Sunday, May 22, 2022

मुगलसराय विधानसभा की ग्राउंड रिपोर्टः मुद्दों की नज़र में कौन मारेगा बाजी?

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चंदौली/बनारस। बीते रविवार को दोपहर के करीब दो बज रहे थे। मैं केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री डॉ. महेंद्र नाथ पांडेय के संसदीय क्षेत्र चंदौली की विधानसभाओं का जायजा लेने अपनी स्कूटी से निकल चुका था। वाराणसी जंक्शन, जिसे स्थानीय बोलचाल में कैंट रेलवे स्टेशन भी कहते हैं, से करीब चार किलोमीटर दूर चौकाघाट पानी टंकी के ठीक पहले पुराना जीटी रोड पर पुलिस प्रशासन के दर्जनों लोग काफी सक्रिय दिखे। उनकी यह सक्रियता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यक्रम को लेकर थी।

राजघाट पानी टंकी के पास मुस्तैद ट्रैफिक पुलिसकर्मी

प्रधानमंत्री स्थानीय संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित हो रही भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के ‘बूथ विजय सम्मेलन’ को करीब दो घंटे बाद संबोधित करने वाले थे। भाजपा के नेता और कार्यकर्ता निजी एवं सार्वजनिक साधनों से वहां का रुख कर रहे थे। इसी दौरान मुझे भाजपा के चुनाव निशान ‘कमल का फूल’ के झंडों वाले दर्जनों ई-रिक्शा दिखाई दिए जो कार्यक्रम स्थल की ओर जाने वाले मार्ग से वापस आ रहे थे।

भाजपा कार्यकर्ताओं को छोड़कर वापस राजघाट की ओर जाते ई-रिक्शा

इन्हीं में से एक के चालक वसीम से मैंने बात की तो पता चला कि वे भाजपा कार्यकर्ताओं को भाड़े पर राजघाट से लेकर आए थे। उन्होंने ही उनके ई-रिक्शों पर ये झंडे लगा दिए हैं। वसीम ने आगे कहा, ‘अब वे लोग उतर गए हैं। आगे जाकर हम ये झंडे उतार देंगे।’ मीडिया में आई रिपोर्टों के मुताबिक ‘बूथ विजय सम्मेलन’ में अधिकतर कुर्सियां खाली रहीं और लोग प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भाषण के बीच ही कुर्सी छोड़कर वापस जाने लगे थे। 

वसीम से जानकारी लेने के बाद मैं चंदौली के मुगलसराय विधानसभा की ओर बढ़ गया। कज्जाकपुरा मोड़ के पास कई सालों से फ्लाईओवर का निर्माण हो रहा है लेकिन यह कब पूरा होगा, इसकी भविष्यवाणी कोई नहीं कर रहा। इसकी वजह से आए दिन लोगों को जाम की समस्या से जूझना पड़ता है। हालांकि रविवार होने की वजह से मुझे इस समस्या से राहत मिल गई थी।

कज्जाकपुरा मोड़ के पास बन रहा फ्लाईओवर

काशी रेलवे स्टेशन से ठीक पहले भदऊ चुंगी के पास बाईं ओर भाजपा की एक बड़ी प्रचार होर्डिंग दिखाई दी। ऐसी ही प्रचार होर्डिंग बनारस शहर के अन्य इलाके में भी लगी है। भदऊ चुंगी के पास वाली होर्डिंग में केंद्र सरकार की ‘आयुष्मान भारत योजना’ के तहत गरीबों को मुफ्त उपचार मिलने का दावा किया जा रहा है जबकि इसकी हकीकत कुछ और ही है।

