सत्ता पक्ष के सांसद गुजराल फोन करते रहे, दिल्ली पुलिस ने नहीं सुनी एक घर में फंसे 16 लोगों को बचाने की गुहार

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नई दिल्ली। नागरिकता कानून पर दिल्ली में हुई हिंसा मामले में एनडीए के एक सांसद ने पुलिस के रवैये को लेकर सवाल उठाया है। और इस सिलसिले शिरोमणि अकाली दल के इस सांसद ने सरकार को एक कड़ा पत्र लिखा है। सांसद नरेश गुजराल ने कहा कि हिंसा के दौरान एक इलाके फंसे 16 लोगों को निकालने के मकसद से उन्होंने पुलिस को फोन किया। साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि वह एक सांसद हैं। लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। पुलिस आयुक्त अमुल्य पटनायक को लिखे इस पत्र में उन्होंने कहा है कि पुलिस की यह निष्क्रियता सिख विरोधी दंगों की याद ताजा कर देती है। उन्होंने कहा कि राजधानी दिल्ली में अल्पसंख्यक बहुत दहशत में हैं।

उन्होंने बताया कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली के मौजपुर इलाके के एक मकान में 16 लोग फंसे हुए थे। और खुद को बचाने के मकसद से उन लोगों ने गुजराल से संपर्क किया था। जिसके बाद गुजराल ने पुलिस को फोन किया। लेकिन पुलिस की प्रतिक्रिया इतनी ठंडी थी कि गुजराल का पारा गरम हो गया। लिहाजा उन्होंने न केवल पटनायक को पत्र लिखा बल्कि उसकी कॉपी गृहमंत्री अमित शाह को भी भेज दी।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक “मैंने फोन पर वहां की अरजेंसी की जानकारी दी और ऑपरेटर को बताया कि मैं संसद सदस्य हूं। 11.43 बजे, मुझे दिल्ली पुलिस से पुष्टि मिली कि मेरी शिकायत संख्या प्राप्त हुई है। लेकिन 16 व्यक्तियों को दिल्ली पुलिस से कोई सहायता नहीं मिली। मेरी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी। इस बात की मुझे निराशा है।” गुजराल ने कहा कि जब एक सांसद की शिकायत पर कार्रवाई नहीं होती तो अंदाजा लगाया जा सकता है कि आम आदमी के साथ क्या होता होगा? कोई भी सभ्य भारतीय 1984 की पुनरावृत्ति नहीं चाहता।

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