Thursday, October 6, 2022

सत्येंद्र जैन केस में ईडी कर रही बेंच फिक्सिंग की कोशिश

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क्या प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) को बेंच फिक्सिंग या फोरम हंटिंग की अनुमति है? क्या ईडी उस जज के यहाँ से किसी भी मामले को ट्रान्सफर करा देगी जिसमें पीठासीन जज के सवालों का जवाब ईडी के पास न हों। ऐसा प्रावधान तो पीएमएलए में नहीं है। यह सवाल इसलिए खड़ा हो रहा है क्योंकि मनी लॉन्ड्रिंग केस में ईडी और सीबीआई ने सत्येंद्र जैन के खिलाफ केस दर्ज कर रखा है। विशेष जज की अदालत में जब इस मामले की सुनवाई हुई तो विशेष जज ने ईडी से कुछ कड़े सवाल किए, जिनका जवाब देने में ईडी के पसीने छूटने लगे। इस घटनाक्रम के बाद ईडी ने सीजेएम कोर्ट में इस केस को अन्य कोर्ट में ट्रांसफर करने की अर्जी लगा दी। सीजेएम कोर्ट ने केस ट्रांसफर करने पर कोई फैसला नहीं लिया। जबकि जैन के वकीलों ने सीजेएम कोर्ट से कहा था कि वो जल्द से जल्द इस मामले में तारीख दें ताकि जमानत पर सुनवाई आगे बढ़ सके।

जेल में बंद आम आदमी पार्टी के नेता सत्येंद्र जैन के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट जज को मामले को निचली अदालत के किसी और जज के पास ट्रांसफर करने के प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के आवेदन पर कल यानी 22 सितंबर, 2022 को सुनवाई करने और फैसला करने का निर्देश दिया। कोर्ट ने कहा कि ट्रांसफर आवेदन जल्द से जल्द लिया जाए, 22 सितंबर, 2022 को। हम प्रधान जिला न्यायाधीश राउज़ एवेन्यू को निर्देश देते हैं कि वे कल ट्रांसफर आवेदन पर विचार करें और इसका निपटारा करें।

जस्टिस डी.वाई. चंद्रचूड़, जस्टिस हिमा कोहली और जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा ने स्पष्ट किया कि प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के आदेश से व्यथित पक्ष के लिए कानून में उचित उपचार लेने का विकल्प खुला है। यह नोट किया गया कि जमानत आवेदन पर निर्णय लेने के लिए उपयुक्त फोरम ट्रांसफर आवेदन में प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश के निर्णय पर निर्भर करेगा। पीठ ने कहा कि हम स्पष्ट करते हैं कि पीड़ित पक्ष कानून में उपयुक्त उपचार की मांग कर सकता है। जमानत की सुनवाई का मंच जिला न्यायाधीश के निर्णय पर निर्भर करेगा।

सत्येंद्र जैन का प्रतिनिधित्व कर रहे सीनियर एडवोकेट कपिल सिब्बल और एएसजी एस.वी. राजू को सुनने के बाद पीठ ने स्पष्ट रूप से जैन की जमानत अर्जी या स्थानांतरण आवेदन की योग्यता के आधार पर निर्णय लेने से इनकार कर दिया। पीठ ने कहा कि सक्षम अदालत को इस पर गौर करना है। हालांकि, अदालत ने कहा कि 19 सितंबर, 2022 को स्थानांतरण आवेदन में नोटिस जारी करते समय, मामले को 30 सितंबर, 2022 को सूचीबद्ध करने का निर्देश देने के बजाय जल्दी सुनवाई का आदेश प्रधान जिला और सत्र न्यायालय को देना चाहिए था, खासकर जब जैन की जमानत आवेदन उसी के परिणाम पर निर्भर है।

