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दिल्ली: 100 नंबर पीसीआर कॉल भी बना गुनाह, तीन पुलिसकर्मियों ने मिलकर तोड़ दी मुस्लिम युवक की रीढ़ की हड्डी

नई दिल्ली। जिस उम्र में एक युवक पर अपने घर परिवार का दार-ओ-मदार अपनी स्पाइनल कॉर्ड (रीढ़) पर उठाना होता है उस उम्र में एक युवक अपनी फ्रैक्चर्ड स्पाइनल कॉर्ड लिये बिस्तर पर पड़ा है। दरअसल वसीम ख़ान नामक एक युवक की स्पानल कॉर्ड को दिल्ली पुलिस सिर्फ़ इसलिये क्षतिग्रस्त कर देती है क्योंकि मोहल्ले में दो युवकों के बीच हो रहे झगड़े के निपटारे के लिये एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर उसने पीसीआर नंबर 100 पर कॉल कर दिया।

मामला दक्षिणी दिल्ली के छतरपुर, हजीराबाद मोहल्ला चंदन हुल्ला का है। फतेहपुर बेरी पुलिस स्टेशन में दिये गये अपनी शिक़ायत पत्र में 29 वर्षीय वसीम ख़ान पुत्र आशू ख़ान ने बताया है कि 17 मई, 2021 सोमवार को चंदन हुल्ला में मेरे चाचा के घर के पास झगड़ा हो रहा था। जब मैंने देखा कि झगड़ा किसी भी तरह शांत नहीं हो रहा बल्कि और बुरा रूप लेता जा रहा है तो मैंने एक जिम्मेदार नागरिक के तौर पर पीसीआर नंबर 100 पर कॉल करके झगड़े और झगड़े के लोकेशन के बारे में पुलिस को सूचित किया। लेकिन पर्याप्त समय बीतने के बाद भी जब झगड़ा स्थल पर पुलिस नहीं पहुंची तो मोहल्ले के और लोगों ने और मैंने भी 100 नंबर पर दोबारा कॉल किया जिसके बाद रात के 10 बजे पुलिस घटना स्थल पर पहुंची।

पुलिस थाने में मुर्गा बनाकर पीठ और पुट्ठे पर बरसायी लाठियां

जनचौक न्यूज के संवाददाता से पीड़ित वसीम ख़ान बताते हैं कि “रात करीब 11:30 पर पुलिस मेरे दरवाजे पर आयी और मुझे अपने साथ पुलिस स्टेशन चलने को कहा। पुलिस ने मुझसे कहा चूंकि मैं गवाह और शिक़ायतकर्ता हूँ तो वो झगड़े के संदर्भ में पुलिस मेरा बयान दर्ज करना चाहती है। रात करीब 11:40 पर मैं फतेहपुर बेरी पुलिस स्टेशन पहुंचा और मामले में जितना कर सकता था पूरा सहयोग दिया। इसी मामले में मेरे साथ मोहल्ले के और भी लोगों को थाने ले जाया गया था”।

पुलिसिया टॉर्चर के शिकार वसीम ख़ान आगे बताते हैं कि “मेरे बयान देने के कुछ देर बाद सब इंस्पेक्टर सतेंदर गुलिया, हेड कांस्टेबल प्रवीण और जितेंद्र मुझे कस्टडी में लेकर गये और लाठी से पीटना शुरू कर दिया। उन्होंने मेरी कलाईयां मरोड़ी और मुझे लात से मारा। और मुझे मरणासन्न होने तक पीटते रहे। वो रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। उन्होंने मेरे पीठ पर कई दफा बेताहाशा मुक्के बरसाये। घंटों मारने पीटने के बाद मुझे फर्श पर मरने के लिये छोड़ दिया”।

इसके बाद 18 मई की सुबह 2:30 पर वसीम ख़ान को पुलिस स्टेशन से छोड़ दिया गया जबकि उनके साथ जिन अन्य लोगों को पिछली रात हिरासत में लिया गया था वे कस्टडी में ही थे।

वसीम ख़ान ने तीनों आरोपी पुलिस वालों के खिलाफ़ सख्त कार्रवाई करने की मांग करते हुये अपने शिक़ायत पत्र में लिखा है कि “तीन पुलिस अधिकारियों द्वारा मुझ पर किया गया कस्टोडियल टॉर्चर न सिर्फ मेरे मानवाधिकारों का घोर उल्लंघन है बल्कि इसने मेरे जिंदगी के व्यापक परिमाण, मानवीय व्यक्तित्व नष्ट कर दिया है और इससे मुझे कई बहुत गंभीर चोटें आयी हैं जिसके चलते मेरी मौत भी हो सकती है। अतः तीन पुलिस अधिकारी एसआई सतेंदर गुलिया, प्रवीण और जितेंदर के ख़िलाफ़ भारतीय दंड संहिता 308, 326,331, 342, और 348 के तहत मुक़दमा दर्ज़ करके उन्हें दंडित किया जाये”।

