Sunday, December 5, 2021

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माले एमएलए महबूब आलम ने आपदा प्रबंधन के सचिव को सौंपा पत्र, कहा-सभी मजदूरों की वापसी की गारंटी करे सरकार

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पटना। भाकपा (माले) विधायक दल के नेता महबूब आलम ने आज पार्टी के तीनों विधायकों का हस्ताक्षरित ज्ञापन बिहार के आपदा प्रबंधन विभाग के प्रधान सचिव को सौंपा। बिहार के मुख्यमंत्री व आपदा प्रबंधन के सचिव के नाम से अलग-अलग सौंपे गए इस पत्र में सभी प्रवासी मजदूरों की सकुशल घर वापसी और क्वारंटाइन सेंटरों की हालत में सुधार की मांग की गई है। मुख्यमंत्री को दिए गए ज्ञापन में काम के घंटे न बढ़ाने का अनुरोध किया गया है और बिहार लौट चुके सभी प्रवासी मजदूरों के लिए तत्काल रोजगार व राहत उपलब्ध करवाने की मांग की।

ज्ञापन के प्रमुख बिन्दु:

1. लाॅकडाउन के उपरांत देश के विभिन्न हिस्सों से पैदल चल पड़े मजदूरों की असहनीय पीड़ा को लेकर उभरे आंदोलन के बाद सरकार ने प्रवासी मजदूरों के लिए ट्रेन चलाने पर सहमति दी। लेकिन अगले ही पल केंद्र की सरकार ने यह कहकर प्रवासी मजदूरों के साथ छलावा किया कि केवल लाॅकडाउन के कारण फंसे मजदूरों को ही घर वापसी की अनुमति मिलेगी, पहले से रह रहे मजदूरों को नहीं। रोजगार के हरेक साधन से वंचित हो चुके और भुखमरी के कगार पर पहुंच चुके मजदूरों को सरकार आखिर घर क्यों नहीं लौटने देना चाहती है। इसलिए, हमारी सबसे पहली मांग है कि जो भी प्रवासी मजदूर वापस लौटना चाहते हैं, उनके लौटने की व्यवस्था सरकार अपने खर्च पर करे। भेदभाव की नीति एकदम सही नहीं है।

2. प्रवासी मजदूरों को लाने के लिए सरकार ने जो तौर-तरीका अपनाया है, वह बेहद जटिल है, जिसकी वजह से बड़े पैमाने पर लोगों का वापस लौटना संभव ही नहीं होगा और अव्यवस्था बनी रहेगी जिससे कोरोना के भी संक्रमण की संभावना ज्यादा रहेगी। सर्टिफिकेट, रजिस्ट्रेशन, डाॅक्टर से दिखलवाना इतनी कठिन प्रक्रिया है कि लंबी-लंबी लाइनों में खड़े रहने के बावजूद लोग लौट नहीं पा रहे हैं और थक – हारकर लोग पैदल निकल पड़ रहे हैं। इसलिए हमारी मांग है कि रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया सरल की जाए। सरकार सर्वे करके इसका अंदाजा लगा सकती है कि किसी खास इलाके में कितने प्रवासी मजदूर हैं और उनके लिए कितनी ट्रेनों की जरूरत होगी। उन सभी लोगों की मेडिकल जांच भी एक साथ हो सकती है। स्टेशनों पर कई सेंटरों को स्थापित करके मजदूरों को भेजना आसान बनाया जा सकता है।

3. गाड़ियों की संख्या भी बढ़ाई जानी चाहिए। क्वारंटाइन के लिए सुरक्षित किए गए ट्रेनों को छोड़ने के बाद अब भी सरकार के पास 11 हजार से ज्यादा गाड़ियां हैं। यदि सरकार चाहे तो एक बार में डेढ़ करोड़ से ज्यादा लोगों को भेजा जा सकता है। इसलिए सभी प्रवासी मजदूरों को सकुशल घर तक पहुंचाने के लिए ये कदम उठाए जा सकते हैं। यह भी किया जा सकता है कि सभी ट्रेनों को पटना पहुंचाने की बजाए राज्य के अन्य केंद्रों पर भेजा जाए ताकि एक जगह अफरा तफरी न मचे।

4. यह देखा जा रहा है कि राजधानी ट्रेन से बाहर से आने वाले या संभ्रांत तबके के लोगों और प्रवासी मजदूरों के बीच सरकार भेदभाव कर रही है। बड़े लोगों की कोई जांच नहीं हो रही है, न ही उन्हें क्वारंटाइन किया जा रहा है, वे सीधे घर जा रहे हैं, लेकिन गरीब तबके के प्रवासी मजदूरों को क्वारंटाइन सेंटर में भेजा जा रहा है। इन क्वारंटाइन सेंटरों की संख्या बहुत सीमित है और वहां भारी कुव्यवस्था मौजूद है। जगह कम रहने की वजह से लोग रात में खेतों में रह रहे हैं, गांव के दबंग लोग उन्हें गांव में घुसने भी नहीं दे रहे। ऐसा माहौल चारों तरफ दिख रहा है। यदि संक्रमण रोकने की गारंटी करनी है तो प्रवासी मजदूरों का रैपिड टेस्ट करवाकर उन्हें घर भेजा जा सकता है। वहीं वे घर पर क्वारंटाइन रहें। जो लक्षण वाले हैं केवल उन्हीं के लिए अलग व्यवस्था करने की जरूरत है। इसलिए इस मामले में सरकार दूरदर्शी व वैज्ञानिक नीति अपनाए।