यह देखते हुए कि ट्रांसफर आवेदन पर फैसला होने तक जैन की जमानत याचिका पर फैसला नहीं किया जा सकता है, पीठ ने प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राउज एवेन्यू को इस मामले की सुनवाई और निपटान कल (22 सितंबर, 2022) करने का निर्देश देना उचित समझा। एजेंसी ने जैन और अन्य के खिलाफ कथित आय से अधिक संपत्ति के मामले में पांच कंपनियों और अन्य से संबंधित 4.81 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की थी। कथित तौर पर से ये संपत्तियां अकिंचन डेवलपर्स, इंडो मेटलिम्पेक्स, पर्यास इंफोसोल्यूशंस, मंगलायतन प्रोजेक्ट्स और जे.जे. आदर्श संपदा आदि।

कपिल सिब्बल ने पीठ से कहा कि निचली अदालत के सामने अंतिम घंटे में ईडी ने जानबूझकर देरी से अर्जी लगाई,ताकि जैन की जमानत पर फैसला लटका रहे। ईडी ने मामले को किसी अन्य जज को ट्रांसफर करने के लिए कोई औपचारिक आवेदन भी दायर नहीं किया और ईडी की ओर से एएसजी कोर्ट में जुबानी कहा कि वो इस केस को अन्य कोर्ट में ट्रांसफर करने के लिए अर्जी लगा रहे हैं।

कपिल सिब्बल ने कहा कि किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता किसी भी चीज़ से अधिक महत्वपूर्ण है। इस पर सिब्बल की दलील का विरोध करते हुए ईडी की ओर से एएसजी एसवी राजू ने अदालत में कहा कि उनके पास मामले में ट्रांसफर की मांग करने के निर्देश हैं और उचित समय पर एक आवेदन भी दायर किया जाएगा। सिब्बल ने एएसजी को जवाब दिया कि निचली अदालत में दो साल से इस मामले की सुनवाई हो रही है और अगर इसे अभी किसी अन्य कोर्ट को ट्रांसफर किया गया तो पूरी कार्यवाही को फिर से उस कोर्ट को सुनना होगा। तब तक हमारे मुवक्किल की जमानत भी लटकी रहेगी। इस पर पीठ ने कहा, व्यक्ति की स्वतंत्रता पवित्र है, और इसलिए हमने इस मामले को तत्काल आधार पर लिया है। इसके बाद पीठ ने दिल्ली के सेशन जज से इस मामले को कल गुरुवार को ही तय करने को कहा।

ईडी की चार्जशीट में कहा गया है कि सत्येंद्र जैन ने 14 फरवरी से 31 मई, 2017 की अवधि के दौरान दिल्ली सरकार में मंत्री के पद पर रहते हुए अपनी आय के ज्ञात स्रोतों से अधिक संपत्ति अर्जित की थी।

दरअसल सोमवार 19 सितंबर को जैन के मामले में बड़ी नौटंकी हुई। एएसजी राजू ने प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश (सीजेएम) विनय कुमार गुप्ता को केस ट्रांसफर वाली अर्जी लगाए जाने से मौखिक रूप से अवगत कराया था, जिसके बाद इस मामले में प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया गया। उसी समय सीजेएम कोर्ट ने मामले की सुनवाई 30 सितंबर तक के लिए टाल दी। इस तरह विशेष जज की कोर्ट सत्येंद्र जैन की जमानत पर 30 सितंबर तक कोई फैसला नहीं कर सकती थी।

इस मामले में जैन के वकील सुशील कुमार गुप्ता ने अपने मुवक्किलों की ओर से इस तथ्य पर हैरानी व्यक्त करते हुए नोटिस स्वीकार किया कि ईडी ने इस मामले में पूरे मुकदमे को ट्रांसफर करने की मांग की है। गुप्ता ने कहा कि हमें यह आभास दिया गया था कि यह जमानत आवेदन के मामले में अर्जी थी। लेकिन अब केस दूसरी अदालत में ट्रांसफर करने की मांग जा रही है। गुप्ता ने अदालत से छोटी अवधि की तारीख देने के लिए कहा, क्योंकि जमानत याचिका पर 40 दिनों से सुनवाई चल रही थी और “अपने अंतिम चरण में थी। लेकिन सीजेएम कोर्ट ने 30 सितंबर की तारीख दी।

