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Friday, September 24, 2021

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दलाई लामा से लेकर नगा नेता मुइवाह तक जासूसी सूची में शामिल, इज़रायल में भी जाँच

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पेगासस जासूसी प्रकरण में ‘द गार्डियन’ और ‘द वाशिंगटन पोस्ट’ प्रतिदिन नये-नये खुलासे कर रहा है। द गार्डियन के अनुसार तिब्बत के आध्यात्मिक नेता दलाई लामा के करीबी सलाहकारों का नाम पेगासस की संभावित सर्विलांस टारगेट लिस्ट में पाया गया है। बौद्ध धर्मगुरुओं के स्टाफ, कई तिब्बती अधिकारियों और एक्टिविस्ट का नाम भी लीक हुए डेटाबेस में पाया गया है। रिपोर्ट का कहना है कि इन सभी लोगों को 2017 के अंत से 2019 के शुरुआत के बीच टारगेट के तौर पर चुना गया था। इस बीच पेगासस जासूसी: सर्विलांस के आरोपों पर भारत के खंडन के बीच फ्रांस और इज़रायल ने जांच के आदेश दिए हैं। पेगासस प्रोजेक्ट द्वारा सर्विलांस के संभावित लक्ष्यों वाले लीक डेटाबेस में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का नंबर होने की जानकारी सामने आने के 24 घंटों के अंदर ही फ्रांस ने मामले की जांच के आदेश दिए। वहीं इज़रायल ने आरोपों की जांच के लिए अंतर-मंत्रालयी टीम गठित की है।

द वायर के मुताबिक, दलाई लामा के करीबियों की संभावित सर्विलांस के पहले रिकॉर्ड 17वें ग्यालवांग करमापा उग्येन त्रिनले दोरजे के स्टाफ से संबंधित हैं। दोरजे तिब्बती बौद्ध समुदाय में तीसरे सबसे बड़े साधु हैं। वो 2017 की शुरुआत से ही भारत से बाहर रह रहे हैं। करमापा साल 2000 में भारत से भाग गए थे। उनके और भारतीय इंटेलिजेंस समुदाय के रिश्ते अच्छे नहीं थे। मार्च 2018 में करमापा ने डोमिनिकन पासपोर्ट ले लिया था।

दलाई लामा के भारत में लंबे समय तक दूत रहे टेंपा भी संभावित सर्विलांस लिस्ट में शामिल हैं। सेरिंग अब दलाई लामा के दफ्तर के इंडिया एंड ईस्ट एशिया के डायरेक्टर हैं। दलाई लामा के वरिष्ठ सलाहकार तेंजिन तक्लहा और चिम्मी रिग्जेन का नाम भी लिस्ट में है। अगले दलाई लामा का चुनाव करने वाले ट्रस्ट के प्रमुख सामदोंग रिनपोचे भी मध्य 2018 में टारगेट चुने गए थे। रिकॉर्ड्स दिखाते हैं निर्वासित तिब्बती सरकार के तत्कालीन प्रमुख लोबसांग सांगेय और दूसरे कई तिब्बती एक्टिविस्ट के फोन नंबर भी चुने गए थे।

फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों

पेगासस प्रोजेक्ट का खुलासा करने वाले मीडिया संगठनों द्वारा निगरानी के संभावित लक्ष्यों वाले लीक डेटाबेस में फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का नंबर मौजूद होने की जानकारी सामने लाने के 24 घंटों के अंदर ही फ्रांस ने मामले की जांच के आदेश दिए। फ्रांसीसी टीवी चैनल टीएफ1 द्वारा प्रधानमंत्री जीन कास्टेक्स के बयान का उल्लेख करते हुए रॉयटर्स ने बुधवार को रिपोर्ट किया कि मैक्रों ने पेगासस स्पायवेयर मामले में कई जांच की मांग की है।

खुलासा होने के कुछ ही समय बाद मंगलवार की शाम मैक्रों के दफ्तर ने कहा कि अगर तथ्य सही हैं, वे साफ तौर पर बहुत गंभीर हैं। मीडिया के इन खुलासों का पूरा पता लगाया जाएगा। कुछ फ्रांसीसी पीड़ितों ने पहले ही शिकायत दर्ज कराने की घोषणा कर दी है और इसलिए कानूनी जांच शुरू की जाएगी। एनएसओ समूह के देश इजरायल की सरकार ने मामले की जांच के लिए वरिष्ठ स्तर पर एक अंतर-मंत्रालयी टीम का गठन किया है।

