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यूपी: कोरोना मरीजों को नहीं मिल रहे अस्पताल, मुख्यमंत्री राम मंदिर निर्माण में व्यस्त

‘नो टेस्ट नो कोरोना’ पॉलिसी के बावजूद उत्तर प्रदेश में कोरोना संक्रमितों की संख्या 64 हजार हो गई है। सड़क, स्कूल, बिजली, अस्पताल जैसे विकास को शहर से गांवों में पहुँचने में सदियों लगते हों पर सर्वव्यापी कोविड-19 कुछ ही महीने में उत्तर प्रदेश के शहरों से गाँव तक पहुँच गया है। कोरोना पीड़ित जनता अस्पताल अस्पताल चीख रही है, पीड़ितों को बेड नहीं होने का हवाला देकर लौटा दिया जा रहा है। मरीज अस्पताल के बाहर 17 घंटे एंबुलेंस में पड़े-पड़े मर रहे हैं और मुख्यमंत्री राम मंदिर नींव पूजन की तैयारी में जुटे हैं। इस देश में अब सब कुछ राम भरोसे है।

हटाए गए लखनऊ सीएमओ

राजधानी लखनऊ में कोरोना से बिगड़ते हालात की तस्वीरें मीडिया में आने के बाद लखनऊ के सीएमओ डॉ नरेंद्र अग्रवाल को हटाकर डॉ राजेंद्र सिंह को लखनऊ का नया सीएमओ नियुक्त करके राज्य की योगी सरकार ने अपने कर्तव्यों की इति श्री कर ली है। डॉ राजेंद्र सिंह, नरेंद्र अग्रवाल को लोकबंधु अस्पताल भेज दिया गया है।

इस तरह की कार्रवाई (शतरंज की मोहरों की तरह अफसर बदल देना) से आपको लगेगा सरकार काम कर रही है पर हालत ज्यों के त्यों रहने वाले हैं। क्योंकि सीएमओ उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल ही कर सकता है नए संसाधन नहीं पैदा कर सकता, ये करना सरकार का काम है।

इस मसले को कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने सरकार को एक पत्र लिखकर उठाया है। उन्होंने अपने पत्र में सरकार पर कई सवाल उठाते हुए मुख्यमंत्री की अपनी जिम्मेदारी सुनिश्चित करने और ज़रूरी कदम उठाने के लिए सुझाव भी दिये हैं।

प्रचार और न्यूज मैनेज करके ये लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती है

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ को राज्य में कोरोना वायरस से मरीजों की बढ़ती संख्या पर चिट्ठी लिखकर प्रदेश में बढ़ते कोरोना मामलों पर चिंता जाहिर करते हुए कुछ ज़रूरी सुझाव दिए हैं। प्रियंका गाँधी ने कहा है कि महोदय स्थितियां गंभीर होती जा रही हैं। आपसे आग्रह करती हूँ कि सिर्फ़ प्रचार और न्यूज मैनेज करके ये लड़ाई नहीं लड़ी जा सकती है। दो पन्नों की चिट्ठी में उन्होंने लिखा है कि राज्य में कल 2500 मामले सामने आए हैं। नए मरीजों की संख्या में बाढ़ सी आई है। महानगरों के अलावा गांव भी इससे अछूते नहीं है। चिट्ठी के बिंदुवार सुझाव यूँ हैं-