फॉयरिंग शब्द पर भड़क गया एसआई

वसीम ख़ान के मामा अक़बर ख़ान पूरे घटनाक्रम को जनचौक न्यूज से साझा करते हुये बताते हैं कि 17 मई की रात मोहल्ले में दो लड़के दारू पीकर लड़ रहे थे। पड़ोस के लोगों ने पीसीआर को कॉल कर दी। तभी कुछ लोग छत से पत्थर बरसाने लगे। तो वहां 40-50 लोगों की भीड़ इकट्ठा हो गयी। मेरा भांजा वसीम ख़ान भी इत्तफाक से वहां पहुंच गया। तो उसे वहां किसी ने बताया कि फॉयरिंग हुयी है तो उसने भी पीसीआर नंबर 100 पर कॉल करके कहा कि पुलिस भेजिये यहां फायरिंग हो रही है। चूंकि फायरिंग की सूचना वाली कॉल सेंस्टिव होती है तो सीधी डीसीपी ऑफिस चली जाती है।

अक़बर ख़ान बताते हैं कि पीसीआर वैन आयी। उसके कुछ देर बाद लोकल पुलिस ने पहुंचकर मामला रफ़ा दफ़ा करवाया। मामला शांत हुआ तो वसीम अपने घर आया खाना पीना करके लेट गया। रात साढ़े दस, ग्यारह बजे एसीपी एसएचओ मोहल्ले में पहुंचे और उन्होंने पूछा कि किस किसने कॉल किया था। यूं तो कॉल 8-10 लोगों ने किया था लेकिन मौके पर तीन लोग मिल गये। जो पड़ोस में रहने वाले थे। फिर उन्होंने एक मोबाइल नंबर बोल कर पूछा कि ये मोबाइल नंबर किसका है लोगों ने बताया कि वसीम का है तो बोले कि उसको भी बुला लो। दो पुलिस वाले गये और वसीम को बयान देने की बात कहकर लिवा आये और सबको गाड़ी में बैठाकर पुलिस स्टेशन ले गये।

अक़बर ख़ान बताते हैं कि मोहल्ले में दारू पीकर जो दो लड़के झगड़े कर रहे थे उनको तो थाने पहुंचते ही पुलिस ने मारना शुरू कर दिया था। फिर एक पुलिस वाले ने वसीम का मोबाइल नंबर थाने में बोलते हुये पूछा ये किसका नंबर है। वसीम ने कहा जी मेरा है। तो उक्त पुलिस वाले ने गाली देते हुये गुस्से से कहा –‘तूने फॉयरिंग की सूचना दी थी बहन…..तुझे तो हम बताते हैं कि फायरिंग की कॉल कैसे होती है। तूने मेरा जीना हराम कर दिया।’

अकबर ख़ान आगे बताते हैं कि इसके बाद पुलिस वालों ने वसीम को पीटना शुरु कर दिया। उसे मुर्गा बनाकर लाठियों से उसके चूतड़ (हिप) पर मारा। जिसमें कई लाठियां उसकी पीठ पर भी लगीं। जिससे स्पाइनल कॉर्ड L5, L3 में फ्रैक्चर आ गया। रात साढ़े 12 बजे के करीब मैं और मोहल्ले के कई लोग थाने पहुंचे। वहां हमने एसएचओ से बात की कि आखिर एक पीसीआर कॉल पर आप लड़कों को ऐसे बंद कर रहे हो। तो एसएचओ ने कहा कि इन लोगों ने कर्फ्यू का उल्लंघन किया है। जबकि जो दो लड़के झगड़ा कर रहे थे उनको पुलिस ने धारा 107,151 में बंद कर दिया मेडिकल करवाकर। बाकी लोग जिन्होंने पीसीआर कॉल किया था उन सबको धारा 107 (शांति भंग) के आरोप में बंद कर दिया। अक़बर ख़ान बताते हैं कि जब हम लोगों ने बहुत प्रार्थना विनती किया तो एसएचओ ने वसीम और एक लड़के को और रात में करीब 2:30 बजे छोड़ दिया।