भदऊ चुंकी के पास लगी भाजपा की प्रचार होर्डिंग

इस योजना के तहत बने हेल्थ कार्ड के जरिए इलाज कराने वाले गरीबों को संबद्ध निजी चिकित्सालयों में भर्ती होने से पहले ही एकमुश्त दस हजार रुपये जमा करने पड़ते हैं। कार्ड से इलाज के खर्च की स्वीकृति मिलने के बाद ही अस्पताल जमा की गई धनराशि को वापस करते हैं। अगर संबंधित विभाग या अधिकारी से स्वीकृति नहीं मिली तो इलाज का पूरा खर्च मरीज को खुद भरना पड़ता है।

‘धान का कटोरा’ कहे जाने वाले चंदौली जिले में बनारस से प्रवेश करने के लिए देश की सबसे लंबी नदी ‘गंगा’ को पार करना पड़ता है। वाराणसी जंक्शन से करीब 11 किलोमीटर दूर राजघाट से लगायत ‘गंगा’ नदी पर एक सेतु का निर्माण किया गया है जिसे राजघाट पुल या शास्त्री पुल कहते हैं।

पुराना जीटी रोड पर स्थित राजघाट पुल

जैसे ही हम इसे पार करते हैं चंदौली जिले का पड़ाव चौराहा आपको वहां की यातायात व्यवस्था का परिचय कराता मिलता है जो अक्सर लोगों के लिए मुसीबत का सबब बनता रहता है। इस चौराहे की दम घोंटू हवा आपको यहां की स्वास्थ्य व्यवस्था का भरपूर संकेत देती है। पास में भाजपा की मोदी सरकार के दौरान बना करोड़ों रुपये का ‘पंडित दीन दयाल उपाध्याय स्मारक स्थल’ आपको भारतीय समाज में फैले वर्गीय चरित्र और उनके बीच की खाईं को रेखांकित करता है।

चंदौली जिले के प्रवेश द्वार पर वाराणसी विकास प्राधिकरण की ओर से लगवाया गया ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मारक स्थल’ का बोर्ड

पड़ाव चौराहा से सोनभद्र, मिर्जापुर, चुनार, रामनगर, मुगलसराय, चंदौली, सकलडीहा, धानापुर, चहनिया, सैयदराजा, चकिया आदि स्थानों पर जाने के लिए वाहन उपलब्ध होते हैं। यहां से मुगलसराय जंक्शन और नगर की दूरी आठ किलोमीटर के करीब है। हालांकि भाजपा सरकार ने सरकारी दस्तावेजों में मुगलसराय जंक्शन और नगर पालिका का नाम बदलकर क्रमशः पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन और पंडित दीन दयाल उपाध्याय नगर रख दिया है।

मुगलसराय जंक्शन की फोटो

पड़ाव चौराहे के पास एक चाय की दुकान पर मेरी मुलाकात स्थानीय पत्रकार सुभाष कुमार मौर्य से हुई। मैंने उनसे मुगलसराय विधानसभा क्षेत्र के चुनावी माहौल को समझने की कोशिश की। उन्होंने एक वाक्य में कह दिया, ‘’यहां पर लड़ाई भाजपा और सपा के बीच है।” मुगलसराय विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र से भाजपा ने रमेश जायसवाल को टिकट दिया है जबकि समाजवादी पार्टी ने चंद्र शेखर यादव को अपना उम्मीदवार बनाया है।

पेशे से व्यापारी रमेश जायसवाल भाजपा (काशी क्षेत्र) के उपाध्यक्ष एवं मुगलसराय नगर पालिका परिषद की पूर्व चेयरमैन रेखा जायसवाल के पति हैं। बनिया समुदाय में शामिल जायसवाल उत्तर प्रदेश में अन्य पिछड़ा वर्ग में शामिल है। मुगलसराय विधानसभा क्षेत्र में जायसवाल, गुप्ता (तेली) और केशरी समुदाय का एक बहुत बड़ा वोटबैंक है और इन्हें भाजपा के समर्थक के रूप में देखा जाता है। वहीं, चंद्र शेखर यादव समाजवादी युवजन सभा के जिलाध्यक्ष और छात्र राजनीति के चेहरे हैं।

