करके लौह अयस्‍क उत्‍खनन समेत दीगर कार्यों को अंजाम देती है। अब ऐसा होने नहीं देंगे, इसलिए विरोध जताने सोमवार को गुमियापाल में संयुक्‍त पंचायत जनसंघर्ष समिति के बैनर तले बड़ी रैली निकाल कर विरोध जताया गया।

ग्रामीणों के मुताबिक पूर्व में हिरोली की  ग्रामसभा आखिर फर्जी साबित हुई और आलनार ग्रामसभा की स्थिति भी वैसी ही है। पूरे बस्‍तर संभाग में भारतीय संविधान के अनुच्छेद 244(1) पांचवीं अनुसूची  लागू है, इसके बावजूद ग्रामसभा की अनुमति लिए बगैर गांवों की जमीन का अधिग्रहण कर सरकार लीज पर दे रही है। यह आदिवासियों के अधिकार पर प्रहार है।  साथ ही इलाके में प्रस्‍तावित पुलिस कैंपों का विरोध कर रहे ग्रामीणों ने कहा कि पुलिस हमारी सुरक्षा के लिए है, लेकिन प्रशासन इन्‍हीं पुलिस का भय दिखाकर ग्रामीणों की जमीन अधिग्रहण बड़ी कंपनियों के लिए कर रही है। इसलिए इस पर भी रोक लगनी चाहिए।

आरती स्‍पंज आयर कंपनी की लीज निरस्‍त हो
बैठक में शामिल जनपद सदस्‍य जोगा, राजू भास्‍कर, नंदा, बामन, राजकुमार ओयामी  आरनपुर सरपंच जोगा आदि आदिवासी नेताओं ने कहा कि आलनार ग्रामसभा को भी हिरोली की तरह शून्‍य घोषित किया जाए। इसके साथ ही आरती स्‍पंज आयरन कंपनी को दी गई लीज को निरस्‍त करने की मांग की गई है।

कैंप नहीं स्‍कूल-आश्रम खोले सरकार
आदिवासी नेताओं ने कहा कि इलाके में पुलिस का विरोध नहीं है, लेकिन उनकी मौजूदगी से जीवन जीने का डर है। पुलिस कैंप खुलने के बाद आदिवासी नक्‍सली और फोर्स के बीच पीसे जाते हैं। फोर्स उन्‍हें नक्‍सली कहकर मारती है तो नक्‍सली पुलिस का मुखबिर और सहयोगी बताकर हत्‍या करते हैं। आदिवासी इलाके का विकास चाहते हैं पर खून खराबे से नहीं। इसलिए गांव में स्‍कूल, आश्रम, हॉस्पिटल, सड़क बनाएं। ज्ञात हो कि एक दिन पहले रविवार को कटेकल्‍याण थाना क्षेत्र के टेटम गांव में भी सैकड़ों ग्रामीण जुटकर कुछ इसी तरह की बात कही थी।

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This post was last modified on September 8, 2020 11:32 am

Janchowk

Janchowk Official Journalists in Delhi

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