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कोरोना महामारी में ऑक्सीजन और दवाइयों की कमी के बीच विदेश से आई मेडिकल मदद के वितरण में देरी, राज्यों का हिस्सा बेहद कम

दुनियाभर के करीब 40 देशों ने भारत के गंभीर कोरोना संकट में मदद के लिए ऑक्सीजन से लेकर दवाइयां तक विमानों के जरिए सहायता भेजी। लेकिन केंद्र की मोदी सरकार को जितनी तेजी और प्रभावी तरीके से इस विदेशी मदद का फायदा उठाना चाहिए था, सरकार उस तरह से ऐसा करते हुए नहीं दिख रही है। दरअसल सिंगापुर से मदद की पहली खेप भारत 25 अप्रैल को पहुंची लेकिन इसके वितरण के नियम बनाने में ही सात दिन गुज़र गए। जब इन मेडिकल उपकरणों, सुविधाओं का वितरण हुआ भी तो ज्यादातर संसाधन केंद्र के ही हिस्से में आए, राज्य सरकार के अस्पतालों की कोई खास मदद नहीं की गई।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में विदेश से सबसे पहली मदद सिंगापुर से 25 अप्रैल को आयी। सिंगापुर से आने वाली मदद में ऑक्सीजन जनरेटर्स, कंसंट्रेटर्स और वेंटिलेटर्स थे। ये सारी चीजें भारत के विदेश मंत्रालय ने रिसीव कीं। लेकिन 25 अप्रैल को मदद की पहली खेप मिल जाने के बावजूद केंद्र को इसके बंटवारे की SOP तैयार करने में सात दिन का वक्त लग गया। जबकि इस एक सप्ताह के दर्मियान दौरान देशभर में ऑक्सीजन और दूसरे मेडिकल उपकरणों की मांग लेकर जनता ऑक्सीजन-ऑक्सीजन चीखती पुकारती रही रही। इससे यह पता चला है कि 25 अप्रैल को कोविद -19 सहायता की पहली खेप भारत आने के दौरान, केंद्र ने इन जीवन रक्षक चिकित्सा आपूर्ति को वितरित करने के लिए मानक परिचालन प्रक्रिया (एसओपी) को तैयार करने में सात दिन का समय लिया। अस्पतालों ने ऑक्सीजन की भीख मांगी और लोगों ने जानलेवा बीमारी का शिकार हो गए।

विदेश से आये मेडिकल उपकरणों के वितरण में केंद्रीय मंत्रालय का सुस्त रवैया तब देखने को मिल रहा जब 26 अप्रैल को खुद पीएम मोदी ने ही अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन से बात की और भारत ने विदेशी मदद के लिए अपने दरवाजे खोल दिये।

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों ने बताया है कि इससे जुड़े नियम कायदों को 2 मई को नोटिफाई किया गया और HLL लाइफकेयर को डिस्ट्रीब्यूटर के तौर पर नियुक्त किया गया।

नहीं की बंटवारे में देरी: सरकार

वहीं केंद्र सरकार का कहना है कि उन्होंने विदेशों से आई मेडिकल सहायता के बंटवारे में देरी नहीं की और कोरोना राहत से जुड़े संसाधन का प्रभावी रूप से बंटवारा किया।

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक विदेशों से मदद के रूप में भारत में करीब 40 लाख आइटम आए जिसमें मेडिकल उपकरण से लेकर दवायें तक शामिल हैं। स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक ये संसाधन 31 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में के 38 संस्थानों को दिए गए, इनमें से ज्यादातर संस्थान केंद्र सरकार द्वारा चलाये जाते हैं। देश की राजधानी दिल्ली में ऑक्सीजन से लेकर दूसरी स्वास्थ्य सुविधाओं की मारामारी है और यहीं जिन 8 अस्पतालों को विदेश से आने वाली मदद पहुंचाई उसमें से 6 अस्पताल केंद्र सरकार चलाती है।

सरकार के सूत्रों के हवाले से इंडिया टुडे थी रिपोर्ट के मुताबिक स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय (MoHFW), नोडल मंत्रालय ने इन आपूर्ति को 2 मई को राज्यों को वितरित करने की प्रक्रिया को अधिसूचित किया और HLL लाइफकेयर (HLL) को वितरण प्रबंधक नियुक्त किया।

अब सवाल पैदा होता है कि SOP क्या है?

केंद्रीय मंत्रालय द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी (IRCS) को आधिकारिक खेप के रूप में नियुक्त किया गया है, जबकि HLL को विदेशों से प्राप्त आपूर्ति के वितरण के लिए सौंपा गया था। SOP के अनुसार, विदेश मंत्रालय (MEA) विदेश से सहायता के सभी प्रस्तावों को प्रसारित करने के लिए नोडल एजेंसी होगी।

IRSC को MEA के माध्यम से प्राप्त होने वाली सभी खेपों की खेप के रूप में नामित किया गया है और विदेशी देशों से दान के रूप में आ रहा है।

रेड क्रॉस सोसाइटी हवाई अड्डों पर सीमा शुल्क और नियामक मंजूरी के लिए एचएलएल को आवश्यक प्रमाण पत्र जारी करेगी। HLL को Red Cross के लिए कस्टम एजेंट और MoHFW के वितरण प्रबंधक के रूप में नियुक्त किया गया है। इसे राज्यों को वितरण के लिए खेपों और परिवहन के त्वरित प्रसंस्करण के लिए सौंपा गया है।

गौरतलब है कि कोरोना की दूसरी लहर से लड़ रहे भारत के लिए विदेश से भरपूर मदद आ रही है। कोरोना संकट के बीच भारत में ऑक्सीजन और संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल होंने वाली दवाइयों की भारी कमी देखी जा रही है वहीं अमेरिका, फ्रांस, सऊदी अरब जैसे देश भारत को मेडिकल उपकरण की मदद भेज रहे हैं।

विपक्षी पार्टियों का आरोप

विपक्ष पार्टियों ने विदेशी मेडिकल हेल्प पर सवाल उठाते हुए केंद्र सरकार से भारत को पिछले एक महीने में मिली विदेशी मदद की जानकारी साझा करने की मांग की है। मुख्य विपक्ष पार्टी कांग्रेस ने विदेश से आई मदद के वितरण को ट्रांसपेरेंट करने की मांग की है। पार्टी ने पीएम मोदी से विदेश से मिली सभी मदद की जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है।

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने विदेशी मेडिकल राहत सामग्री पर ट्वीट करते हुये लिखा, “पिछले एक सप्ताह में भारत को 40 देशों से सहायता मिली है। इस देश के लोगों को यह जानने का अधिकार है कि राहत सामग्री कहां से आ रही है और कहां जा रही है। सरकार मीडिया मेनेजमेंट और हेडलाइन मेनेजमेंट में व्यस्त है जबकि लोग ऑक्सीजन की कमी के कारण मर रहे हैं।”

वहीं AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने भी विदेश से मिली मेडिकल मदद को लेकर केंद्र सरकार की आलोचना करके हुये अपने ट्विटर पर लिखा, “बहुत से देश भारत को बहुत सारी सहायता भेज रहे हैं, यह सभी भारतीयों के लिए है, न कि प्रधानमंत्री कार्यालय के लिये, क्यों हम नहीं जानते कि कितनी सामग्री आई है और कहां गई है?”

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This post was last modified on May 6, 2021 3:45 pm

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