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पंजाब-हरियाणा से उठी किसान लहर हुई तेज, 3 दिसंबर को मनेगा पूरे देश में कॉरपोरेट विरोध दिवस

मोदी सरकार के तीनों कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब से शुरू हुआ किसान आंदोलन हरियाणा से होते उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र आदि राज्यों से होते हुए पूरे देश में फैल चुका है और लाखों किसान बीती 26 नवंबर से राजधानी दिल्ली को बाहर से घेर कर बैठे हैं। किसानों के आंदोलन को देखते हुए मजबूर होकर सरकार ने मंगलवार, 1 दिसंबर को 35 किसान संगठनों के प्रतिनिधियों को वार्ता के लिए बुलाया था, किंतु वह बेनतीजा रही और अपनी मांगों पर कायम रहते हुए किसान संगठनों ने अपना प्रदर्शन जारी रखने का एलान कर दिया। किसानों का आंदोलन और और तेज होता जा रहा है। इसी कड़ी में मध्य प्रदेश में भोपाल गैस त्रासदी की 36वीं बरसी 3 दिसंबर को ‘कॉरपोरेट विरोध दिवस’ (एंटी कॉरपोरेट डे) के रूप में मनाने का एलान किया है। इस बारे में नर्मदा बचाओ आंदोलन की नेता मेधा पाटकर ने ट्वीट कर जानकारी दी है।

मध्य प्रदेश के 52 जिलों में 3 दिसंबर को लाखों किसान एक साथ सड़कों पर, जिला कलेक्टर ऑफिस के सामने, नुक्कड़ और चौराहों पर धरना देंगे।

इस बारे में जब किसान संघर्ष कोर्डिनेशन कमेटी (एआइकेएससीसी) के सदस्य डॉ. सुनीलम से फोन पर बात की गई तो उन्होंने बताया कि हम इस बात को मुख्यता से दर्ज करवाएंगे कि क्या होता है जब कॉरपोरेट घरानों को खुली छुट दी जाती है, जैसा कि भोपाल में यूनियन कार्बाइड में हुआ था, जिसमें आज तक किसी को दोषी या जिम्मेदार नहीं ठहराया गया, जबकि  भोपाल गैस कांड में 30 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। यह आंदोलन तेज होता जाएगा जब तक कि किसान विरोधी यह कानून वापस नहीं लिए जाते। डॉ. सुनीलम ने कहा कि, यह विरोध प्रदर्शन मोदी और उनके कॉरपोरेट मित्रों अडानी और अंबानी के खिलाफ़ महाराष्ट्र, झारखंड, तेलंगाना सहित देश के अन्य राज्यों में भी किया जाएगा। इसमें देश भर के लाखों किसान शामिल होंगे।

इस धरना प्रदर्शन के बारे में ग्वालियर और चंबल के कलेक्टर को ज्ञापन दिया गया है। सीपीआई के अशोक तिवारी चंबल में इस प्रदर्शन को लीड करेंगे। अशोक तिवारी ने कहा कि हम गांव वालों से संपर्क कर रहे हैं और कलेक्टर ऑफिस के बाहर धरने पर बैठेंगे। इस धरने में मंडी बोर्ड के लोग भी शामिल होंगे।

वहीं एआइकेएससीसी द्वारा जारी बुलेटिन में कहा गया है कि किसान विरोधी कृषि कानून, बिजली बिल कानून और केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ चल रहे देशव्यापी इस आंदोलन को महारष्ट्र में 3 दिसंबर को और तीव्र किया जाएगा। इसी संदर्भ में एआइकेएससीसी महारष्ट्र शाखा ने सभी सामान सोच वाली किसान यूनियनों, कार्य समूहों को, महिला संगठनों और युवाओं से भारी संख्या में सड़कों पर निकाल कर चक्काजाम करने और प्रदर्शन कर किसान आंदोलन के प्रति समर्थन जाहिर करने का आह्वान किया है।