मैंने सुभाष कुमार मौर्य के दावों को पूर्व के चुनावी आंकड़ों और उम्मीदवारों की छवि की कसौटी पर समझने की कोशिश की और उनसे इस आधार पर मुगलसराय के पूर्व विधायक और कांग्रेस उम्मीदवार छब्बू पटेल और बसपा उम्मीदवार इरशाद अहमद को लड़ाई से बाहर होने का कारण पूछा तो उन्होंने कहा, “कांग्रेस उम्मीदवार छब्बू पटेल भाजपा से तीन बार विधायक रहे हैं। उनकी छवि भी ठीक है। वह अपने संबंधों के आधार पर भाजपा को नुकसान पहुंचा सकते हैं। वहीं, इरशाद अहमद मुस्लिम वोटों की बहुतायत संख्या को समाजवादी पार्टी की ओर जाने से रोक सकते हैं।”

इसको और समझने के लिए मैंने पूर्व के चुनावी आंकड़ों का अध्ययन करना मुनासिब समझा। 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी की साधना सिंह 87401 (37.89 प्रतिशत) मत पाकर विधायक निर्वाचित हुई थीं। सपा के बाबूलाल 74158 (32.15 प्रतिशत) मतों के साथ दूसरे नंबर पर रहे थे। बसपा के तिलकधारी 57219 (24.81 प्रतिशत) मतों के साथ तीसरे नंबर पर रहे थे। सपा से गठबंधन होने की वजह से कांग्रेस ने इस सीट पर चुनाव नहीं लड़ा था। 2022 में इन उम्मीदवारों में से कोई भी चुनाव नहीं लड़ रहा है।

2012 के विधानसभा चुनाव में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के बब्बन चौहान 59083 (31.54 प्रतिशत) मत पाकर मुगलसराय से विधायक बने थे। सपा के बाबूलाल 43643 (23.3 प्रतिशत) मतों के साथ दूसरे नंबर पर रहे थे। भाजपा के छब्बू पटेल को 42210 (22.53 प्रतिशत) मतों के साथ तीसरे नंबर पर संतोष करना पड़ा था। कांग्रेस के उम्मीदवार सतीश को 15873 (8.47 प्रतिशत) मत मिले थे।

पिछले दो विधानसभा चुनावों में से छब्बू पटेल ही ऐसे उम्मीदवार हैं जो इस बार भी चुनावी मैदान में हैं। छब्बू पटेल 1991, 1993 और 1996 में भाजपा के विधायक निर्वाचित हो चुके हैं। कुछ साल पहले उन्होंने बसपा का दामन थाम लिया था। टिकट की संभावना नहीं बनने पर उन्होंने करीब छह महीने पहले घर वापसी करते हुए कांग्रेस का दामन थाम लिया और इस समय उसके टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं।

यह माना जा रहा है कि छब्बू पटेल मुगलसराय विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र में अपने व्यक्तिगत संबंधों की वजह से भाजपा के वोटबैंक में बड़े पैमाने पर सेंध लगा सकते हैं। लेकिन, उनकी यह सेंध इतनी बड़ी नहीं होगी कि उन्हें जीत दिला सके! उत्तर प्रदेश में चल रहा सत्ता विरोधी रुझान सपा गठबंधन की ओर है। यही वजह है कि राजनीतिक विश्लेषक और पत्रकारों के साथ-साथ वोटर भी कदम फूंक-फूंककर रख रहे हैं।   

समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार चंद्रशेखर यादव की जीत को लेकर स्थानीय पत्रकार सुभाष कुमार मौर्य आश्वस्त दिखाई नहीं देते हैं। उनका कहना है, “नाथूपुर गांव निवासी परवेज अहमद जोखू सपा को नुकसान पहुंचा सकते हैं क्योंकि वह खुद चुनाव लड़ना चाहते थे लेकिन उन्हें टिकट नहीं मिला। इस समय वह नाराज चल रहे हैं।”

