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केंद्र को खदान तो चाहिए लेकिन धान नहीं!

केंद्र सरकार ने छत्तीसगढ़ से धान खरीदने से मना कर दिया है। उसकी नाराजगी किसानों को बोनस और 2500 रुपये प्रति क्विंटल धान खरीदने को लेकर है। इसका एलान राज्य सरकार ने किया है। केंद्र के धान खरीदने से मना करने पर सोशल मीडिया पर लोगों की तीखी प्रतिक्रिया आने लगी है। उनका कहन है कि केंद्र को छत्तीसगढ़ का खनिज और खदान तो चाहिए, लेकिन धान नहीं।

छत्तीसगढ़ सरकार के किसानों को धान बोनस देने और 2500 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी से नाराज केंद्र सरकार ने बड़ा झटका देते हुए धान लेने से इंकार कर दिया है। केंद्र ने राज्य सरकार को खत लिखकर किसानों को बोनस और 2500 रुपये प्रति क्विंटल धान खरीदने के विरोध में धान खरीदी करने से ही इनकार कर दिया है। इस पत्र में केंद्र सरकार ने राज्य सरकार को कहा है कि अगर राज्य सरकार धान खरीदी पर किसानों को बोनस देगी तो केंद्र सरकार चावल नहीं खरीदेगी। केंद्र के इस निर्णय के बाद राज्य सरकार के सामने धान खरीद को लेकर संकट पैदा हो गया है। राज्य सरकार ने इस बार 87 लाख मीट्रिक टन धान खरीद का लक्ष्य रखा है। छत्तीसगढ़ में 15 नवंबर से धान खरीद शुरू होनी है।

केंद्र सरकार के चावल लेने से इंकार करने के फैसले को लेकर सोशल मीडिया में प्रतिक्रिया आ रही है। लोगों का कहना है कि उन्हें छत्तीसगढ़ का चावल नहीं चाहिए। यहां का कोयला और अन्य खनिज चाहिए! तुम्हारा ‘धान’ नहीं चाहिए। फाइनांसर दोस्तों के लिए ‘खदान’ चाहिए।

बता दें कि राज्य सरकार ने चालू खरीफ विपणन सीजन 2019-20 के लिए राज्य से 87 लाख टन धान खरीद का लक्ष्य रखा है। पिछले साल तक केंद्र सरकार छत्तीसगढ़ से अरवा और उसना चावल मिलाकर 24 लाख मीट्रिक टन चावल की खरीद केंद्रीय पूल के तहत कर रही थी। इसे राज्य सरकार ने बढ़ाकर 32 लाख टन करने की मांग की थी, लेकिन केंद्र सरकार ने खरीद का कोटा बढ़ाने के बजाय खरीद करने से ही मना कर दिया।

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखकर किसानों से 25 सौ रुपये प्रति क्विंटल धान खरीदने की सहमति देने का अनुरोध किया है। राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि मुख्यमंत्री बघेल ने प्रधानमंत्री मोदी को पत्र लिखकर खरीफ वर्ष 2019-20 में किसानों के हित में समर्थन मूल्य को बढ़ाकर 2500 रुपये प्रति क्विंटल करने की गुजारिश की है। किसी परिस्थिति में भारत सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य में इस अनुरूप वृद्धि नहीं कर सकती है तो राज्य सरकार को इस मूल्य पर धान उपार्जित करने की सहमति प्रदान करने का अनुरोध किया गया है।

मुख्यमंत्री ने खत में अतिरिक्त उत्पादन वाले अरवा और उसना चावल को केंद्रीय पूल में मान्य करने का भी अनुरोध किया था। मुख्यमंत्री ने कहा था कि धान खरीद शुरू होने में समय कम है, इसलिए किसानों के हित में जल्द आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाने चाहिए। उन्होंने लिखा था कि राज्य सरकार हर साल लगभग 80 से 85 लाख मीट्रिक टन धान खरीदती है। सरकार ने इस बार 87 लाख मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा है।

बता दें कि धान खरीद के मसले पर केंद्र सरकार से मांगी गई रियायत पर राज्यपाल अनुसुईया उइके ने भी अपना सैद्घांतिक समर्थन दिया है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर राज्य की मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करने का अनुरोध किया है। राज्यपाल ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की प्रधानमंत्री को लिखी गई चिट्ठी का भी जिक्र किया है।

अतिरिक्त चावल का राज्य सरकार क्या करेगी केंद्र सरकार ने राज्य को चिट्ठी लिखकर कहा है कि यदि राज्य सरकार इसी तरह किसानों को बोनस देगी तो वो धान नहीं खरीदेगी। इस पत्र ने राज्य सरकार की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि राज्य में लगभग 38 लाख टन धान की खपत होती है। इससे ऊपर खरीदे जाने वाले लगभग 49 लाख टन धान का सरकार क्या करेगी, इसे लेकर चिंता बढ़ गई है? अगर केंद्र सरकार इसे नहीं लेगी तो फिर इस चावल का वह क्या करेगी, ये एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है?

This post was last modified on November 1, 2019 12:36 pm

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