सीपीआई के राष्ट्रीय सचिव और ऑल इंडिया किसान सभा के राष्ट्रीय महासचिव अतुल अंजान ने फोन पर बताया, “बहुराष्ट्रीय कंपनियों की देसी और परदेसी पूंजी’ यह युक्ति मेरा दिया हुआ वाक्य है। आज से आठ वर्ष पहले जब मैंने नारा दिया था- खेती बचाओ, गांव बचाओ, किसान बचाओ, देश बचाओ’, तब उस समय कुछ शब्दों को भी मैंने गढ़ा था। जैसे- कोर्पोरेटाइजेशन ऑफ एग्रीकल्चर को मैंने कहा था– खेती का कंपनीकरण। और जैसे हार्स ट्रेडिंग-घोड़ा खरीद प्रवृत्ति, तो ये जो हमारे देश में जो कॉरपोरेट पूंजी और उससे जुड़े लोगों के खिलाफ जो आंदोलन हैं, उसमें पूंजीपतियों उनके साथ-साथ मोदी का भी पुतला जलाया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन किसी एक राज्य तक सीमित नहीं है, पूरे देश में हो रहा है। आज झारखण्ड और बिहार में प्रदर्शन हो रहा है।

उन्होंने कहा कि आज रांची में सभी वामपंथी दलों की बैठक भी हो रही है। अतुल अंजान ने कहा कि 2 से 10 दिसंबर तक पूरे देश में प्रतिरोध दिवस मनाने का आह्वान किया गया है। लोग इस दौरान अलग-अलग तरीके से प्रतिरोध करेंगे। उन्होंने कहा कि यह मेरा ही आइडिया था कि किसान अपने पशु और उनके भोजन को साथ लाकर प्रदर्शन करें और इसको लोगों ने शुरू कर दिया है। दिल्ली-गाज़ियाबाद बॉर्डर पर कुछ लोग गाय लेकर आ गए हैं। आगे और लोग अपने पशुओं के साथ वहां जमा होंगे, वे वहीं गाय का दूध निकालेंगे और बेच कर धन इकठ्ठा करेंगे। उन्होंने कहा कि बंगाल में भी आज प्रतिरोध दिवस है। आज बंगाल में मोदी का पुतला दहन कार्यक्रम है, उसके बाद किसी दिन गवर्नर निवास तक मार्च का भी कार्यक्रम है। अतुल अंजान ने कहा कि अब किसान देश के तमाम बड़े और प्रतिष्ठित लोग जिनमें, पत्रकार, लेखक, रंगकर्मी आदि लोगों का हस्ताक्षर लेने के लिए देश के अलग-अलग शहरों में डेस्क लगाएंगे।

इस बीच खाप पंचायत के बलवंत फौगाट ने कहा, “फौगाट खाप किसानों का समर्थन करती है। आज हम टिकरी बॉर्डर पर जा रहे हैं। हम तीनों नए कृषि क़ानूनों के खिलाफ किसानों के आंदोलन का समर्थन करते हैं। हम चाहते हैं कि जल्द से जल्द किसानों की मांग मानी जाए।”

वहीं, आज चंडीगढ़ में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर के आवास पर घेराव कर रहे युवा कांग्रेस कार्यकर्ताओं पर पुलिस ने वॉटर कैनन का इस्तेमाल किया।

कार्यकर्ताओं की मांग है कि मुख्यमंत्री प्रदर्शनकारी किसानों के खिलाफ कथित रूप से बल प्रयोग किए जाने के लिए किसानों से माफी मांगें।

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु के वकील सिविल कोर्ट के सामने कृषि कानूनों के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन कर रहे हैं।

किसान नेता भानु प्रताप सिंह ने कहा, “जब तक हमारी पीएम मोदी से आमने-सामने बैठकर बात नहीं होगी तब तक आंदोलन जारी रहेगा। जब हरियाणा-पंजाब के किसानों को दिल्ली आने से रोका गया तो हमने जल्दबाजी में दिल्ली कूच किया। हम तैयारी से नहीं आए थे पर अब यहीं रहेंगे और तैयारी करते रहेंगे।”

गौरतलब है कि मोदी सरकार द्वारा लाए गए तीन कृषि कानूनों के खिलाफ पंजाब के किसानों ने जो प्रदर्शन शुरू किया था हरियाणा में खट्टर सरकार द्वारा तमाम हथकंडे, रुकावट और पूरी ताकत लगाकर किसानों के दिल्ली मार्च को रोकने के प्रयासों को लांघते हुए वह अब दिल्ली सीमा पर पहुंच चुका है और दिल्ली को तीनों ओर से घेर लिया है। पंजाब से शुरू हुआ यह आंदोलन अब पूरे देश में फैल चुका है और देशभर के लाखों किसान इस आंदोलन से जुड़ गए हैं। जो किसान दिल्ली नहीं आ सके वे अपने-अपने राज्यों में मोदी सरकार की पूंजीवादी और किसान विरोधी नीतियों के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं।

(पत्रकार और कवि नित्यानंद गायेन की रिपोर्ट।)

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This post was last modified on December 2, 2020 7:17 pm

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