सुभाष मौर्य का यह आकलन मुझे उस समय बेबुनियाद प्रतीत होता है जब मैंने परवेज अहमद जोखू का ट्वीटर पोस्ट देखा। परवेज अहमद जोखू समाजवादी पार्टी के जिला उपाध्यक्ष हैं और मुगलसराय के विधानसभा प्रभारी हैं। सपा सरकार के दौरान उत्तर प्रदेश हज समिति के सदस्य भी रह चुके हैं। वह लगातार सपा उम्मीदवार चंद्रशेखर यादव के समर्थन में जनसंपर्क कर रहे हैं और उसकी फोटो लगातार पोस्ट कर रहे हैं।

चंद्रशेखर आजाद के समर्थन में परवेज अहमद जोखू की पोस्ट

मुगलसराय सीट पर सपा गठबंधन को लेकर विवाद जरूर है। ओम प्रकाश राजभर के नेतृत्व वाली सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) का उम्मीदवार राजू प्रजापति मैदान में है। इस संबंध में जब राजू प्रजापति से बात की गई तो उन्होंने साफ कहा कि उन्हें सुभासपा अध्यक्ष की ओर से पर्चा वापस लेने के लिए कोई निर्देश नहीं आया था। बता दें कि राजू प्रजापति भागीदारी पार्टी (पी.) के विधि प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के अध्यक्ष प्रेमचंद प्रजापति के निर्देश पर उन्होंने सुभासपा के उम्मीदवार के रूप में नामांकन किया था। सुभासपा और भागीदारी पार्टी (पी.) के पदाधिकारी और कार्यकर्ता हमारे साथ हैं।

पड़ाव चौराहे पर चुनावी चर्चा के बाद मैं मुगलसराय की तरफ आगे बढ़ा। दाहिने लेन पर ट्रकों की कतारें यह बताने के लिए काफी थीं कि मुगलसराय से वाराणसी आने वाले यात्रियों को घंटों तक लगे रहने वाले इस जाम से हर दिन रू-ब-रू होना पड़ता होगा। ज्यों-ज्यों मैं आगे बढ़ रहा था, त्यों-त्यों चंधासी कोयला मंडी की आहट सड़क किनारे पड़ी राखों से मिल रही थी।

सड़क पर लगी ट्रकों की कतारें

डांडी गांव पार करने के बाद दाहिनी ओर सड़क किनारे घंटावीर बाबा का मंदिर दिखाई दिया जहां लोग अपनी मुरादें मांग रहे थे। इस मंदिर की परंपरा है कि जिन लोगों की मुरादें पूरी हो जाती हैं, वे लोग अपनी क्षमता अनुसार घंटा बांध जाते हैं और मंदिर पर मुर्गा चढ़ाकर छोड़ देते हैं। मुर्गे मंदिर के चारों तरफ घूमते हुए दिखाई देते हैं।

मंदिर के पास ही ठेले पर ब्रेड-पकौड़ा बेच रहे श्याम लाल से मैंने मुगलसराय के राजनीतिक हालात को जानने की कोशिश की तो उन्होंने साफ कहा कि महंगाई ने उनके जैसे लोगों की कमाई को असर डाला है। तेल दो सौ रुपये को भी पार कर गया है। ऐसे में कोई राहत नहीं मिल रही है। जब मैंने उनसे वोट किसे देंगे, पूछा तो वह किसी भी पार्टी का नाम लेने से कतरा गए।

घंटावीर बाबा मंदिर

मुगलसराय की तरफ आगे बढ़ने पर यह साफ दिखाई दे रहा था कि रियल स्टेट की कॉर्पोरेट कंपनियां चंदौली जिले में भी बड़े पैमाने पर अपना व्यवसाय फैला रही हैं। राख, कचड़ा और पानी से पटी रहने वाली खाली जमीन रेजिडेंसियल कॉम्पलेक्स, शिक्षण संस्थान और कॉम्प्लेक्स में तब्दील हो चुकी हैं लेकिन कोयले की ट्रकों समेत चंधासी कोयला मंडी से निकलने वाली दमघोंटू राख से निजात की कोई पहल दिखाई नहीं देती।

