Tuesday, December 7, 2021

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बाराबंकी: पुलिस कप्तान की पत्नी की डॉक्टरी लापरवाही से मौत पर मुआवजा

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राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के न्यायिक सदस्य राजेन्‍द्र सिंह की अदालत ने बाराबंकी के तत्‍कालीन पुलिस कप्‍तान विजय कुमार मौर्या की पत्‍नी राधिका की चिकित्सकीय लापरवाही से मौत के मामले में , कृष्‍णा नर्सिंग सेन्‍टर और डा० चन्‍द्रावती के ऊपर राज्‍य आयोग द्वारा लगाये गये हर्जाना 3,25,000/-रुपये, वाद व्‍यय 2000/-रुपये और दिनांक 05-फरवरी 1999 से 2 प्रतिशत वार्षिक ब्‍याज के फैसले को बरकरार रखा और अपील खारिज कर दी।

फैसले में कहा गया कि डा. चन्‍द्रावती जो तत्‍कालीन समय में क्‍वीनमेरी हास्पि‍टल में कार्यरत हैं, ने अपने प्राइवेट नर्सिंग होम में एक महिला मरीज श्रीमती राधिका का आपरेशन दिनांक 16 जुलाई,1995 को किया था। आपरेशन करके वह वहां से निकल गयीं और उनके निकल जाने के बाद उनके नर्सिंग होम में शोर-शराबा होने लगा और मालूम हुआ कि मरीज राधिका की हालत बहुत खराब हो गयी है। अफरा-तफरी में डॉ. चन्‍द्रावती लौटीं लेकिन वह मरीज को संभाल नहीं सकीं और ऑपरेशन होने के बाद मरीज की हालत इतनी बिगड़ गयी कि उसके शरीर पर नीले धब्‍बे पड़ गये तथा नाड़ी की गति 40 तक हो गयी। मरीज को तत्काल वेंटिलेटर पर रखा गया किन्‍तु उसे बचाया नहीं जा सका और 8.45 बजे उनका देहान्‍त हो गया।

डॉ. चन्‍द्रावती को चिकित्‍सीय उपेक्षा अथवा लापरवाही का दोषी पाया गया और फैसले में कहा गया कि डॉ. चन्‍द्रावती को मौके पर रहना चाहिए था जब तक कि मरीज को आईसीयू या वार्ड में स्‍थानान्‍तरित न कर दिया जाए। मरीज जनपद बाराबंकी के तत्‍कालीन पुलिस कप्‍तान विजय कुमार मौर्या की पत्‍नी राधिका थीं जिनकी मृत्‍यु के पश्‍चात जिला फोरम लखनऊ में दावा दायर किया गया था।

इंडिगो एयरलाइंस पर 35लाख का जुर्माना

इसके पहले राज्य उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग के न्यायिक सदस्य राजेंद्र सिंह कि अदालत ने 2013 के शिकायत मामले संख्या 203, विनय शंकर तिवारी बनाम इंडिगो एयरलाइंस और अन्य में, एयर कैरियर इंडिगो एयरलाइंस को सेवा में कमी और एक व्यक्ति को अनुचित व्यापार व्यवहार के लिए दोषी और जिम्मेदार ठहराया और इंडिगो को मुआवजे के रूप में 35 लाख रुपये, मानसिक पीड़ा और उत्पीड़न के लिए 50 लाख रुपये और ब्याज के साथ 50000.00 रुपये प्रति वर्ष ब्याज के रूप में भुगतान करने का निर्देश दिया।

इस मामले में 15अप्रैल 2013 को विनय शंकर तिवारी ने तत्काल बैठक के लिए लखनऊ से दिल्ली का टिकट क्लियरट्रिप द्वारा बुक कराया गया। उनका पीएनआर नंबर इंडिगो की उड़ान संख्या 6ई-141 का ईआरबीवीएलएस था। प्रस्थान समय सुबह 10.50 बजे विनय शंकर तिवारी अमौसी हवाई अड्डे पर पहुंचे, उड़ान में चेक किया और अपनी आवंटित सीट संख्या 5 ए पर बैठे। उड़ान से ठीक पहले, इंडिगो के केबिन क्रू ने बेरहमी से उन्हें सूचित किया कि उनका टिकट रद्द कर दिया गया है और उन्होंने उन्हें अमौसी हवाई अड्डे पर उड़ान से जबरदस्ती जहाज से बाहर कर दिया। विनय शंकर तिवारी ने क्लियरट्रिप से पूछताछ की कि किसने बताया कि उनकी तरफ से टिकट रद्द नहीं होता है। इंडिगो से पूछताछ की तो बताया गया कि सुबह 7.38 बजे किसी मिस्टर शैलेंद्र ने टिकट कैंसिल कर दिया है। विनय शंकर तिवारी ने उन्हें बताया कि उन्होंने टिकट रद्द नहीं किया।

फैसले में कहा गया कि यदि यह माना जाता है कि टिकट सुबह 7.38 बजे रद्द कर दिया गया था, तो उन्होंने विनय शंकर तिवारी को उड़ान में चेक करने की अनुमति क्यों दी। इंडिगो एयरलाइंस ने विनय शंकर तिवारी को न तो उक्त व्यक्ति का मोबाइल नंबर दिया और न ही किसी संदेश का स्क्रीन शॉट। पूरी परिस्थितियों को देखने के बाद, राज्य आयोग इस निष्कर्ष पर पहुंचा कि इंडिगो एयरलाइंस की सेवा में कमी है और राष्ट्रीय फ्रेम के एक ठेकेदार के साथ अनुचित व्यापार व्यवहार भी है, जो दिल्ली में एक तत्काल बैठक में भाग लेने के लिए जा रहा था और फिर उसे कुल मुआवजा@ 10% ब्याज के साथ रु.85,50,000.00 दिया गया।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल इलाहाबाद में रहते हैं।)

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