एलिसी वेबसाइट मीडियापार्ट के संस्थापक संपादक एडवी प्लेनेल द्वारा दायर एक आपराधिक शिकायत का जिक्र कर रही थी, जिसका नंबर लीक हुए डेटाबेस में था। वह और मैक्रों एनएसओ ग्रुप के मोरक्को ग्राहक के चुनिंदा लक्षित व्यक्तियों में से थे। लीक हुए नंबरों के डेटाबेस को फ्रांस की मीडिया नॉन-प्रॉफिट फॉरबिडेन स्टोरीज़ द्वारा हासिल किया गया था और दुनियाभर के 17 मीडिया संगठनों के साथ साझा किया गया था, जिसमें ले मोंडे, द वायर, हारेत्ज़, वाशिंगटन पोस्ट और द गार्जियन शामिल हैं।

द वायर के अनुसार दुनिया भर में हजारों लोगों की निगरानी से संबंधित लीक हुए दस्तावेजों में असम के दो बड़े नेता और प्रभावशाली नगा संगठन नेशनल सोशलिस्ट काउंसिल ऑफ नगालिम-इसाक मुइवाह (एनएससीएन-आईएम) के नेताओं के नंबर भी शामिल हैं। निगरानी सूची में शामिल पूर्वोत्तर के नेताओं में असम के समुज्जल भट्टाचार्जी, जो ऑल असम स्टूडेंट्स यूनियन (आसू) और अनूप चेतिया, जो यूनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असोम (उल्फा) के नेता हैं, के नंबर शामिल हैं। इसी तरह एनएससीएन (आईएम) के अतेम वाशुम, अपम मुइवाहह, एंथनी शिमरे और फुनथिंग शिमरंग ने भी नंबर निगरानी सूची में दर्ज पाए गए हैं।

भट्टाचार्जी केंद्र सरकार के साथ साल 1985 में हुए असम समझौते के हस्ताक्षरकर्ताओं में से एक हैं, जिसमें ये कहा गया है कि असमिया समाज के लोगों की संस्कृति, सामाजिक, भाषाई पहचान और विरासत की रक्षा, संरक्षण और प्रोत्साहन के लिए संवैधानिक, विधायी और प्रशासनिक सुरक्षा उपाय, जो भी उपयुक्त हों, किए जाएंगे। इसी समझौते के चलते असम में नगारिकता साबित करने के लिए कट-ऑफ तारीख 24 मार्च 1971 रखा गया है, जो देश के बाकी राज्यों से अलग है। इसी के अधार पर राज्य में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) अपडेट करने की विवादित प्रक्रिया चल रही है। भट्टाचार्जी का नंबर निगरानी सूची में केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा असम समझौते के क्लॉज छह को लागू करने के लिए समिति के गठन से करीब एक महीने पहले डाला गया था। लीक हुए डेटा में पाया गया एक फोन नंबर मणिपुर के निवासी और दिल्ली स्थित लेखक मालेम निंगथौजा का है।

इसी तरह भारत सरकार के खिलाफ दशकों विद्रोह छेड़ने वाले नगा समूह एनएससीएन (आईएम) का साल 2015 में मोदी सरकार के साथ समझौता होने के बाद उनके नंबर निगरानी सूची में दिखाई देते हैं। लीक हुए डेटा के अनुसार अतेम वाशुम, जिसे एनएससीएन (आईएम) के अध्यक्ष टी. मुइवाह का उत्तराधिकारी माना जा रहा है, का नंबर साल 2017 के दौरान संभावित टारगेट के रूप में चुना गया था। इसके तुरंत बाद मुइवाह के भतीजे अपम मुइवाह का भी नंबर इसमें शामिल किया गया।

लीक हुए रिकॉर्ड में एनएससीएन (आईएम) की नगा सेना के कमांडर इन चीफ एंथनी निंगखांग शिमरे के दो फोन नंबर भी 2017 के अंत में दिखाई देते हैं। इसके पूर्व कमांडर इन चीफ और एनएनपीजी संयोजक एन किटोवी झिमोमी के फोन नंबर 2019 की पहली छमाही में दिखाई देते हैं। जिनके नाम लीक हुई निगरानी सूची में आए हैं, उन्होंने साल 2015 के शांति समझौते में अग्रणी भूमिका निभाई थी।