मुगलसराय के रास्ते में ही सड़क किनारे मुस्लिम आबादी बहुल दुलहीपुर गांव है जहां हमेशा चहल पहल दिखाई देती है। सतपोखरी गांव में राष्ट्रीय ग्रामीण पेयजल कार्यक्रम के तहत निर्मित एक पानी की टंकी का लोकार्पण मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा 9 अक्टूबर 2021 को होना बताया गया है।

पानी की टंकी

वर्ष 2014-15 में स्वीकृत और 463.17 लाख रुपये की लागत वाली सतपोखरी ग्राम पाइप पेयजल योजना को सुचारू रूप से संचालित करने की जिम्मेदारी निभाने वाले सईद ने बताया कि लोकार्पण के समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ मौके पर नहीं आए थे। केंद्रीय मंत्री महेंद्र नाथ पांडेय मौके पर जरूर मौजूद थे। गांव में पानी की आपूर्ति पहले से ही हो रही थी लेकिन पिछले चार महीने से इस नई टंकी से पानी की आपूर्ति हो रही है। ग्राम प्रधान ने मुझे और एक व्यक्ति को पानी आपूर्ति को सुचारू ढंग से संचालित करने के लिए नियुक्त किया है।

सतपोखरी गांव के विकास की बात करें तो यहां की हालत बहुत ही खराब है। इस गांव की ओर जाने वाली सड़कें गड्ढों में तब्दील हो चुकी हैं। झुके हुए विद्युत पोल के सहारे सैकड़ों घरों में विद्युत आपूर्ति हो रही है। इसके बावजूद इसका संज्ञान लेने वाला कोई नहीं है।

सतपोखरी गांव को जाने वाला रास्ता एवं सतपोखरी गांव विद्युत आपूर्ति की व्यवस्था।

चंधासी कोयला मंडी के बीच बना पुलिस सहायता केंद्र कोयले की राख से काला हो चुका है। राष्ट्रीय राजमार्ग से गुजरने वाली गाड़ियों से उड़ने वाली राख कभी-कभी दुर्घटना का कारण बन जाती है। इसके बावजूद राहगीरों को इससे राहत दिलाने की कोई खास पहल नहीं की गई है।

चंधासी कोयला मंडी स्थित पुलिस सहायता केंद्र

चंधासी कोयला मंडी से आगे बढ़ने पर कोयले की राख का प्रभाव जैसे ही कम होता है दाहिनी ओर सड़क किनारे कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार छब्बू पटेल का केंद्रीय चुनाव कार्यालय दिखाई पड़ता है। प्रचार होर्डिंग के सहारे बने प्रवेश द्वार पर कांग्रेस नेताओं के बीच में उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री पं. कमलापति त्रिपाठी की तस्वीर दिखाई देती है जबकि उनके परिवार ने कांग्रेस का दामन छोड़कर ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का दामन थाम लिया है। तृणमूल कांग्रेस इस विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव का समर्थन कर रही है।

कांग्रेस उम्मीदवार छब्बू पटेल का केंद्रीय चुनाव कार्यालय

प्रथम तल पर स्थित कांग्रेस उम्मीदवार के चुनावी कार्यालय में प्रवेश करने पर वहां मेरी मुलाकात पार्टी के जिला सचिव जय प्रकाश पटेल और वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री मधुराय से हुई। उनसे पूछने पर पता चला कि छब्बू पटेल विधानसभा क्षेत्र में जनसंपर्क पर हैं। छब्बू पटेल की जीत की संभावना पर जब मैंने कांग्रेस नेत्री मधु राय से सवाल पूछा तो उन्होंने बेरोजगारी और किसानों के मुद्दे को प्रमुखता से रखा। मुगलसराय में छब्बू पटेल की छवि का हवाला देते हुए उन्होंने यहां से कांग्रेस के जीतने की भविष्यवाणी कर दी।