5. कार्यरत क्वारंटाइन सेंटर में जिस प्रकार से लोगों को भेड़-बकरियों की तरह ठूंस दिया गया है, वह न केवल अमानवीय है बल्कि उससे संक्रमण बढ़ने का खतरा अधिक बढ़ जाता है। यदि एक व्यक्ति भी कोरोना पाॅजिटिव पाया गया तो पूरे क्वारांटाइन सेंटर के लोगों को संक्रमित कर सकता है। इन सेंटरों की हालत जेल से बदतर बताई जा रही है। कम से कम तीन समय का नाश्ता – भोजन न मिलने या समय पर न मिलने या अधपका या खराब मिलने के कारण रोज सेंटर से हंगामा की खबरें आती रहती हैं।  महिलाओं के लिए शौचालय नहीं है। बच्चों को दूध नहीं मिल रहा है। शुगर जैसी गंभीर बीमारियों के शिकार लोगों को भी लगातार चावल खिलाया जा रहा है। सोने के लिए बिस्तर नहीं है।

मच्छरदानी या मच्छर भगाने वाले क्वायल के अभाव में लोग सो नहीं पाते। अन्य जरूरी संसाधनों की तो बात ही छोड़ दी जाए। यह मजदूरों के प्रति एक अमानवीय दृष्टिकोण का परिचायक है। जिस गांव में क्वारंटाइन सेंटर है उसमें दूसरे गांव के लोगों को रखा जाता है। प्रवासी मजदूरों को भावनात्मक सपोर्ट की भी जरूरत है। इसका भी खयाल रखा जाना चाहिए। अनेक कारणों से परिस्थिति और जटिल होती जा रही है। इसलिए हमारी मांग है कि क्वारंटाइन सेंटर में न्यूनतम सुविधाओं की गारंटीशुदा व्यवस्था की जाए और उन्हें उनके गांव के नजदीक वाले सेंटर में रखा जाए ताकि वे न सिर्फ अपनों के नजदीक रहें बल्कि जरूरत के समय उन्हें सहयोग भी मिल सके। साथ ही, क्वारंटाइन सेंटर में दी जाने वाली चीजों के मेनू या प्रति प्रवासी खर्च की घोषणा सरकार को करनी चाहिए।

6. वापस लौट आए प्रवासी मजदूरों के लिए योग्यता के अनुसार काम की व्यवस्था की जानी चाहिए और उन्हें अपना काम शुरू करने के लिए अनुदान सहित बिना ब्याज के ऋण की भी व्यवस्था करनी चाहिए। इसमें कई स्किल्ड लेबर हैं, वे अपने राज्य के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। राज्य सरकार ने इस प्रकार की बातें भी कही है।

7. यह बहुत चिंताजनक है कि उसने मजदूरों के लिए काम के घंटे 8 से बढ़ाकर 12 घंटे करने का भी फैसला कर लिया है। यह तो मजदूरों के साथ न केवल अन्याय है बल्कि लंबे संघर्ष के बाद हासिल उनके अधिकारों पर हमला है। श्रम कानूनों को खत्म करने के मतलब है मजदूरों के कोई भी अधिकार सुरक्षित नहीं रह जाएंगे और वे मालिकों के गुलाम हो जायेंगे। इसलिए हमारी मांग है कि काम के घंटे किसी भी कीमत पर नहीं बढ़ाए जाएं।

8. जल-जीवन-हरियाली योजना के नाम पर जो योजना चलाई जा रही है उसमें जेसीबी से काम करवाया जा रहा है। इस पर रोक लगाई जाए और काम मजदूरों से करवाया जाए। सरकार ने खुद मनरेगा में 200 दिन काम की सिफारिश की है। यह स्वागत योग्य है। लेकिन 200 दिन काम के साथ-साथ मनरेगा के काम में न्यूनतम 500 रुपये मजदूरी की गारंटी की जाए।

9. सभी प्रवासी मजदूरों को तत्काल राहत के लिए 10 हजार रुपया लाॅकडाउन भत्ता, 6 महीने का राशन, लॉक डाउन- अतिवृष्टि – ओला वृष्टि के कारण हुई क्षति के लिए किसानों को प्रति हेक्टेयर  25 हजार रुपये की दर से मुआवजा, सभी प्रकार के कर्जे की माफी, लाॅकडाउन के कारण मारे गए सभी मजदूर परिजनों को 20-20 लाख रुपये मुआवजे की राशि प्रदान की जाए।

10. इतनी कोशिश के बाद भी जिनके पास राशन कार्ड नहीं है, उनके साथ परेशानियां हो रही हैं। राशन कार्ड बनाने में धांधली भी शुरू हो गई है। इस पर रोक लगे और बिना कार्डधारियों को भी राशन उपलब्ध करवाने की गारंटी की जाए।

(प्रेस विज्ञप्ति पर आधारित।)

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