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Monday, July 26, 2021

झारखंड: कंपनी ने हड़प ली आदिवासियों की जमीन, घटना को लेकर लोगों में रोष

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झारखंड के सरायकेला खरसावां जिले के चांडिल प्रखंड में स्थित जारियाडीह गांव के आदिवासियों की जमीन की जिस तरह से लूट हो रही है, अगर इस पर अविलंब रोक नहीं लगाई गयी तो आने वाला समय काफी खरनाक साबित होगा। क्योंकि दूसरी तरफ इस लूट के खिलाफ ग्रमीणों में काफी आक्रोश है, जो एक नए संघर्ष की ओर साफ इशारा कर रहा है। बता दें कि सीएनटी की जमीन की खरीद-बिक्री के लिए पेसा एक्ट के तहत कई नियम हैं, उन नियमों की अनदेखी की जा रही है। नियमों का उल्लंघन कर सीएनटी जमीन पर अतिक्रमण करने में अधिकारियों व नेताओं की मिली भगत है। यह अनदेखी क्रिस्टल मेटफॉम प्राइवेट लिमिटेड कंपनी कर रही है। बता दें कि आदिवासियों की जमीन लूट में सभी राजनीतिक दलों के नेता शामिल हैं, जिस वजह से कंपनी का मनोबल काफी ऊंचा है।

उल्लेखनीय है कि जारियाडीह गांव में अवैध तरीके से आदिवासी रैयती जमीन के साथ-साथ ग्राम सभा की खास जमीन पर क्रिस्टल मेटफॉम प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को बसाया जा रहा है, जिसका विरोध पिछले 7 महीने से जरीयाडीह ग्राम सभा एवं संयुक्त ग्राम सभा दोनों मिल कर कर रहे हैं। इस मामले पर ग्रामीणों का कहना है कि ग्राम सभा खास जमीन पर हमारा पूजा स्थल है और वह हमारी पारंपरिक सांस्कृतिक धरोहर है, लेकिन कंपनी द्वारा उक्त जमीन पर अतिक्रमण के चलते हमारा संस्कृतिक धरोहर हो गया है। साथ ही पूजा करने जाने पर हमें कंपनी द्वारा रोका जा रहा है।

जारियाडीह के पारंपरिक मांझी बाबा सुरेश हांसदा बताते हैं कि यहां सदियों से आदिवासी समाज के संथाल सामुदाय द्वारा तीन प्रकार की पारंपरिक पूजा मारांग पूजा, एरोञ पूजा एवं गट पूजा होती आ रही थी। लेकिन अवैध रूप से स्थापित “क्रिस्टल मेटफम प्राइवेट लिमिटेड कंपनी” ने हमारी धार्मिक आस्था, पूजा पाठ को बाधित किया है। इसके चलते आदिवासी समाज की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंची है।

ग्राम सभा जारियाडीह के सचिव गोकुल हेम्ब्रम ने कहा कि विगत 29 जून 2021 को चांडिल अंचल अधिकारी के कार्यालय पर धरना प्रदर्शन करके उनके माध्यम से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को ज्ञापन सौंपा गया तथा निवेदन किया गया कि मुख्यमंत्री मामले पर यथाशीघ्र संज्ञान लेते हुए कार्रवाई करें।

उन्होंने बताया कि हमारी मांगों में, 1- अनुसूचित जिला सरायकेला खरसावां का प्रखंड सह अंचल चांडिल का ग्राम जारियाडीह, थाना संख्या-272, खाता संख्या 79 (पांचवीं अनुसूची भूमि) का खेसरा संख्या – 482, 578, 570, 567, 568, 565, 538 एवं 493 का कुल रकवा 4.71 एकड़ ज़मीन प्रस्तावित क्रिस्टल मेटफम प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को आवंटित लीज रद्द की जाए।  2 – CNT 1908, Pesa act 1996, Land Acquisition act 2013 में निहित प्रावधानों का खुला उल्लंघन कर क्रिस्टल मेटफम प्राइवेट लिमिटेड कंपनी स्थापित हो रही है। इसलिए उच्च स्तरीय जांच कर प्रस्तावित योजना को पूर्ण तरीके से रद्द किया जाए।

जारियाडीह ग्राम सभा के कोषाध्यक्ष विश्वदेव हांसदा ने बताया कि चांडिल अंचल के तहत मौजा जारियाडीह का खाता संख्या 79 का प्लॉट सं 538, 493, 568, 570, 565, 482, 538, 567 कुल 4.71 एकड़ भूमि पांचवीं अनुसूची भूमि के तहत आती है। साथ ही इसको ग्राम सभा क्षेत्राधिकार सामुदायिक भूमि (अनावाद झारखंड सरकार भूमि) का दर्जा हासिल है। उसमें कंपनी को अवैध रूप से स्थापित किया जा रहा है। कम्पनी स्थापना से पूर्व ना ग्राम सभा से अनुमति ली गयी है, ना जन सुनवाई हुई है और ना ही ग्राम सभा की बैठक का आयोजन किया गया है। वहीं फर्जी ग्राम सभा को आधार बनाकर कंपनी को स्थापित किया गया है, जो कानून का उल्लंघन है तथा समुदाय विशेष की धार्मिक आस्था को ठेस पहुंचाने की घृणित कोशिश है, साथ ही प्रकृति के बड़े बड़े पेड़ पौधों को काटकर जबरन ग्राम सभा क्षेत्राधिकार सामुदायिक भूमि एवं भोले-भाले आदिवासी की रैयती जमीन को क्रिस्टल मेटफम प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के नाम से पंजी-2 में चढ़ाया गया है, जो असंवैधानिक है।

