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आइसा उपाध्यक्ष समेत युवा नेताओं की गिरफ्तारी की माले ने की निंदा

लखनऊ। भाकपा (माले) की राज्य इकाई ने आइसा प्रदेश उपाध्यक्ष नितिन राज समेत युवा नेताओं की घंटाघर व अन्य जगहों से लखनऊ पुलिस द्वारा रविवार को गिरफ्तार करने की कड़ी निंदा की है। पार्टी ने इसे योगी सरकार की अलोकतांत्रिक और दमनकारी कार्रवाई बताते हुए सभी की अविलंब बिना शर्त रिहाई की मांग की है।

सोमवार को जारी बयान में पार्टी ने कहा कि आइसा नेता को घंटाघर पर दो माह से चल रहे महिलाओं के सीएए-एनआरसी-एनपीआर विरोधी आंदोलन के समर्थन में वहां मौजूद रहने के कारण गिरफ्तार किया गया, जो अपने आप में गिरफ्तारी का कोई आधार नहीं है। यह योगी सरकार में जारी पुलिस राज का ही नतीजा है कि एक संविधान सम्मत और शांतिपूर्ण आंदोलन को लोकतांत्रिक समर्थन देना जुर्म हो गया है। यह भाजपा सरकार की तानाशाही है जो अस्वीकार्य है।

ठाकुरगंज थाने के एसएचओ प्रमोद कुमार मिश्रा द्वारा दर्ज किए गए इस एफआईआर में नितिन ठाकुर समेत 20 लोगों के ख़िलाफ़ तमाम धाराएँ लगायी गयी हैं। इन सभी पर धरना के 60 दिन पूरा होने पर 16 मार्च को जाम लगाने और पूरे माहौल को बिगाड़ने का आरोप लगाया गया है। इसके साथ ही धारा 144 के उल्लंघन का भी इन पर आरोप है। इनके ख़िलाफ़ लगी धाराओं में 145, 147, 149, 188, 283, 353, 427, 505 और भारतीय दंड विधान की 7 सीएलए एक्ट तथा 66 आईटी एक्ट प्रमुख हैं। एफआईआर में तमाम उन गाड़ियों के नंबर दिए गए हैं जिनके धरना स्थल पर खड़े होने के चलते जाम लगा। बताया जा रहा है कि 20 में से नितिन समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

पार्टी ने कहा कि रिकवरी अध्यादेश 2020 जैसे ‘काले कानून’ को प्रदेश में लागू कर योगी सरकार न्यायपालिका का अपमान करने के साथ-साथ हर तरह के लोकतांत्रिक प्रतिवाद का दमन कर देना चाहती है। सामाजिक कार्यकर्ताओं से वसूली के लिए राजधानी के चौराहों पर लगे होर्डिंग हाईकोर्ट के स्पष्ट आदेश के बावजूद न हटाकर वह खुद की गैर-कानूनी कार्रवाई को जायज ठहराने के लिए दिन-रात एक किये हैं। लेकिन नागरिकों की ओर से प्रत्युत्तर मिलने पर उसकी बौखलाहट और दो रंगी नीति उजागर हो जाती है। यह दिखाता है कि लोगों को डराने का उपक्रम करने वाली सरकार अंदर से कितनी डरी हुई है।

This post was last modified on March 16, 2020 7:58 pm

Janchowk

Janchowk Official Journalists in Delhi

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