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कांग्रेस और माले ने की अलग-अलग मुद्दों पर केजरीवाल सरकार की घेरेबंदी

नई दिल्ली। विपक्षी दलों ने दिल्ली की केजरीवाल सरकार की घेरेबंदी शुरू कर दी है। इस लिहाज से कांग्रेस ने सरकार पर जमकर हमला बोला है। उसने कहा है कि पिछले एक साल में सरकार हर मोर्चे पर नाकाम साबित हुई है। जबकि दूसरी तरफ सीपीआई एमएल ने आप पर सांप्रदायिक रंग में रंगने का आरोप लगाया है। पार्टी ने कहा है कि रिंकू शर्मा मामले में आप की असलियत सामने आ गयी है। और वह वीएचपी और बजरंग दल से भी आगे बढ़कर सांप्रदायिक जहर उगल रही है।

अरविन्द केजरीवाल सरकार के तीसरे कार्यकाल का एक वर्ष पूरा होने पर एक ओर जहां करोड़ों रुपये विज्ञापन में खर्च करके केजरीवाल सरकार अपनी ब्रांडिंग करने में जुटी है वहीं दूसरी ओर कल दिल्ली कांग्रेस ने प्रदेश कार्यालय में प्रेस वार्ता व ट्विटर कैम्पेन चलाकर केजरीवाल सरकर- के 6 साल के शासन को बर्बादी के 6 साल बताया है। प्रेस कांफ्रेंस में दिल्ली प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने अरविन्द सरकार की विफलताओं को गिनाया। प्रदेश कार्यालय राजीव भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन को दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री हारुन यूसूफ, डा. नरेन्द्र नाथ, प्रो. किरण वालिया, पूर्व विधायक आदर्श शास्त्री ने सम्बोधित किया एवं विधिक एवं मानव अधिकार विभाग के चैयरमेन एडवोकेट सुनील कुमार और परवेज आलम मौजूद थे।

दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री हारुन यूसूफ ने प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि “केजरीवाल सरकार का एक वर्ष का कार्यकाल ऐतिहासिक विफलता का काल रहा जो दिल्ली ही नहीं देश के इतिहास पर भी काला धब्बा है। अरविन्द केजरीवाल द्वारा कोविड-19 से पूरे साल लड़ने और कोविड महामारी पर दिल्ली मॉडल की बात करना पूरी बेमानी है क्योंकि केजरीवाल खुद कोविड के शुरुआती दौर में पूरे दो महीने तक दिल्ली की जनता को भगवान भरोसे छोड़कर अपने सरकारी बंगले में बंद थे। अरविन्द सरकार ने पूरे वर्ष न तो कोविड महामारी से लड़ने कोई काम नहीं किया और न दिल्ली के विकास, स्वास्थ्य, शिक्षा और इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए कुछ किया।”

हारुन यूसूफ ने खाद्य सुरक्षा कार्यक्रम में केजरीवाल सरकार द्वारा कटौती का आरोप लगाते हुए कहा कि “अक्तूबर 2013 में दिल्ली की कांग्रेस सरकार ने खाद्य सुरक्षा कानून लागू किया था जिसके तहत दिल्ली में 30 लाख परिवारों को राशन मुहैया कराया जाता था। वहीं आज बढ़ती आबादी के साथ आप पार्टी की दिल्ली सरकार ने राशन आधा करके गरीबों, मजदूरां को खाद्य सुरक्षा कानून के दायरे से बाहर करके भुखमरी की ओर धकेल रही है। पिछले 6 वर्षों में 11.49 लाख परिवारों के नए राशन कार्ड बनाने के आवेदन किए वो लम्बित पड़े है।”

वहीं डॉ. नरेन्द्र नाथ ने अरविंद केजरीवाल सरकार की स्वास्थ्य सेवाओं पर असंवेदनशीलता बरतने का आरोप लगाते हुए कहा है कि “अरविन्द केजरीवाल सरकार की स्वास्थ्य के प्रति असंवेदनशीलता इसी बात से जाहिर हो जाती है कि 2015-2020 के पांच वर्षों के कार्यकाल में 5259 करोड़ आवंटित बजट इस्तेमाल नही कर पाई।”

