आत्मसमर्पण से पहले गौतम नवलखा ने लिखा खुला ख़त, कहा- मेरी सोच ही बन गयी है मेरे शोषण की वजह

(भीमा कोरेगाँव मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आज सामाजिक कार्यकर्ता गौतम नवलखा की अग्रिम ज़मानत ख़ारिज कर दी है। इसके साथ ही कोर्ट ने उन्हें सरेंडर करने के लिए तीन हफ़्ते का समय दिया है। सरेंडर से पहले नवलखा ने एक ख़त लिखा है। तमाम मीडिया संस्थानों को लिखे गए इस ख़त को यहाँ दिया जा रहा है- संपादक)

मैं शुक्रगुज़ार हूँ सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश अरुण मिश्रा और एमआर शाह का जिन्होंने मुझे एनआईए के समक्ष आत्मसमर्पण करने के लिए 3 हफ़्ते का वक़्त दिया है। मैं उच्च वकील अभिषेक मनु सिंघवी और कपिल सिब्बल का भी शुक्रगुज़ार हूँ जिन्होंने हमारा पक्ष रखा। इसके साथ ही मेरे क़रीबी दोस्तों-वकीलों का भी शुक्रिया जिन्होंने अपना क़ीमती वक़्त मेरा पक्ष रखने में लगाया।

अब जबकि मुझे 3 हफ़्ते के अंदर आत्मसमर्पण करना है, मैं ख़ुद से सवाल कर रहा हूँ: क्या मैं ऐसी उम्मीद करने की हिम्मत भी कर सकता हूँ कि मैं मुलज़िम होने के बोझ से आज़ाद हो पाऊँगा, या ये कार्यवाही भी एक साज़िश बन कर रह जाएगी और लंबित पड़े तमाम ऐसे मामलों में शामिल हो जाएगी? क्या सह-मुलज़िम और उनके जैसे और लोगों को अपनी आज़ादी वापस मिल सकेगी? ये सवाल इसलिए कौंधते हैं क्योंकि हम ऐसे वक़्त में जी रहे हैं जहाँ सामाजिक अधिकारों का लगातार हनन किया जा रहा है, और जहाँ सिर्फ़ एक नरेटिव काम कर रहा है, जिसे सार्वजनिक ज़िंदगी के भद्दे पन की शह मिली हुई है।

यूएपीए के इस भयानक क़ानून के पास यह अधिकार है कि यह किसी संगठन और उसकी विचारधारा पर प्रतिबंध लगा सकता है। लिहाज़ा, सबसे ग़ैर-हानिकारक और जायज़ बातचीत भी सरकार की नज़र में ग़ैर-क़ानूनी बन जाती है। यूएपीए ऐसा भयानक क़ानून बन गया है, जो कार्यवाही या उसके नतीजे का इंतज़ार किए बग़ैर सज़ा दे सकता है।

इसलिए मैं जानता हूँ कि मैं उन हज़ारों में शामिल हो गया हूँ, जिनका उनकी सोच की वजह से शोषण होता है।

मेरे हिसाब से ‘टेस्ट क्रिकेट’, क्रिकेट का सबसे अच्छा फ़ॉर्म है। जहाँ सहन-शक्ति, धैर्य, फ़ेयर प्ले, साहस और खुलने (redemption) से खेल की शोभा बढ़ती है। यही वो गुण हैं, जिनकी उम्मीद मैं ज़िंदगी के इस ‘टेस्ट मैच’ में ख़ुद से करता हूँ। मेरे ऊपर सबसे ज़्यादा दबाव ख़ुद को निर्दोष साबित करने का है।

मेरे दोस्तों, साथियों और परिवार का शुक्रिया, जो इस दौरान मेरे साथ खड़े रहे। मैं आप सब का क़र्ज़दार हूँ।

लियोनार्ड कोहेन की आवाज़ में गाना ‘Anthem’ सुनिएगा।

घंटी बजाओ

वो अब भी बज सकती है

भूल जाओ

अपनी बेशकीमती नेमतों को

हर चीज़ में दरार है

हर एक चीज़ में

लेकिन रोशनी वहीं से आती है! 

गौतम नवलखा

16 मार्च,2020

नई दिल्ली

(तमाम मीडिया संस्थानों के लिए जारी किए गए गौतम नवलखा के इस अंग्रेजी पत्र का हिंदी अनुवाद सत्यम तिवारी ने किया है।)

This post was last modified on March 16, 2020 8:46 pm

Share
Published by
%%footer%%