कांग्रेस कार्यालय में मौजूद कांग्रेस नेत्री मधु राय एवं अन्य कांग्रेस पदाधिकारी

कुछ दूर आगे जाने पर मुगलसराय से बसपा के उम्मीदवार इरशाद अहमद उर्फ बबलू पेंट का चुनावी कार्यालय मिला। टेंट और कनात के सहारे बने इस चुनावी कार्यालय में करीब आधा दर्जन बसपा के कार्यकर्ता मौजूद मिले। इरशाद अहमद भी क्षेत्र में जनसंपर्क पर निकल चुके थे। मैंने कार्यालय प्रभारी अथवा किसी जिम्मेदार पदाधिकारी से बातचीत करने की कोशिश की लेकिन वहां ऐसा कोई भी नहीं मिला। वह कुछ समय पहले कहीं निकल चुके थे।

बसपा उम्मीदवार इरशाद अहमद का केंद्रीय चुनाव कार्यालय

आगे बढ़ने पर भाजपा के उम्मीदवार रमेश जायसवाल का केंद्रीय चुनाव कार्यालय मिला। कार्यालय भरा हुआ था। रमेश जायसवाल कार्यालय में मौजूद थे और अपनी रणनीति बनाने में मशगूल थे। उनके दर्जनों समर्थक उनके साथ बैठे हुए थे।

भाजपा उम्मीदवार रमेश जायसवाल का केंद्रीय चुनाव कार्यालय

सब्जी मंडी पार करने के बाद मुझे समग्र उत्थान पार्टी के उम्मीदवार अजीत सिंह का चुनावी कार्यालय मिला जिसमें कोई भी व्यक्ति मौजूद नहीं था।

समग्र उत्थान पार्टी के उम्मीदवार अजीत सिंह का केंद्रीय चुनाव कार्यालय

मुगलसराय जंक्शन के परिसर में प्रवेश करने पर उसका नाम ‘पंडित दीन दयाल उपाध्याय जंक्शन’ मिला जो नये अंदाज में यात्रियों का स्वागत कर रहा था। जंक्शन के सामने का परिदृश्य एकदम बदल चुका था। मैं वहां से निकलकर मुगलसराय रोडवेज के पास पहुंचा जहां उसकी दुश्वारियां अपना दर्द बयां कर रही थीं। पास में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार चंद्रशेखर यादव का केंद्रीय चुनाव कार्यालय मिला जो समाजवादी पार्टी के जिला कार्यालय में ही खोला गया है। कार्यालय के अंदर कार्यालय प्रभारी और करीब आधा दर्जन युवा आराम करते हुए मिले। चंद्रशेखर यादव क्षेत्र में जनसंपर्क में लिकल चुके थे।

समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार चंद्रशेखर यादव का केंद्रीय चुनाव कार्यालय

वहीं पास में चाय की एक दुकान पर मेरी मुलाकात वरिष्ठ पत्रकार महेंद्र प्रजापति और धर्मेंद्र से हुई। दोनों पत्रकारों का कहना था कि यहां लड़ाई भाजपा और सपा के बीच है। भाजपा की स्थिति मजबूत लग रही है। इसके पीछे की वजहें पूछने पर महेंद्र प्रजापति ने कहा कि मुगलसराय विधानसभा क्षेत्र में अधिकतर वोटर शहरी हैं और व्यवसाय से जुड़े हैं। बबुरी नगर पंचायत मुगलसराय विधानसभा में ही शामिल है। शहरी क्षेत्र में भाजपा मजबूत है। साथ ही उसने बनिया समुदाय के व्यक्ति को टिकट दिया है। मुगलसराय में जायसवाल और गुप्ता (तेली) समेत बनिया समुदाय का वोटबैंक ज्यादा है। इसके अलावा यहां आरएसएस का प्रभाव भी है। यहां कई जगहों पर शाखाएं लगती हैं। इससे भाजपा यहां मजबूत लग रही है।