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पेगासस स्पायवेयर के जरिये निगरानी करने को लेकर हुए वैश्विक खुलासे के करीब तीन हफ्ते पहले पेगासस को बनाने वाले इजरायल के एनएसओ ग्रुप ने अपने एक नीति दस्तावेज में स्वीकार किया था कि इसका दुरुपयोग किया जा सकता है। 30 जून को तैयार किए गए इस दस्तावेज में कहा गया है कि एनएसओ ग्रुप के 40 देशों में 60 ग्राहक, सरकार एवं सरकारी एजेंसियां हैं। इनमें से 51 फीसदी खुफिया एजेंसियां, 38 फीसदी कानूनी प्रवर्तन संस्थाएं और 11 फीसदी सैन्य संगठन हैं।

समूह ने ये स्वीकार किया कि उनकी तकनीक इस्तेमाल करने के कई सारे खतरे हैं, जिसमें कानूनी और न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े अधिकार में दखल, मनमाने ढंग से गिरफ्तारी, विचार रखने की आजादी का दमन, आंदोलन की स्वतंत्रता पर प्रतिबंध इत्यादि शामिल हैं। लेकिन एनएसओ ग्रुप ने अपने उस दस्तावेज में यह भी कहा है कि घोर गोपनीयता के चलते वे ज्यादा कुछ कर नहीं पाएंगे।

इजराइली फर्म ने कहा कि उन्होंने साल 2020 में 12 रिपोर्ट की जांच की थी और मई 2020 से अप्रैल 2021 के बीच ‘करीब 15 फीसदी नए ग्राहकों को उन्होंने मानवाधिकार चिंताओं को ध्यान में रखते हुए खारिज कर दिया था। एनएसओ ग्रुप ने यह भी कहा कि उन्होंने साल 2016 से 30 करोड़ अमेरिकी डॉलर की डील को ठुकराया है।

समूह ने कहा कि किसी भी दुरुपयोग से बचाने के लिए वे अपनी खरीद शर्तों में ‘मानवाधिकार मानकों के पालन और इस स्पायवेयर का इस्तेमाल सिर्फ गंभीर अपराध एवं आतंकवाद के केस में ही करने का प्रावधान करते हैं। एनएसओ समूह की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पेगासस के लाइसेंस के लिए इजरायली रक्षा मंत्रालय के तहत रक्षा निर्यात नियंत्रण एजेंसी द्वारा फर्म की कड़ाई से निगरानी की जाती है। कंपनी अपने उत्पादों का निर्यात बुल्गारिया और साइप्रस से भी करती है।

पिछले कुछ दिनों में पेगासस प्रोजेक्ट के तहत द वायर समेत दुनियाभर के 17 मीडिया संस्थानों ने एक के बाद एक कई रिपोर्ट प्रकाशित की हैं, जिसमें पेगासस इस्पायवेयर के जरिये संभावित जासूसी का खुलासा किया गया है। फ्रांस की गैर-लाभकारी फॉरबिडेन स्टोरीज ने सबसे पहले लीक हुई उस सूची को प्राप्त किया था, जिसमें ऐसे 50,000 से अधिक नंबर दर्ज हैं, जिनकी निगरानी किए जाने की आशंका है।

इस बीच एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपने फॉरेंसिक जांच के जरिये इसमें से कुछ के फोन की हैकिंग किए जाने की पुष्टि की है। इसे लेकर एनएसओ ग्रुप ने दावा किया है कि पेगासस के जरिये इन नंबरों को निशाना नहीं बनाया गया था।

एमनेस्टी इंटरनेशनल ने अपनी इज़रायल इकाई द्वारा जारी एक हिब्रू बयान को ग़लत तरीके से उद्धृत करने, ग़लत अनुवाद करने और ग़लत व्याख्या करने वाली कुछ वेबसाइटों की ख़बरों को लेकर स्पष्टीकरण जारी किया है। संगठन की ओर से कहा गया है कि इन ख़बरों का इस्तेमाल मोदी सरकार द्वारा उन आरोपों को ख़ारिज करने के प्रयास में किया जा रहा है कि भारत में एक आधिकारिक एजेंसी पत्रकारों और विपक्षी राजनेताओं की जासूसी कर रही है।

आधिकारिक बयान में एमनेस्टी इंटरनेशनल ने कहा, ‘एमनेस्टी इंटरनेशनल साफ तौर पर पेगासस प्रोजेक्ट के निष्कर्षों पर कायम है और डेटा निर्विवाद रूप से एनएसओ ग्रुप के पेगासस स्पायवेयर के संभावित लक्ष्यों से जुड़ा हुआ है।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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