Saturday, October 16, 2021

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नीति आयोग और वित्त मंत्रालय की आपत्ति के बावजूद 6 एयरपोर्ट अडानी के हवाले

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एक तरफ देश कृत्रिम कोरोनो संकट से जूझ रहा है और न्यायपालिका, विधायिका वर्चुअल मोड में हैं, दूसरी ओर लाखों किसान तीन कृषि कानूनों को लेकर दिल्ली सीमा पर आंदोलनरत हैं। अब तक 50 से अधिक किसानों की मौत हो चुकी है और पीएम कविता मोड में हैं और गुपचुप ढंग से देश के एयरपोर्ट अपने चहेते नीली आंखों वाले गौतम अडानी को सौंपे जा रहे हैं। आपदा बहुत बड़ा अवसर बन गया है। संघ राम राम के कीर्तन में लगा है। खेती पर कब्जा नहीं तो एयरपोर्ट ही सही।

इंडियन एक्सप्रेस ने खबर ब्रेक की है कि नीति आयोग, वित्त मंत्रालय की आपत्ति के बावजूद अडानी को छह एयरपोर्ट दे दिए गए हैं। वित्त मंत्रालय और नीति आयोग की आपत्तियों को दरकिनार कर दिया गया।

अडानी ग्रुप ने देश के दूसरे सबसे बड़े मुंबई एयरपोर्ट को भी अक्वायर कर लिया है। एयरपोर्ट अथॉरिटी ने 12 जनवरी को इसके टेकओवर को हरी झंडी दिखा दी है। अहमदाबाद के अडानी ग्रुप ने छह एयरपोर्ट के लिए सबसे बड़ी बोली लगाई है। साल 2019 में हुई बिडिंग की प्रक्रिया पर नीति आयोग और वित्त मंत्रालय ने आपत्ति जताई थी कि एक ही कंपनी को छह एयरपोर्ट नहीं दिए जाने चाहिए, लेकिन इसकी अनदेखी की गई।

‘द इंडियन एक्सप्रेस’ को मिले रेकॉर्ड के अनुसार मोदी सरकार के सबसे बड़े प्राइवेटाइजेशन प्रोग्राम के तहत अहमदाबाद, लखनऊ, मैंगलोर, जयपुर, गुवाहाटी, तिरुवनंतपुरम एयरपोर्ट के लिए बोलियों को आमंत्रित किया गया था। केंद्र की पब्लिक-प्राइवेट पार्नरशिप अप्रेजल कमेटी ने सिविल एविएशन मिनिस्ट्री से 11 दिसंबर 2018 को इस प्रस्ताव पर चर्चा की थी।

इस मीटिंग के दौरान वित्त मंत्रालय की तरफ से दिए गए नोट में कहा गया था कि ये छह एयरपोर्ट हाइली कैपिटल इंटेसिव हैं, और एक ही कंपनी को दे देना ठीक नहीं है। एक कंपनी को दो से ज्यादा एयरपोर्ट नहीं दिए जाने चाहिए।

इस मामले में वित्त मंत्रालय ने दिल्ली और मुंबई एयरपोर्ट के प्रेजिडेंट से भी संपर्क किया था। यहां जीएमआर ही केवल योग्य बिडर था, लेकिन दोनों ही एयरपोर्ट उसे नहीं दिए गए। उसी दिन वित्त मंत्रालय के नोट पर नीति आयोग ने भी अलग चिंता व्यक्त की। नीति आयोग का कहना था कि पीपीपी का मेमो सरकार की नीति के विरुद्ध है। जिस बिडर के पास तकनीकी क्षमता नहीं होगी वह सरकार की प्रतिबद्धता के अनुसार सेवाएं नहीं दे पाएगा।

वित्त मंत्रालय के सेक्रटरी एससी गर्ग की अध्यक्षता वाली कमेटी की तरफ से कहा गया कि पहले ही फैसला कर लिया गया है कि पहले के अनुभवों को बिडिंग का आधार नहीं बनाया जाएगा। बिड जीतने के एक साल बाद ही अडानी ग्रुप ने अहमदाबाद, मैंगलोर और लखनऊ एयरपोर्ट के कंसेशन अग्रीमेंट पर साइन कर दिया। बोली के मामले में अडानी ग्रुप ने जीएमआर ग्रुप, जुरिक एयरपोर्ट और कोच्चि इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड को काफी पीछे छोड़ दिया। इसलिए 50 साल के लिए छह एयरपोर्ट को संचालित करने का अधिकार अडानी को मिल गया।

अडानी ग्रुप आज देश का सबसे बड़ा प्राइवेट डिवेलपर है, जो कि इतने एयरपोर्ट का अधिकार रखता है। पिछले वित्त वर्ष में अहमदाबाद, मैंगलोर, लखनऊ, जयपुर, गुवाहाटी, तिरुवनंतपुरम और मंबई एयरपोर्ट से 7.90 करोड़ यात्रियों ने सफर किया था। इन एयरपोर्ट से देश का 34.10 डॉमेस्टिक ट्रैफिक गुजरता है।

सुब्रमण्यन स्वामी ने किया ट्वीट
इस बीच सुब्रमण्यन स्वामी ने ट्वीट किया है,
Subramanian Swamy
@Swamy39
Trapeze Artist Adani now owes Rs. 4.5 lakh crores as NPA to banks. Correct me if I am wrong. Yet his wealth is doubling every two years since 2016. Why can’t he repay the banks? May be like with the six airports he has bought he might soon buy out all the banks he owes money.

अडानी पर 4.5 लाख करोड़ का एनपीए है, और वर्ष 2016 से प्रति दो वर्ष में यह दोगुना हो रहा है। अडानी बैंको का कर्ज क्यों नहीं वापस कर रहा है? जैसे इसने छह एयरपोर्ट खरीदा वैसे ही उन बैंकों को खरीद लेगा, जिससे इसने कर्ज़ लिया है।

(लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं और इलाहाबाद में रहते हैं।)

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