झारखंड गांव गणराज परिषद के अध्यक्ष कुमार चंद्र मार्डी ने कहा कि आदिवासियों की जमीन के साथ-साथ सरकारी जमीन की लूट हो रही है। इस पर अविलंब रोक लगाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि बिना ग्रामसभा के कोई भी सरकारी या गैरसरकारी काम नहीं हो सकता है। सीएनटी जमीन की खरीद बिक्री के लिए पेसा एक्ट के तहत कई नियम हैं, उन नियमों की अनदेखी की गई है। नियमों का उल्लंघन कर सीएनटी जमीन पर अतिक्रमण करने में अधिकारियों व नेताओं की अहम भूमिका है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जिस तरह से आदिवासियों की जमीन लूट हो रही है, इसमें सभी राजनीतिक दलों के नेता शामिल हैं।

संयुक्त ग्राम सभा मंच के संयोजक अनूप महतो ने कहा कि वर्तमान समय में चारों ओर जमीन से जुड़ा हुआ मामला सामने आ रहा है, इसमें कहीं न कहीं आदिवासियों की परंपरा और संस्कृति पर प्रहार हो रहा है। जो जिम्मेदार अधिकारी हैं, वह दायित्व निर्वहन की बजाय अपने ऑफिस में बैठकर कुर्सी तोड़ रहे हैं। अनूप महतो ने जारियाडीह में हो रहे कंपनी निर्माण कार्य पर अविलंब रोक लगाते हुए पूरे मामले की जांच करने की मांग की है। आगे महतो ने कहा कि खाता संख्या 79 का आदिवासी की भूमि, समता जजमेंट 1997, वेदांत जजमेंट 2013, पेसा कानून 1996, छोटानागपुर काश्तकारी अधिनियम 1908 में निहित प्रावधानों का खुला उल्लंघन कर कंपनी के दलाल एवं सरकारी अधिकारियों की मिलीभगत से अधिक्रमित किया गया है, ऐसे में ग्राम सभा क्षेत्राधिकार सामुदायिक भूमि पांचवीं अनुसूची भूमि को यथाशीघ्र खाली नहीं करने पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के नाम पर कानूनी कार्रवाई के लिए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के तहत मामला दर्ज करने के लिए ग्रामसभा जारियाडीह एवं संयुक्त ग्राम सभा मंच विवश होगी।

बताते चलें कि इस मनमानेपन के खिलाफ आंदोलन चल ही रहा था। इस बीच संथाल आदिवासी समुदाय द्वारा जहां धान रोपाई से पहले अपने देवता एरोञ बैंगा की पूजा की जाती है। हर साल की तरह इस साल भी जारियाडीह के ग्रामीण 16 जून 2021 को उक्त खास जमीन पर पूजा करने पहुंचे, किंतु कंपनी के गुंडों द्वारा ग्रामीणों को पूजा स्थल पर जाने से रोक दिया गया। नतीजतन कंपनी और ग्रामीणों के बीच झड़प हो गई। इसके बाद मांझी बाबा सुरेश हंसदा के साथ 9 ग्रामीणों के ऊपर 107 एवं 116 का मुकदमा दर्ज किया गया। ग्रामीणों ने इसके बाद एक के बाद एक ग्राम सभा की बैठक बुलाना शुरू किया, जिसमें बुद्धिजीवी, आंदोलनकारी, जन संगठन के प्रतिनिधियों को आमंत्रित किया गया और उनसे सलाह मशविरा लिया गया। उनके सहयोग से रणनीति तैयार की गयी।

ज्ञातव्य हो कि पिछली 29 जुलाई 2020 को अंचल सह प्रखंड कार्यालय चांडिल के समक्ष भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013, पेसा अधिनियम 1996, सीएनटी एक्ट 1908 का उल्लंघन कर क्रिस्टल मेटफॉम प्राइवेट लिमिटेड कंपनी को आवंटित लीज और पूर्ण योजना रद्द करने की मांग पर धरना प्रदर्शन किया गया था, जिसमें सैकड़ों की तादाद में ग्रामीण उपस्थित थे एवं कोल्हान स्तर के कई बड़े जन संगठनों के प्रतिनिधि, बुद्धिजीवी, आंदोलनकारी भी उपस्थित रहे। धरना प्रदर्शन के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नाम अंचलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंपा गया। पिछले 09 जुलाई 2020 को सरायकेला जिला उपायुक्त अरवा राजकमल ने पूरे मामले की जांच रिपोर्ट चांडिल एसडीओ से मांगी थी। जिसको लेकर 14 जुलाई को चांडिल अनुमंडल पदाधिकारी के निर्देश पर अंचल कार्यालय की ओर से विवादित जमीन की नापी सीआई की उपस्थिति में की गई।

जिसके सीमांकन का विवरण इस प्रकार है –

खाता सं 79 का प्लॉट जहां कंपनी द्वारा —

(1) 570 में समतलीकरण हुआ एवं ईंट, गिट्टी इकट्ठा है।

(2) 493 में सम्पूर्ण कम्पनी स्थापित है।

(3) 482 में समतलीकरण, मकान निर्माण एवं गेट की दीवार बनी हुई है।

(4) 578 में समतलीकरण और ट्रैंच काटा गया है।

(5) 567 में चहारदीवारी निर्माण, शेड निर्माण, ड्रेन निर्माण है।

(6) 565 में समतलीकरण और चहारदीवारी निर्माण है।

(7) 538 में पूर्ण अतिक्रमण है।

(8) 568 में शेड निर्माण, चहारदीवारी निर्माण, डीप बोरिंग खोदा गया है।

(झारखंड से वरिष्ठ पत्रकार विशद कुमार की रिपोर्ट।)

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