हालांकि जब मैंने मुगलसराय विधानसभा के कामगार और फुटपाथ पर दुकान लगाकर व्यवसाय करने वाले मुगलसराय के वोटरों से बात की तो मुझे अलग ही रुझान मिला। सोमवार की अल सुबह करीब छह बजे मुगलसराय में जंक्शन के सामने एक चाय की दुकान पर मेरी मुलाकात पेठा का ठेला लगाने वाले सोनू गुप्ता से हुई। वह तेली समुदाय से आते हैं। मुगलसराय और प्रदेश के राजनीतिक रुझान के बारे में पूछने पर कहते हैं, “हम लोगों की हालत बहुत ही खराब है। महंगाई ने कमर तोड़ रखी है। बिक्री भी कम हो गई है। परिवार चलाना मुश्किल हो रहा है।” जब मैंने उनसे वोट देने के बारे में पूछा तो उन्होंने कहा, “सरकार बदलेगी, तभी राहत मिल सकती है। माहौल सपा का है, इसलिए हम लोग सपा को वोट देंगे।”

साइकिल पर पान बेचता प्रकाश चौरसिया और उसके पास में खड़े सोनू गुप्ता

इसी दौरान मेरी नज़र साइकिल पर पान बेच रहे एक किशोर पर पड़ी। गाड़ी वाले और अन्य लोग उससे पान खरीद रहे थे। किशोऱ के बारे में पता करने पर मालूम हुआ कि उसका नाम प्रकाश चौरसिया है। वह स्थानीय नगर पालिका इंटर कॉलेज में कक्षा 10 में पढ़ता है। हर सुबह दो घंटे यहां साइकिल पर पान बेचता है। उसके ग्राहक बंधे हुए हैं। दो घंटे में वह करीब 100 बीड़ा पान बेच लेता है जिससे उसका खर्च निकल जाता है। मैंने प्रकाश से उसके बारे में जानने की कोशिश की लेकिन उसने अपने नाम, कक्षा और विद्यालय के नाम के सिवाय अन्य कोई बात नहीं बताई।

सोनू गुप्ता को उसके बारे में जानकारी थी। उन्होंने बताया कि रेलवे जंक्शन के पास उसके पिता की दुकान है। लॉक-डॉउन के दौरान उसके पिता की दुकान बंद हो गई थी तो वह हर सुबह दो घंटे यहां साइकिल पर पान का बीड़ा बेचता था। यही दौर अब भी चल रहा है। वह घर से ही पान लगाकर लेकर आता है। उसके ग्राहक बंधे हैं। वे आते हैं और पान का बीड़ा खरीदकर चले जाते हैं।

वहीं मेरी मुलाकात फूल की माला की दुकान लगा रहे पप्पू माली से हुई। वह मुगलसराय के रवि नगर में रहते हैं। पिछले 10 सालों से यही कारोबार कर रहे हैं। वह बताते हैं, “लॉक-डॉउन के दौरान हालत खराब हो गई थी। बचत भी धीरे-धीरे खर्च हो चुका था। परिवार पर संकट गहरा गया था। अब मंदिर खुल गए हैं तो एक बार फिर से कारोबार निकल पड़ा है। हालांकि फूलों की माला खराब होने का डर अभी भी सताता रहता है। कभी-कभी 200-500 रुपये का नुकसान उठाना पड़ जाता है।’ राजनीतिक रुझान और वोट देने की बात वह कहते हैं, “वोट तो देना है लेकिन अभी कोई निर्णय नहीं लिया है। जो जीतेगा, उसे वोट देकर जिता देंगे।“

