Tuesday, October 26, 2021

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दुनिया की महिलाओं एक हो जाओ, तुम्हारे पास खोने के लिए अपनी जंजीरों के अलावा कुछ नहीं है: चीफ जस्टिस रमना

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न्यायपालिका में ज़्यादा महिलाओं की भागीदारी पर बल देते हुए चीफ जस्टिस एनवी रमना ने कहा है कि भारत की न्यायपालिका में महिलाओं के लिए 50 फ़ीसदी आरक्षण होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने देश भर के लॉ कॉलेजों में भी इतने ही आरक्षण का समर्थन किया है। चीफ जस्टिस ने ज्यूडिशरी में सुधार पर जोर देते हुए कहा कि मैं आप सभी को याद दिलाना चाहता हूं कि कार्ल मार्क्स ने क्या कहा था। उन्होंने कहा था कि दुनिया के मजदूर एक हो जाओ, तुम्हारे पास खोने के लिए अपनी जंजीरों के अलावा कुछ नहीं है। मैं उनकी इस लाइन में कुछ बदलाव करूंगा। दुनिया की महिलाओं एक हो जाओ, तुम्हारे पास खोने के लिए अपनी जंजीरों के अलावा कुछ नहीं है।

चीफ जस्टिस ने कहा कि वो जानते हैं। महिला वकीलों के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। काम करने का महौल उनके मुताबिक नहीं है। काम काजी महिलाओं के लिए बुनियादी सुविधाएं जैसे वॉशरूम और शिशु गृह तक की व्यवस्था नहीं है।चीफ जस्टिस ने ये बात महिला वकीलों को संबोधित करते हुए कही। वो सुप्रीम कोर्ट के 9 नए जजों के लिए आयोजित सम्मान समारोह में बोल रहे थे।
चीफ जस्टिस ने कहा कि यह हजारों साल के दमन का मुद्दा है। निचली न्यायपालिका में 30% से भी कम जज महिलाएं हैं। उच्च न्यायालयों में 11.5% महिला जज हैं। जबकि सुप्रीम कोर्ट में सिर्फ 11-12 फीसदी महिला जज हैं, 33 में से सिर्फ चार। वहीं देश में 17 लाख वकील हैं, उनमें सिर्फ 15% महिलाएं हैं। उन्होंने कहा कि राज्यों की बार काउंसिल में केवल 2% निर्वाचित प्रतिनिधि महिलाएं हैं। मैंने यह मुद्दा उठाया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया नेशनल कमेटी में एक भी महिला प्रतिनिधि क्यों नहीं है? इन मुद्दों में तत्काल सुधार की जरूरत है।

चीफ जस्टिस ने कहा कि कई चुनौतियां हैं जो इस प्रणाली में महिला वकीलों के लिए अनुकूल नहीं हैं। कभी-कभी मुवक्किलों की प्राथमिकता, असहज वातावरण, बुनियादी ढांचे की कमी, भीड़-भाड़ वाले कोर्ट रूम, महिला वॉशरूम की कमी, क्रेच की कमी, बैठने की जगह की कमी जैसे मुद्दे हैं। मैं बुनियादी ढांचे के मुद्दों को सुलझाने की कोशिश कर रहा हूं। कार्यपालिका को परिवर्तन करने के लिए बाध्य करने की कोशिश है।

चीफ जस्टिस ने सभी को कहा कि आज डॉटर्स डे है। आप सभी को बेटी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं। बेशक, यह अमेरिकी परंपरा है लेकिन हम दुनिया भर में कुछ अच्छी चीजों का जश्न मनाते हैं।

गौरतलब है कि चीफ जस्टिस रमना के कार्यकाल में एक साथ तीन महिला न्यायाधीश सुप्रीम कोर्ट में नियुक्त की गई हैं और इसके साथ ही इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि एक साथ चार महिला जज- जस्टिस इंदिरा बनर्जी, हेमा कोहली, बीवी नागरत्ना और बेला एम त्रिवेदी सुप्रीम कोर्ट में कार्यरत हैं। हालाँकि, इस संख्या पर भी चीफ जस्टिस ने तब कहा था कि आज़ादी के 75 साल बाद भी शीर्ष अदालत में महिलाओं को सिर्फ़ 11 फ़ीसदी प्रतिनिधित्व ही मिला है।

चीफ जस्टिस रमना ने इस बार जिन तीन महिला जजों को सिफ़ारिश की थी और जिनको सरकार ने भी मंजूर कर लिया। उनमें शामिल हैं- कर्नाटक हाई कोर्ट की जस्टिस बी.वी. नागरत्ना, तेलंगाना हाई कोर्ट की चीफ़ जस्टिस हिमा कोहली और गुजरात हाई कोर्ट की जस्टिस बेला त्रिवेदी। जस्टिस बी.वी. नागरत्ना भारत की पहली महिला सीजेआई बन सकती हैं।

चीफ जस्टिस सुप्रीम कोर्ट के अलावा हाई कोर्ट में महिला जजों की नियुक्ति को भी तवज्जो देते रहे हैं। मुख्य न्यायाधीश के नेतृत्व वाले सुप्रीम कॉलिजियम ने हाल में जिन 68 नामों को भेजा है उनमें 10 महिलाएँ शामिल हैं।

चीफ जस्टिस रमना ने इससे पहले एक कार्यक्रम में कहा था कि देश की आजादी के 75 साल बाद सभी क्षेत्रों में कम से कम 50 फीसदी महिलाओं की भागीदारी की उम्‍मीद की जाती है। लेकिन बहुत कम महिलाओं को शीर्ष पर प्रतिनिधित्व मिलता है। इसके बाद भी उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्‍होंने सुप्रीम कोर्ट में 11-12 फीसदी महिला न्‍यायाधीशों का जिक्र करते हुए कहा था कि ऐसा काफी समय बाद हो पाया है।

उल्‍लेखनीय है कि सुप्रीम कोर्ट में इस वक्‍त चार महिला न्यायाधीश जस्टिस इंदिरा बनर्जी, हेमा कोहली, बीवी नागरत्ना और बेला एम त्रिवेदी हैं। शीर्ष अदालत में 31 अगस्त का दिन बेहद खास था, जब पहली बार तीन महिलाओं समेत नौ न्यायाधीशों ने एक बार में पद की शपथ ली थी। सुप्रीम कोर्ट में इस वक्‍त चीफ जस्टिस सहित 33 न्‍यायाधीश हैं और इस लिहाज से महिला न्‍यायाधीशों की संख्‍या लगभग 11-12 फीसदी बनती है। जस्टिस नागरत्ना के सितंबर 2027 में सुप्रीम कोर्ट की चीफ जस्टिस बनने की संभावना है। अगर ऐसा होता है तो वह देश की पहली महिला चीफ जस्टिस होंगी।

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