उन्होंने आगे कहा कि “घोषणा पत्र में सरकारी अस्पतालों में 30,000 नए बेड जोड़ने की बात कही परंतु पिछले 5 वर्षों में 776 बेड ही जोड़े गए जबकि प्राइवेट अस्पतालों में 7326 नए बेड जुडे़। अरविन्द सरकार के कार्यकाल में एक भी नया अस्पताल नहीं बनाया गया। जबकि कांग्रेस की शीला सरकार के कार्यकाल में निर्माण कार्य शुरु हुए अम्बेडकर नगर और बुराड़ी के अस्पतालों जिनकी 600 और 748 बेड की है इनको शुरु करके सिर्फ अम्बेडकर नगर में 200 बेड और बुराड़ी में 320 बेड की ही शुरुआत की गई और द्वारका के 1241 बेड की क्षमता वाले इंदिरा गांधी अस्पताल की शुरुआत अभी तक नही की गई है।”

कोविड-19 महामारी से निपटने के केजरीवाल फॉर्मूले पर सवाल खड़े करते हुए डॉ नरेन्द्र नाथ कहा कि -” कोविड महामारी पर दूसरे राज्यों के लिए दिल्ली मॉडल की बात करने वाले अरविन्द केजरीवाल ने कांग्रेस पार्टी द्वारा लगातार दबाव डालने पर दिल्लीवासियों के लिए कोविड टेस्ट की संख्या बढ़ाई। कोविड के दौरान दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिक पूरी तरह विफल साबित हुए, सिर्फ 6 मोहल्ला क्लीनिकों को टेस्टिंग सेन्टर बनाया गया। “

डॉ. नरेन्द्र नाथ ने आगे कहा कि ” दिल्ली के अस्पतालों में 31 प्रतिशत डाक्टरों की कमी और 21 प्रतिशत नर्सों एवं पैरामेडिकल स्टॉफ की कमी है। दिल्ली सरकार के अस्पतालों की हालत यह है कि कोविड महामारी के दौरान चौथे और पांचवें वर्ष के एमबीबीएस छात्रों से अस्पतालों में सहायक डाक्टर के तौर पर सेवा ली जा रही है।”

वहीं डॉ किरण वालिया ने केजरीवाल की शिक्षा नीति पर बोलते हुए कहा -” आम आदमी पार्टी दूसरे राज्यों में चुनाव की तैयारी के लिए दिल्ली सरकार के शिक्षा मॉडल की बात करने वाले शायद यह नहीं जानते कि दिल्ली का शिक्षा मॉडल बहस की चुनौती तो देते हैं परंतु कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में शिक्षा के मुद्दे पर तुलना करने से भागते हैं। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के कार्यकाल में 1.25 लाख छात्रों ने सरकारी स्कूल छोड़ा जबकि निजी स्कूलों में 2.19 लाख छात्रों की बढ़ोत्तरी हुई है। कोविड महामारी के दौरान 1.66 लाख छात्र दिल्ली सरकार और निगम स्कूलों के छात्रा लापता हैं।”

दूसरी तरफ सीपीआई एमएल ने रिंकू शर्मा हत्याकांड के मुद्दे को उठाया। गौरतलब है कि 10 फरवरी को दिल्ली के मंगोलपुरी इलाके में रिंकू शर्मा की दुर्भाग्यपूर्ण हत्या हुई। इस मामले में दिल्ली पुलिस ने पांच नौजवानों – ज़ाहिद, माहताब, नसीरुद्दीन, इस्लाम और ताजुद्दीन को गिरफ्तार किया है। आउटर दिल्ली के डीसीपी आधिकारिक तौर पर कह चुके हैं कि हत्या के इस मामले का कोई साम्प्रदायिक कारण नहीं है। रिंकू शर्मा की हत्या व्यापार में हुए विवाद का नतीजा थी।

पार्टी के राज्य सचिव रवि राय का कहना है कि यह वक्‍त पीड़ित परिवार के ग़म में शामिल होने और कानूनी तौर पर न्‍याय की मांग करने का है लेकिन स्थानीय विहिप और बजरंग दल ने इसे साम्प्रदायिक जिहाद का रंग देकर नफरत फैलाने का घिनौना काम शुरु कर दिया है। आरोपितों का मुस्लिम होना ही विहिप की घृणा की राजनीति के लिए काफी है। वे इसकी आड़ में मंगोलपुरी में साम्प्रदायिक वैमनस्य फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। अखबारों की रिपोर्ट और दिल्ली पुलिस के आला अधिकारियों के बयानों से साफ है कि रिंकू शर्मा की हत्या बिजनेस के सिलसिले में हुए विवाद का नतीजा है। रिंकू शर्मा और हत्या के आरोपित एक दूसरे को बहुत अर्से से जानते थे और उनके आपस में अच्‍छे संबंध थे। लेकिन हालात को साम्प्रदायिक रंग देने पर आमादा विहिप इस झूठ को हवा दे रही है कि रिंकू शर्मा को इसलिए मारा गया क्योंकि उसने ”जय श्री राम” का नारा लगाया था।

