Friday, December 2, 2022

डेंगू से हो रही मौतों को रोकने की जगह देव दीवाली की तैयारियों में व्यस्त हैं इलाहाबाद के आला अधिकारी

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इलाहाबाद में डेंगू से हाहाकार मचा है, स्थिति कितनी भयावह है इसका अंदाजा स्वरूपरानी अस्पताल, तेज बहादुर सप्रू (बेली) डफरिन और कॉल्विन अस्पताल के बाहर लगी लंबी-लंबी कतारों से लगाया जा सकता है।

वहीं प्रयागराज का प्रशासनिक महकमा जिलाधिकारी की अगुवाई में देव दीपावली की तैयारियों में जुटा हुआ है। इसे लेकर तीन दिन पहले जिलाधिकारी की अध्यक्षता में प्रशासनिक अधिकारियों की एक बैठक भी हुई थी। सवाल उठता है कि यूपी सरकार के लिये जनता ज्यादा महत्वपूर्ण है या देवता। 

बता दें कि जिलाधिकारी संजय कुमार खत्री ने सभी घाटों पर दीपदान का निर्देश दिया है। जिला प्रशासन की ओर से संगम तट पर 11 लाख दीपों का दान किया जाएगा। दशाश्वमेध घाट पर ढाई लाख दीप प्रज्ज्वलित किए जाएंगे। डीएम ने दीपों को अच्छे एवं व्यवस्थित ढंग से जलाने के लिए सेक्टर वार व्यवस्था किए जाने का निर्देश दिया है। सभी घाटों के एक नोडल एडीएम सिटी मदन कुमार होंगे। दशाश्वमेध घाट पर एसीएम चतुर्थ, संगम पर सिटी मजिस्ट्रेट, बलुआ घाट पर एसीएम द्वितीय को जिम्मेदारी दी गई है।

अधिकारियों की मौजूदगी में कार्यक्रम कराया जाएगा। संगम पर सांस्कृतिक कार्यक्रम भी होंगे। कार्यक्रम को सुव्यवस्थित ढंग से संपन्न कराए जाने के लिए जिला प्रशासन के साथ अन्य विभागों व संगठनों को सम्मिलित किया जाएगा। जिलाधिकारी ने सीएमओ को कार्यक्रम स्थल पर एंबुलेंस, चिकित्सकों व मेडिकल स्टाफ के साथ सभी आवश्यक व्यवस्था के निर्देश दिए। मार्गों पर साइनेज तथा पार्किंग आदि की व्यवस्था भी करने को कहा है।

वहीं दूसरी ओर कल इलाहाबाद हाई कोर्ट ने जिले में डेंगू के बिगड़े हालात पर कोर्ट में हाजिर जिलाधिकारी, सीएमओ व नगर आयुक्त को डांट लगाते हुए डेंगू नियंत्रण के सभी प्रयासों को नाकाफ़ी बताते हुए डेंगू पर निगरानी के लिये समस्त वार्डों में कमेटी बनाने का निर्देश ज़ारी किया। साथ ही यह भी आदेश दिया कि वार्ड कमेटी में डॉक्टर, वरिष्ठ अधिवक्ता, सभासद सहित संभ्रांत नागरिकों को कमेटी में शामिल करें। इसके अलावा चकबंदी अधिकारी को डेंगू नियंत्रण के लिये बने कंट्रोल रूम का इंचार्ज बनाने पर कोर्ट ने रोष प्रकट करते हुये कहा तो क्या अब चकबंदी अधिकारी डॉक्टर का भी काम करेंगे। 

वहीं इलाहाबाद हाई कोर्ट के लखनऊ खंडपीठ में भी डेंगू रोकने के उपाय पर उत्तर प्रदेश सरकार के दावों को ग़लत ठहराते हुए कहा है कि ज़मीनी हक़ीक़त अलग ही है। हाईकोर्ट ने कहा कि हमारे पास कोई एजेंसी होती तो वह सरकारी दावे की जांच अवश्य कराते। साथ ही हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को आदेश दिया है कि 9 नवंबर की अगली सुनवाई में वो शपथ पत्र दाखिल करके बताये कि डेंगू के मामले में उन्होंने क्या-क्या उपाय किये हैं। बता दें कि योगी सरकार की ओर से अपर मुख्य स्थायी अधिवक्ता अमिताभ राय ने कोर्ट को बताया था कि सरकार डेंगू, चिकनगुनिया, मलेरिया, वायरल बुखार व अन्य वेक्टरजनित रोगों के इलाज के लिये समुचित कदम उठा रही है। साथ ही सरकार ने दावा किया कि सरकारी अस्पतालों में दवाओं व बेड की कोई कमी नहीं है। 

वहीं कल शुक्रवार को 37 नये डेंगू मरीज मिले। पिछले एक महीने से जिले में रोज़ाना 30-40 डेंगू मरीज़ निकल रहे हैं। आधिकारिक आंकडों में जिले में डेंगू मरीजों की संख्या 1014 हो गयी है। लेकिन असली आंकड़ा इससे ज्यादा भयावह है। जिले में अब तक तीन दर्जन से अधिक लोगों की डेंगू से मौत हो चुकी है। जबकि जिले का स्वास्थ्य विभाग व मलेरिया विभाग डेंगू से महज 6 मौत होने का दावा कर रहा है, वहीं खुद स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने डेंगू से 9 मौत होने की बात कबूल किया है। 

डेंगू के बेकाबू हालात के बीच नगर निगम और मलेरिया विभाग ने दावा किया है कि उन्होंने अब तक जिले में 3605 लीटर कीटनाशक और फॉगिंग दवा का छिड़काव मच्छर मारने के लिये किया है। इन कीटनाशकों में 1126 लीटर टेमीफास , 324 लीटर मैलाथियान, 724 लीटर डेल्टा माईथीन, 700 लीटर लेम्डा क्योथ्रीन और फॉगिग के लिये 591 लीटर किगफॉग खर्च किया है। जबकि मलेरिया विभाग ने 140 लीटर कीटनाशक (50%टैमीफास) का इस्तेमाल किया है।

वहीं वृहस्पतिवार 3 नवंबर को प्रयागराज पहुंचे राज्य के स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने कीटनाशक की गुणवत्ता पर ही सवाल खड़े कर दिये हैं। उन्होंने कहा है कि या तो कीटनाशक की गुणवत्ता में खामी है या फिर कीटनाशकों का सही से छिड़काव नहीं किया गया है। वर्ना सिर्फ़ चार जिलों में ही डेंगू का प्रकोप क्यों है। उन्होंने कीटनाशकों के छिड़काव के आंकड़ों पर भी प्रश्न उठाते हुए कमिश्नर विश्वास पंत को जांच कराने के निर्देश दिये हैं और तीन दिन में रिपोर्ट मांगी है।

(जनचौक के विशेष संवाददाता सुशील मानव की रिपोर्ट।) 

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