मेडिकल जांच में निकला स्पाइनल फ्रैक्चर

वसीम ख़ान बताते हैं कि “तीन पुलिस वालों की टॉर्चर और पिटाई से मैं बेतहासा दर्द में था। मैं घर आया और पेन किलर खाकर बिस्तर पर पड़ गया। ये सोचकर कि धीर-धीरे दर्द चला जायेगा। लेकिन अगले दिन 20 मई को जब दर्द असहनीय हो गया तो मैं डॉक्टर के पास गया। डॉक्टरों ने मुझे बताया कि मुझे स्पाइनल फ्रैक्चर हुआ है।”

वसीम के मामा अक़बर ख़ान जनचौक न्यूज से कहते हैं कि भोर में थाने से आने के बाद वसीम सो गया तो सारा दिन सोता ही रहा। शाम को उठा तो उससे उठा ही न जा रहा था। फिर उसने कॉंम्बीफ्लाम और दूसरे पेनकिलर जो घर में था खाकर रात में सो गया। अगले दिन उसको हम डॉक्टर के पास लेकर गये। वसीम ने डॉक्टर को अपनी तकलीफ बताया कि उसे उठने, बैठने और खड़े होने में तकलीफ हो रही है और एक ओर करवट लेता है तो सनसनाहट सी होती है। डॉक्टर ने तुरंत स्पाइन इंजरी की जांच कराने को कहा। जांच करने वाले डॉक्टर ने पूछा कि स्पाइनल कॉर्ड में चोट कैसे लगी। फिर वसीम ने पुलिस टॉर्चर की पूरी कहानी सुनायी। डॉक्टर ने एक्सरे करके एमएलसी बनवाया। वसीम का एमएलसी नंबर 11576/21 है। फिर एमआरआई करके अगले दिन बुलाया। डॉक्टर ने एमआरआई रिपोर्ट के आधार पर बताया कि स्पाइनल क़ॉर्ड में फ्रैक्चर है। लेकिन आप एक बार सीटी स्कैन भी करवा लीजिये। हो सकता है सर्जरी करनी पड़े। सीटी स्कैन में स्पाइन कॉर्ड में फ्रैक्टर की पुष्टि हो गयी। हमने अर्ल्टरनेट डॉक्टर से भी सलाह ली। दूसरे डॉक्टर ने भी वही बात दोहरायी कि स्पाइनल फ्रैक्चर है सर्जरी तो कराना ही पड़ेगा।

पुलिस ने दिल्ली पुलिस के खिलाफ़ वसीम का बयान दर्ज़ करने से इन्कार कर दिया

अक़बर ख़ान बताते हैं कि जिस दिन हमने वसीम का एमएलसी करवाया था ठीक उसी दिन लोकल थाने से पुलिस बयान लेने के लिये आयी। पुलिस के ख़िलाफ़ वसीम ने बयान दिया तो उन्होंने मना कर दिया। फिर हम एसएचओ के पास गये। एचएचओ ने कहा कि फतेहपुर थाने जाकर लिखवा दो बयान। हमने कहा कि हम वहां नहीं जायेंगे। तो एसएचओ वसंत कुंज विजय नेगी ने कहा कि फिर तो यहां भी नहीं दर्ज होगा बयान। बहुत सोर्स सिफारिश के बाद फिर एसएचओ ने वसीम का बयान दर्ज कर लिया। और वहीं बैठे-बैठे मोबाइल में मेसेज आया कि आपका बयान दर्ज कर लिया गया। फिर वहीं बैठे बैठे ही वसीम ने अपनी शिक़ायत सीपी और डीसीपी साउथ को ईमेल कर दिया।

घर आने के बाद अगले दिन पुलिस वाले समझौता करने का दबाव बनाने पहुंच गये। दो दिन बाद हमने डीसीपी अतुल ठाकुर को कॉल करके सारा वाकया बताया। फिर उनके भेजे गये ईमेल शिकायत के आधार पर उन्होंने विजिलेंस इन्क्वायरी बैठायी। फिलहाल विजिलेन्स इन्क्वायरी में वसीम का बयान दर्ज हुआ और बयान सबमिट कर दिया गया। इसके बाद एसएचओ का फोन आया कि आपने डीसीपी साहेब को शिक़ायत कर दी है। हमने कहा आप लोगों ने वसीम के साथ जो किया है उसके बाद तो शिक़ायत ही होना है।

बता दें कि चंदन हुल्ला मोहल्ले में वसीम ख़ान के पिता आशू ख़ान एक छोटी सी डेयरी चलाते हैं। वसीम ख़ान उसी में पिता का हाथ बंटाता था।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on June 1, 2021 1:53 pm

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