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खेत बेचे जाने के बाद भी नहीं भरा अस्पताल का पेट! बिना टांका लगाये फटे पेट बच्ची को बाहर फेंका, बच्ची की मौत

प्रयागराज। तीन वर्षीय बेटी के इलाज के लिये पिता ने खेत बेच दिया, रिश्तेदारों से भी पैसे उधार लिया। बावजूद इसके पैसे कम पड़ गये तो निजी अस्पताल ने बिना टांका लगाये फटे पेट ही बाहर कर दिया। जिससे लड़की की हालत बिगड़ गई और उसने पिता के गोद में तड़प-तड़प कर दम तोड़ दिया।

बता दें कि उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के पिपरी थाना क्षेत्र के करेहदा के मुकेश मिश्रा ने अपनी 3 साल की मासूम बेटी खुशी को 20 दिन पहले रावतपुर व घोसी गांव के बीच स्थित यूनाइटेड मेडिसिटी अस्पताल में भर्ती कराया था। 

परिजनों के मुताबिक तीन साल की खुशी को पेट में दर्द होता था। परिवार ने उसे यूनाइटेड मेडिसिटी अस्पताल में भर्ती कराया। यहां डॉक्टरों ने बताया कि आंत में इन्फेक्शन है। इसके कुछ दिन बाद बच्ची के पेट का ऑपरेशन किया गया। जहां टांका लगा था वहां पस पड़ने लगा था। चार-पांच दिन बाद उसी जगह पर एक और ऑपरेशन किया गया। बच्ची के पिता ने बताया कि ऑपरेशन के लिए डेढ़ लाख रुपये ले लेने के बाद हॉस्पिटल प्रशासन ने पांच लाख रुपये की डिमांड की। 

जब रुपये नहीं दे पाए तो हॉस्पिटल ने बच्ची को फटे पेट के साथ ही परिवार समेत बाहर भेज दिया और कहा क‍ि अब इसका इलाज यहां नहीं हो पाएगा। पीड़ित परिवार बिटिया को लेकर शहर के दूसरे अस्पताल का चक्कर काटता रहा, लेकिन कहीं पर उसे भर्ती नहीं किया गया। खुशी की हालत खराब होने पर परिवार दोबारा यूनाइटेड मेडिसिटी हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। जहां बच्ची को भर्ती करने से इनकार कर दिया गया। इलाज के अभाव और इंतजार में मासूम की मौत हो गई। 

बता दें कि रावतपुर के समीप स्थित प्राइवेट अस्पताल प्रयागराज शहर के एक उद्योगपति का है। बच्ची की मौत के बाद पीड़ित परिवार और ग्रामीण आक्रोशित होकर विरोध करते हुए चक्काजाम कर दिए।

बच्ची की मौत के बाद हंगामा होने के बाद पुलिस अधिकारियों ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कई थानों की फोर्स के अलावा पुलिस लाइन से अतिरिक्त पुलिस बल भेजा। सीओ श्यामकांत कई थानों की फोर्स के साथ मौके पर पहुंचे। परिजनों को किसी तरह समझा-बुझाकर शांत कराया। वहीं पुलिस ने डॉक्टर को बुला कर अस्पातल गेट पर ही मृतक बच्ची के पेट में टांका लगवाया। अस्पताल के कर्मचारी ने खुले आसमान के नीचे जमीन पर पड़ी बच्ची के शव के पेट में टांका लगाया। जिसके बाद पिपरी पुलिस ने बच्ची के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिये भेज दिया। 

घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद जिलाधिकारी भानु चंद्र गोस्वामी ने मामले का संज्ञान लिया। उन्होंने इस मामले पर एडीएम सिटी और सीएमओ की दो सदस्यीय टीम गठित कर जांच के आदेश दिए हैं और कहा है कि जांच में दोषी पाए जाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं सीओ श्यामकांत ने मीडिया को बताया कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी। 

जबकि इस मामले में नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ चाइल्ड राइट्स (NCPCR) ने कलेक्टर से 24 घंटे के अंदर कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। NCPCR ने जांच करने की मांग के साथ अस्पताल के डॉक्टर और स्टाफ के खिलाफ आईपीसी की सख्त धाराओं के तहत केस दर्ज करने को कहा है।

This post was last modified on March 6, 2021 9:20 pm

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