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Friday, September 24, 2021

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यूपी के अमेठी में कमीशन न देने पर दलित प्रधान के पति को जिंदा जला डाला

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केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के संसदीय क्षेत्र अमेठी जिले में दलित ग्राम प्रधान छोटका द्वारा गांव के एक दबंग ब्राह्मण परिवार को कमीशन न देने पर उसके पति को जिंदा जला दिया गया। मुंशीगंज कोतवाली क्षेत्र बंदोइया गांव की घटना है। 40 वर्षीय अर्जुन पुत्र रामचरण कोरी गुरुवार की रात लगभग साढ़े दस बजे गांव के ही एक व्यक्ति कृष्ण कुमार तिवारी के मकान के हाते में जली हुई अवस्था में मिले।

परिजन उन्हें इलाज के लिए नौगिरवा लेकर गए, जहां चिकित्सकों ने उन्हें जिला अस्पताल सुलतानपुर रेफर कर दिया। वहां से उन्हें लखनऊ के ट्रामा सेंटर रेफर कर दिया गया। सुलतानपुर से लखनऊ के ट्रामा सेंटर ले जाते समय रास्ते में पीड़ित की मौत हो गई।

मरने से पहले दिए बयान का ऑडियो वायरल
अर्जुन ने मरने से पहले अपना बयान दिया है। घर वालों ने मोबाइल फोन पर उनके बयान का ऑडियो रिकार्ड किया है, जिसमें अर्जुन बता रहा है कि उसे चौराहे से कृष्ण कुमार तिवारी, आशुतोष, राजेश मिश्रा, रवि और संतोष पकड़ कर कृष्ण कुमार तिवारी के घर ले गए और मार पीटकर जला दिया। 

ग्राम प्रधान छोटका का आरोप है कि गांव के कृष्ण कुमार तिवारी और उनके चार साथी उनके पति अर्जुन को चौराहे से उठा ले गए और अपने घर के हाते में जिंदा जला दिया। अर्जुन आरोपी कृष्ण कुमार तिवारी के हाते में जली हालत में मिले थे। ग्राम प्रधान छोटका का आरोप है, “कृष्ण कुमार उन्हें धन उगाही के लिए धमकी देते थे। उनका कहना था कि प्रधान के पास काफी सरकारी पैसा होता है। उन्हें उसमें से ‘कट’ दिया जाए। उनका कहना है कि उनके पास ऐसा कोई पैसा नहीं है, जिसमें उन्हें हिस्सा दिया जाता, इसलिए रंजिश में उन्होंने उन्हें जल दिया।”

अमेठी पुलिस की प्रतिक्रिया
घटना के बाद से ही जिलाधिकारी अरुण कुमार, एसपी दिनेश किमार समेत पुलिस की टीम गांव में डटी हुई है। एसपी दिनेश कुमार का कहना है कि परिजनों द्वारा गांव के ही पांच लोगों के खिलाफ़ नामजद तहरीर दी गई है। हत्या का केस दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। बाकी के दो आरोपियों को पकड़ने के लिए दबिश दी जा रही है। 

अमेठी के एसपी दिनेश सिंह का कहना है, “पुलिस को कल रात करीब 12 बजे सूचना मिली कि प्रधानपति अर्जुन जली हालत में कृष्णा कुमार के अहाते में पड़े हैं। उन्हें फौरन लोकल पीएचसी में प्राथमिक उपचार के लिए ले जाया गया। वहां से उन्हें सुलतानपुर ज़िला अस्पताल रेफर किया गया। सुबह जब उन्हें वहां से बेहतर इलाज के लिए लखनऊ ले जाया जा रहा था, तभी रास्ते में उनकी मौत हो गई।”

भाकपा-माले की राज्य इकाई ने घटना में दोषियों को कड़ी सजा देने की मांग की है। पार्टी ने कहा कि भाजपा और मुख्यमंत्री योगी के शासन में सत्ता की शह से हो रही सवर्ण दबंगई के चलते दलितों और कमजोर वर्गों का जीना मुहाल हो गया है। राज्य सचिव सुधाकर यादव ने कहा कि अब तक योगी सरकार में दलित महिलाओं पर हिंसा की घटनाओं का शुमार था, लेकिन अब हालात यहां तक पहुंच गए हैं कि सवर्ण दबंग दलितों को जिंदा जला रहे हैं। यह यूपी में चल रहे जंगलराज की पराकाष्ठा है। इसके लिए योगी सरकार जिम्मेदार है।

उन्होंने कहा कि सरकार से संरक्षण-समर्थन पाए अपराधी, बलात्कारी और दबंग भयमुक्त होकर प्रदेश भर में दलितों-वंचितों पर कहर बरपा रहे हैं। हाथरस और बलिया से लेकर अमेठी तक घटनाएं इसकी गवाह हैं। माले नेता ने कहा कि इस मृत्यु पूर्व बयान का हश्र कहीं हाथरस पीड़िता के मृत्यु पूर्व बयान की तरह ही न हो। मृतक और उसकी विधवा को शीघ्र न्याय मिलना चाहिए।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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