उन्होंने कहा कि बहुत ही शर्मनाक है कि आम आदमी पार्टी विहिप की हिंसा और नफरत फैलाने की कोशिशों का पुरजोर जवाब देने की जगह खुद ही विहिप वाली भाषा बोल रही है। आप के प्रवक्ता राघव चड्ढा ने प्रेस कॉन्‍फ्रेंस में विहिप के झूठे दावे को ही दोहरा दिया कि रिंकू शर्मा को इसलिए मारा गया क्योंकि वो ”जय श्री राम” का नारा लगा रहा था। फिर कहा कि गृह मंत्री अमित शाह के अंदर आने वाली दिल्ली पुलिस के चलते हिंदू भी सुरक्षित नहीं हैं। लोगों से शांति और सद्भावना का माहौल बनाने की अपील करने की जगह ये भी विहिप के नफरती अभियान का ही हिस्सा बन गए हैं। दिल्ली सरकार के तौर पर आम आदमी पार्टी ने हालात को शांत करने की जिम्मेदारी से मुंह मोड़ लिया है और अब वो अपने प्रतिद्वंदी भाजपा के साम्प्रदायिक एजेंडे पर ही उससे मुकाबला कर रही है। विहिप ने मंगोलपुरी में एक जनसभा का आयोजन भी किया। वहां वक्ताओं ने बार-बार भड़काऊ भाषण दिए और साम्प्रदायिक जहर उगला। इस जनसभा में ज्यादातर इलाके से बाहर के लोगों ने शिरकत की। उन्हें उत्‍तर प्रदेश, राजस्थान और नजदीकी राज्यों से हिंसा भड़काने के मकसद से लाया गया था। इसके अलावा फरवरी 2020 के दंगों में अहम भूमिका निभाने और नफरत फैलाने में माहिर कपिल मिश्रा तथा आतंक-आरोपी सांसद प्रज्ञा ठाकुर भी मंगोलपुरी गए हे ओर वहां भड़काऊ बयान भी दिए है।

राज्य सचिव ने कहा कि एक तरफ दिल्ली पुलिस ये कह रही है कि ये हत्या बिजनेस डील खराब होने की वजह से हुई है, और दूसरी तरफ वही पुलिस मंगोलपुरी में विहिप के साम्प्रदायिक तनाव भड़काने की कोशिशों और आरोपितों के परिवारों को धमकाने की कोशिशों को चुपचाप देख रही है। दिल्ली पुलिस ने मंगोलपुरी में विहिप को जनसभा आयोजित करने की इजाज़त भी दे दी जबकि इसका मकसद भी इलाके में रहने वाले मुस्लिमों के खिलाफ हिंसा भड़काना ही था।

क्राइम ब्रांच ने इस जांच को अपने हाथों में ले लिया है और अब अपना सुर भी बदल लिया है। वे कह रहे हैं कि वे इस हत्या की जांच ”हर एंगल से करेंगे”। ऊपर के आदेश और दक्षिणपंथी गिरोहों के दबाव के चलते पुलिस के बयानों में साफ बदलाव दिखाई पड़ रहा है।

भाकपा माले समेत वामपंथी पार्टियों व अन्‍य धर्म निरपेक्ष पार्टियों के नेताओं और इलाके के सम्मानित नागरिकों ने इलाके के एसएचओ, एसीपी और डीसीपी से मुलाकात की और इस बात पर जोर दिया कि इस हत्या की जांच बिल्कुल स्वतंत्र और निरपेक्ष हो और दोषियों को सजा मिले। पुलिस से ये भी कहा गया कि विहिप जैसे संगठनों को इलाके में हिंसा भड़काने की इजाज़त हरगिज नहीं दी जानी चाहिए। हत्या को साम्प्रदायिक रंग देने की साजिशों को रोकना और इलाके के बाहर से लोगों को लाकर यहां हिंसा भड़काने की कोशिशों को असफल करने की जिम्‍मेदारी पुलिस की है।

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This post was last modified on February 17, 2021 7:33 pm

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