फूलों की माला लगाते पप्पू माली

वहीं मेरी मुलाकात सिकटिया बसाराम निवासी जॉनसन मिस्त्री से हुई। अलीनगर में उनकी मोटरसाइकिल मरम्मत की दुकान है। जॉनसन के मुताबिक, वह हिन्दू धर्म के अनुसूचित जाति वर्ग में पैदा हुए थे। बाद में उन्होंने हिन्दू धर्म त्यागकर ईसाई धर्म अपना लिया और जॉनसन बन गए। जब मैंने उनसे वर्तमान सरकार और उसकी नीतियों के बारे में पूछा तो उन्होंने महंगाई, बेरोजगारी और भेदभाव की वजह से सरकार बदलने की बात कही। किस पार्टी को वोट देंगे के सवाल पर उन्होंने सपा का समर्थन किया। बसपा को वोट नहीं देने का कारण पूछने पर उन्होंने साफ कहा, “बसपा यहां जीत नहीं पाएगी। रुझान भी सपा की तरफ है।“

जॉनसन

वहीं, टेम्पो चालक बृजेश कुमार यादव अलग ही राय रखते हैं। वह कहते हैं, “भाजपा के उम्मीदवार रमेश जायसवाल मिलनसार व्यक्ति हैं। कोई भी पार्टी सरकार में आएगी, ऐसा ही करेगी। इसलिए मैं रमेश जायसवाल को ही वोट दूंगा।“

अगर विकास और जन सुविधाओं की बात करें तो अल सुबह रेलवे जंक्शन के सामने बीच सड़क पर कई जगह कूड़े का ढेर पड़ा रहता है। आवारा पशु उस कूड़े के ढेर के पास भारी संख्या में जमा रहते हैं जिससे वाहनों को जाने के लिए जगह तक नहीं मिल पाती है।

मुगलसराय जंक्शन के सामने सड़क पर पड़ा कूड़ों का ढेर और आवारा पशु

बीस सालों से सड़कें साफ करने वाले सफाईकर्मी आज भी नियमित नहीं हुए हैं। 50 साल से ज्यादा की उम्र में आज भी ठेके पर मजदूरी करने के लिए मजबूर हैं। आज भी उन्हें कूड़ा उठाने के लिए मशीनयुक्त ठेला नहीं मिला है। वे छोटे-छोटे पारंपरिक ठेलों में कूड़ा उठाने के लिए मजबूर हैं।

सड़क की सफाई करती 50 वर्षीय सफाईकर्मी

तीन साल पहले तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री और वर्तमान भाजपा अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा ने मुगलसराय विधानसभा के महेवा गांव में बड़े धूम-धाम से ट्रॉमा सेंटर का शिलान्यास किया था लेकिन वह ट्रॉमा सेंटर आज तक नहीं बन सका। 8 दिसम्बर, 2018 को आयोजित हुए इस कार्यक्रम में तत्कालीन केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री और अपना दल (एस) अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल, केंद्रीय भारी उद्योग मंत्री महेंद्र नाथ पांडेय, निवर्तमान विधायक साधना सिंह और सुशील सिंह भी मौजूद रहे थे।

महेवा गांव में ट्रॉमा सेंटर के शिलान्यास का लगा शिलापट्ट

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कार्यक्रम के तहत बनने वाले इस ट्रॉमा सेंटर की बाउंड्री भी आज तक पूरी नहीं हुई है और ना ही राष्ट्रीय राजमार्ग से वहां तक जाने वाला रास्ता ही बन पाया है। पिछले लोकसभा चुनाव में वोट लेने की जुगत से भाजपा अध्यक्ष द्वारा किया गया शिलान्यास सरकार बनने के बाद शो-पीस बनकर रह गया है।

निर्माणाधीन ट्रौमा सेंटर

(बनारस और चंदौली से पत्रकार शिव दास की ग्राउंड रिपोर्ट।)

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