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भ्रामक रिपोर्टिंग के लिए आज तक, प्रेस काउंसिल और केंद्र को दिल्ली हाई कोर्ट का नोटिस

दिल्ली हाई कोर्ट ने सोमवार एक फरवरी को सिख समुदाय के खिलाफ दुष्प्रचार और मनगढ़ंत मुहिम चलाने के विरुद्ध दायर याचिकाओं पर न्यूज़ चैनल आजतक, न्यूज ब्रॉडकास्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया, प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। मामले की अगली सुनवाई 26 फरवरी को होगी।

सुखदेव सिंह ढींडसा, राज्यसभा के सदस्य और दिल्ली सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष मनजीत सिंह जीके द्वारा दायर याचिकाओं में आरोप लगाया गया है कि चैनल द्वारा एक वीडियो रिपोर्ट में दिखाया जा रहा है, जिसमें किसानों के विरोध प्रदर्शन को मनगढ़ंत कहानी के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा है। इसमें भ्रामक तरीके से बताया जा रहा है कि विरोध का तथ्यों से कोई लेना-देना नहीं है।

याचिकाओं में कहा गया है कि आजतक की रिपोर्ट में दिखाया गया है कि कृषि कानूनों के प्रदर्शनकारियों ने राम जन्मभूमि मंदिर पर उत्तर प्रदेश की झांकी के शिखर को उजाड़ दिया। याचिकाओं में गणतंत्र दिवस, 2021 पर किसानों के विरोध प्रदर्शन पर चैनल द्वारा गलत सूचना देने का आरोप लगाते हुए याचिकाकर्ता ने संबंधितों की जवाबदेही तय करते हुए फर्जी-समाचारों पर लगाम लगाने की प्रार्थना की गई है।

26 जनवरी की घटनाओं के संदर्भ में आजतक ने अपने संबंधित समाचार चैनलों यूट्यूब और ऐसे अन्य डिजिटल और ऑनलाइन प्लेटफ़ॉर्म सहित विभिन्न माध्यमों निरंतर प्रसार और असत्यापित वीडियो के निरंतर प्रसारण के द्वारा सिख समुदाय पर एक आक्रामक और संभावित घातक सांप्रदायिक हमला किया है। याचिकाकर्ताओं ने दावा किया है कि ‘आजतक’ द्वारा लगाए गए आरोप असत्य, निराधार और फंतासी कल्पना का एक संकेत हैं।

याचिकाकर्ता के अनुसार, किसान यूनियन के नेताओं सहित प्रदर्शनकारियों ने यह सुनिश्चित करने और सावधानी बरतने का प्रयास किया है कि विरोध जारी रखते हुए बड़े पैमाने पर जनता को कोई असुविधा न हो। हालांकि, 26 जनवरी 2021 के दिन, ‘कुछ असामाजिक और हिंसा प्रेरित तत्वों द्वारा विरोध प्रदर्शनों में घुसपैठ के कारण’ पुलिस अधिकारियों का ट्रैक्टर रैली की कुछ गंभीर और क्रूर हमलों से सामना हुआ, जिसने इन असामाजिक तत्वों के लिए हंगामा खड़ा करने का एक अवसर पैदा किया।

याचिकाओं में कहा गया है कि इस तरह के आयोजनों के बाद 27 जनवरी 2021 को आज तक ने एक वीडियो दिखाया, जिसमें उसके संवाददाता अरविंद ओझा ने स्पष्ट रूप से आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की 72वें गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान दिन में राजपथ पर प्रदर्शित हुई झांकी को नष्ट करने में शामिल थे। इस तरह के दुर्भावनापूर्ण और प्रतिशोधी वीडियो के माध्यम से शुरू की गई छेड़छाड़ का मतलब सिख समुदाय की गरिमा, शील और सद्भावना को नाराज करना है और सिख समुदाय से संबंधित लोगों के खिलाफ सार्वजनिक भावनाओं को उकसाना है।

याचिकाओं में मांग की गई है कि संबंधित अधिकारियों/विभागों की जवाबदेही, दायित्व और जिम्मेदारी तय करके फर्जी खबरें फैलाने के लिए उत्तरदाताओं को आदेश या निर्देश जारी किया जाए और एहतियाती उपाय करने का निर्देश दिया जाए, ताकि भविष्य में ऐसी फर्जी एवं मनगढ़ंत खबरों का प्रसारण न हो।

(जेपी सिंह वरिष्ठ पत्रकार और कानूनी मामलों के जानकार हैं। वह इलाहाबाद में रहते हैं।)

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This post was last modified on February 2, 2021 11:30 am

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