ईडी ने विशेष जज की अदालत से इस मामले के ट्रांसफर का अनुरोध खास वजहों से किया। इस मामले में सुनवाई करते हुए विशेष जज गीतांजलि गोयल ने ईडी से कड़े सवाल किए थे। जैन की जमानत याचिका का रिव्यू करते हुए, विशेष जज गीतांजलि गोयल ने मामले में अपराध के बारे में पूछा। जज ने एएसजी से पूछा कि इस मामले में अपराध कहां हुआ है, बताएं? क्या 4.61 करोड़ रुपये कथित आरोपी की आय हो सकती है, जबकि सीबीआई ने अपने आरोप पत्र में 1.46 करोड़ रुपये का उल्लेख किया है? क्या यह पैसा डीए मामले में उस पैसे से अधिक हो सकता है?

दरअसल, आरोपपत्र में सीबीआई और ईडी ने जिस रकम का जिक्र किया है, उनमें काफी बड़ी असमानता है। अदालत ने इसी मुद्दे पर ईडी से सवाल किए थे। ईडी के विशेष जज के कड़े सवालों के जवाब नहीं थे।

जैन के वकीलों का आरोप है कि पहले 13 सितंबर और फिर 15 सितंबर को ईडी की ओर से इस मामले में तारीख पर तारीख के लिए रास्ता बनाया गया। जानबूझ कर कोर्ट को देर से बताया गया कि मामले को दूसरे कोर्ट में ट्रांसफर के लिए अर्जी लगाई जा रही है। सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को ईडी की ओर से स्वीकार भी किया गया कि अभी तक विशेष जज की कोर्ट से मामले को ट्रांसफर करने की अर्जी नहीं लगाई गई है।

ईडी ने इससे पहले 13 सितंबर को इस मामले में आगे की दलीलों के लिए स्थगन की मांग की थी। जमानत पर सुनवाई 20 अगस्त को शुरू हुई जब एजेंसी ने जैन की याचिका का विरोध करते हुए अपनी लिखित दलीलें दाखिल कीं। अदालत जैन के अलावा मामले के सह आरोपी वैभव जैन और अंकुश जैन की जमानत अर्जी पर भी सुनवाई कर रही है। सीबीआई ने आय से अधिक संपत्ति के मामले में कथित तौर पर 1.47 करोड़ रुपये की संपत्ति जमा करने के आरोप में जैन के खिलाफ आरोप पत्र दायर किया था। बाद में ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग जांच के सिलसिले में 4.81 करोड़ रुपये की संपत्ति कुर्क की।

ईडी ने आप नेता सत्येंद्र जैन और दो अन्य को भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 2017 में दर्ज सीबीआई की एफआईआर के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया था। इसमें उन पर कथित रूप से जुड़ी चार कंपनियों के जरिए मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया गया था। इतना ही नहीं, ईडी ने 16 सितंबर को आबकारी नीति मामले में सत्येंद्र जैन से तिहाड़ जेल के अंदर पूछताछ की थी।

सत्येंद्र जैन के लिए यह राहत वाली खबर है, क्योंकि दिल्ली सीजेएम कोर्ट ने पिछली तारीख पर इस केस को ट्रांसफर करने पर कोई फैसला नहीं लिया और मामले को 30 सितंबर तक टाल दिया। जबकि जैन की जमानत याचिका पर भी सुनवाई हो रही है। तकनीकी रूप से सत्येंद्र जैन को कम से कम 30 सितंबर तक जेल में रहना होगा। लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने जल्द सुनवाई का आदेश देकर उनकी जमानत की सुनवाई भी जल्द होने का रास्ता साफ कर दिया।

(वरिष्ठ पत्रकार जेपी सिंह की रिपोर्ट।)

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