  1. आपकी सरकार ने ‘नो टेस्ट= नो कोरोना’ को मंत्र मानकर लो टेस्टिंग की पॉलिसी अपना रखी है। अब एकदम से कोरोना मामले के विस्फोटक की स्थिति है। जब तक पारदर्शी तरीके से टेस्ट नहीं बढ़ाए जाएंगे तब तक लड़ाई अधूरी रहेगी व स्थिति और भयावह हो सकती है।
  2. यूपी में क्वारंटीन सेंटर और अस्पतालों की स्थिति बड़ी दयनीय है।कई जगह की स्थिति इतनी खराब है कि लोग कोरोना से नहीं अपितु सरकार की व्यवस्था से डर रहे हैं। इसी कारण लोग टेस्ट के लिए सामने नहीं आ रहे हैं। ये सरकार की बड़ी विफलता है।
  3. कोरोना का डर दिखाकर पूरे तंत्र में भ्रष्टाचार भी पनप रही है। जिस पर अगर समय रहते लगाम न कसी गई तो कोरोना की लड़ाई विपदा में बदल जाएगी।
  4. आपकी सरकार ने दावा किया था कि 1.5 लाख बेड की व्यवस्था है लेकिन लगभग 20 हजार संक्रमित केस आने पर ही बेडों को लेकर मारामारी मच गई है।
  5. अगर अस्पतालों के सामने भयंकर भीड़ है तो मैं यह नहीं समझ पा रही हूँ कि यूपी सरकार महाराष्ट्र और दिल्ली की तरह अस्थाई अस्पताल क्यों नहीं बनवा रही है। चिकित्सीय सुविधा पाना हर नागरिक का मौलिक अधिकार है।
  6. प्रधानमंत्री बनारस के सांसद हैं और रक्षामंत्री लखनऊ के। अन्य भी कई केंद्रीय मंत्री उत्तर प्रदेश से हैं। आखिर बनारस, लखनऊ, आगरा आदि में अस्थाई अस्पताल क्यों नहीं खोले जा सकते?
  7. डीआरडीओ, सेना और पैरामिलिट्री द्वारा अस्थाई अस्पतालों का संचालन किया जा सकता है। या आवश्यकता हो तो डीआरडीओ के अस्पताल को लखनऊ लाया जा सकता है। साथ ही दिल्ली में स्थापित केंद्रीय सुविधाओं का प्रयोग सीमावर्ती जिलों के लिए भी किया जा सकता है। वहाँ के अस्पतालों का अधिकतम उपयोग अभी नहीं हो पा रहा है।
  8. होम आइसोलेशन एक अच्छा कदम है परंतु इसे भी आनन-फानन में आधा-अधूरा लागू नहीं किया जाए। इसे लागू करते वक़्त निम्न बिंदुओं पर सुचिंतित निर्णय किए जाएँ-
  1. मरीजों की मॉनिटरिंग और सर्विलांस की क्या व्यवस्था होगी?
  2. हालत बिगड़ने पर किसे सूचना देनी होगी?
  3. होम आइसोलेशन में चिकित्सीय सुविधाओं का खर्च क्या होगा?
  4. मरीजों के टेंपरेचर और ऑक्सीजन लेवल चेक करने की क्या व्यवस्था होगी?

यूपी सरकार का पूरा फोकस मंदिर निर्माण पर

मौजूदा सरकार कोरोना संकट के खिलाफ़ न सिर्फ़ अपनी जिम्मेदारी और जवाबदेही से लगातार भागती रही है बल्कि न्यूज मैनेज करके लगातार कोरोना, और प्रवासी मजदूरों को रिवर्स माइग्रेशन, भुखमरी के मुद्दे को मीडिया की मदद से बड़ी ही आसानी से मुसलमान, चीन पाकिस्तान, विकास दुबे जैसे फैब्रिकेटेड मुद्दे पर शिफ्ट करती आई है। इस समय जब नए अस्पतालों के निर्माण की ज़्यादा ज़रूरत है उत्तर प्रदेश सरकार राम मंदिर और सांप्रदायिकता के अपने पेटेंट मुद्दे पर मीडिया से बल्लेबाजी करवा रही है। राज्य से लेकर केंद्र तक की सरकार कोरोना से लड़ाई में अपनी नाकामी को राम मंदिर निर्माण के पीछे छुपाने की कोशिश में लगे हुए हैं।

कोरोना काल में लापता प्रदेश बनता राज्य

22 जुलाई को अचानक से ख़बर के जरिए प्रशासन की लापरवाही सामने आई। जब ख़बर आई कि वाराणसी के बीस से अधिक कोरोना पॉजिटिव मरीज लापता हैं। इनकी ट्रेसिंग नहीं हो पा रही है। पिछले एक सप्ताह के दौरान इनकी जांच हुई है। पॉजिटिव रिपोर्ट आने के बाद इनसे संपर्क नहीं हो पा रहा है। टेस्ट के समय लिए गए किसी का मोबाइल नंबर गलत बता रहा है तो किसी का मोबाइल स्विच ऑफ है। कुछ लोगों का पता भी गलत दर्ज है। स्वास्थ्य विभाग ने इनकी तलाश के लिए पुलिस को सूची सौंपी है।

जो लोग भी सैंपलिंग के लिए आते हैं उनके नाम-पते के साथ मोबाइल नंबर दर्ज किए जाते हैं। रिपोर्ट पॉजिटिव आने पर उन्हीं नंबरों पर मरीज को संक्रमित होने की सूचना दी जाती है। लेकिन डेढ़ दर्जन से अधिक पॉजिटिव लोगों ने गलत मोबाइल नंबर दर्ज करा दिए हैं। अब 20 लोगों की कोविड-19 रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उन्हें ढूंढने में मुश्किल आ रही है। ऐसे लोगों से दूसरों के भी संक्रमित होने की आशंका है। इस बारे में सीएमओ डॉ. वी बी सिंह का कहना है कि संबंधित थानों को सूची दी गई है। पुलिस की मदद से उन्हें ढूंढा जा रहा है।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on July 26, 2020 5:16 pm

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