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अवमानना मामलाः कुणाल कामरा और रचिता तनेजा को सुप्रीम कोर्ट ने जारी किया नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने कार्टूनिस्ट रचिता तनेजा और हास्य कलाकार कुणाल कामरा के खिलाफ आपत्तिजनक ट्वीट के कारण आपराधिक अवमानना कार्यवाही शुरू करने के लिए दायर याचिका पर आज सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने कुणाल कामरा और रचिता तनेजा को कारण बताओ नोटिस जारी किया है। जस्टिस अशोक भूषण की पीठ ने इस तथ्य का संज्ञान में लिया कि तनेजा के खिलाफ कानून के छात्र आदित्य कश्यप की याचिका को अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने अपनी मंजूरी दी है।

जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने कानून के छात्र आदित्य कश्यप द्वारा दायर याचिका पर नोटिस जारी किया है, जिसमें न्यायपालिका के बारे में सोशल मीडिया हैंडल ‘सेनेटरी पैनल्स’ में प्रकाशित करने के खिलाफ आपराधिक अवमानना कार्रवाई की मांग की गई है। नोटिस का छह सप्ताह में जवाब देना है। पीठ ने तनेजा को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दी है। पीठ ने कहा कि अटॉर्नी जनरल ने अवमानना कार्रवाई शुरू करने के लिए सहमति दी है।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता पीएस नरसिम्हा ने शीर्ष अदालत को बताया कि रचिता के ट्वीट में मामले के गुण-दोष पर अंशमात्र भी चर्चा नहीं की गई, बल्कि न्यायालय की कार्यवाही को सनसनीखेज बनाया गया। अधिवक्ता ने कहा कि हमारे पास अटॉर्नी जनरल की स्पष्ट राय है कि यहां अवमानना का मामला बनता है। उन्होंने कहा कि अटॉर्नी जनरल की राय है कि न्यायपालिका के प्रति लोगों के भरोसे को खत्म करने के मकसद से इस तरह के ट्वीट किए गए।

नरसिम्हा ने कहा कि इस देश ने हमेशा किसी भी तरह की निष्पक्ष और उचित चर्चा की अनुमति दी है, भले ही यह न्यायाधीशों के लिए हतोत्साहित करने की हद तक हो। वास्तव में कोई फर्क नहीं पड़ता, जब तक कि एक संवाद होता है, जहां कोई भी निर्णय को लागू कर सकता है, जिसमें अदालत ने गलत तरीके से फैसला किया, लेकिन आप वास्तव में इसका स्वागत करेंगे। इनमें से किसी भी ट्वीट में आपको भारत के उच्चतम न्यायालय द्वारा लिए गए निर्णय की खूबियों या अवगुणों के बारे में चर्चा की एक टिप्पणी नहीं मिलेगी।

इसी तरह जस्टिस अशोक भूषण, जस्टिस आर सुभाष रेड्डी और जस्टिस एमआर शाह की पीठ ने अभ्युदय मिश्रा, स्कंद बाजपेयी और श्रीरंग कातनेश्वरकर की सुप्रीम कोर्ट और न्यायाधीशों के बारे में किए गए ट्वीट के लिए आपराधिक अवमानना कार्रवाई की मांग करने वाली याचिकाओं पर स्टैंडअप कॉमेडियन कुणाल कामरा को नोटिस जारी किया। नोटिस का 6 सप्ताह के भीतर जवाब देना है। पीठ ने कामरा को व्यक्तिगत उपस्थिति से छूट दे दी है।

कामरा के मामले में पीठ ने याचिकाकर्ता की ओर से पेश अधिवक्ता निशांत आर कटनेश्वर्कर ने दावा किया कि कुणाल कामरा ने न्यायपालिका के लिए अपमानजनक ट्वीट किए हैं। उन्होंने कहा, “ये सभी ट्वीट अपमानजनक हैं और हमने इस मामले में अटॉर्नी जनरल से सहमति मांगी थी।”

कटनेश्वर्कर ने अटॉर्नी जनरल के वेणुगोपाल का पत्र अदालत में पढ़ा, जिसमें कामरा के खिलाफ आपराधिक अवमानना की कार्यवाही शुरू करने को लेकर सहमति दी गई है। इस पर पीठ ने वकील से कहा कि वह हास्य कलाकार के कथित अवमानना करने वाले ट्वीट यहां नहीं पढ़ें, क्योंकि न्यायालय पहले ही वेणुगोपाल का पत्र देख चुका है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं। वह इलाहाबाद में रहते हैं।)

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This post was last modified on December 18, 2020 1:12 pm

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