भारत के आयात-निर्यात में भारी गिरावट, सिकुड़ती अर्थव्यवस्था 

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भारतीय निर्यात लगातार तीसरे में महीने गिरा है, यह गिरावट 12.7 प्रतिशत है। अब निर्यात सिर्फ 34.66 बिलियन डॉलर का रह गया है। आयात भी लगातार पाचंवें महीने में गिरा है। आयात में 14 प्रतिशत की गिरावट है। अब यह सिर्फ 49.9 डॉलर रह गया है। किसी जमाने में अर्थशास्त्र के सिद्धांत में आयात की गिरावट को देश-विशेष की अर्थव्यवस्था का अच्छा संकेत माना जाता था। अब आयात में गिरावट भी देश-विशेष की अर्थव्यवस्था के सिकुड़ने का संकेत माना जाता है। निर्यात में गिरावट के साथ आयात में होने वाली गिरावट के चलते व्यापार घाटा 20 महीने के निचले स्तर पर पंहुच कर 15.24 बिलियन डॉलर हो गया है। ये आंकड़े भारत सरकार ने 15 मई (सोमवार) को जारी किए। निर्यात में गिरावट का बड़ा कारण यूरोप और अमेरिका की अर्थव्यवस्था में मंदी का होना है। जिससे भारतीय वस्तुओं की मांग इन देशों में घट गई है।

विदेश व्यापार महानिदेशक (डीजीएफटी) संतोष कुमार सारंगी ने संवाददाताओं को बताया कि “जहां तक यूरोप का संबंध है, मांग परिदृश्य बहुत अच्छा नहीं लग रहा है, और अमेरिका में भी हमने मांग में गिरावट देखी है। मुझे लगता है कि अगले 2-3 महीनों के लिए मांग परिदृश्य बहुत अच्छा नहीं रहने वाला है। सितंबर के बाद से स्थिति में सुधार हो सकता है।”

उन्होंने ये भी कहा कि, “इस बात की संभावना है कि अगस्त-सितंबर से यूरोप और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में मांग में कुछ बढोतरी के साथ चीनी अर्थव्यवस्था के खुलने से वैश्विक निर्यात को बढ़ावा मिल सकता है।” 

सारंगी ने कहा कि आयात में गिरावट कमोडिटी की कीमतों में कमी और रत्न और आभूषण जैसे उत्पादों की मांग में कमी के कारण है। उन्होंने उन उत्पादों में विविधता लाने का सुझाव दिया जिनकी निर्यात मांग अधिक है, जैसे इलेक्ट्रॉनिक सामान, तेल खली, तिलहन और कृषि सामान।

अप्रैल में जिन निर्यात क्षेत्रों में नकारात्मक बढ़ोतरी दर्ज की गई, उनमें पेट्रोलियम उत्पाद, रत्न और आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, रसायन और रेडीमेट गारमेंट्स शामिल हैं। लेकिन, इलेक्ट्रॉनिक सामान, फार्मा, चावल और ऑयल मील में सकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। समीक्षाधीन महीने में इलेक्ट्रॉनिक सामानों का शिपमेंट 26.49 प्रतिशत बढ़कर 2.11 अरब डॉलर हो गया।

माल निर्यात के तहत, 30 प्रमुख क्षेत्रों में से केवल 11 ने अप्रैल में सकारात्मक वृद्धि दिखाई और आयात के मोर्चे पर, 30 प्रमुख क्षेत्रों में से 23 में नकारात्मक वृद्धि दर्ज की गई। कच्चे तेल का आयात 13.95 प्रतिशत घटकर 15.17 अरब डॉलर रह गया। सोने का आयात भी अप्रैल में 41.48 प्रतिशत घटकर 1 अरब डॉलर रहा।

मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 2022-23 में वस्तुओं और सेवाओं का निर्यात 14.68 प्रतिशत बढ़कर 775.87 अरब डॉलर हो गया, जबकि 2021-22 में यह 676.53 अरब डॉलर था। अप्रैल 2022 में 24.05 अरब डॉलर की तुलना में इस साल अप्रैल में निर्यात सेवा 30.36 अरब डॉलर रहने का अनुमान था।

निर्यात में 12.7 प्रतिशत और उसकी तुलना में आयात में 14 प्रतिशत की गिरावट के चलते भले ही व्यापार घाटा कम हुआ हो, लेकिन इस बात का संकेत है कि यूरोप और अमेरिका की अर्थव्यवस्था के साथ भारत की अर्थव्यवस्था भी मंदी की चपेट में है और सिकुड़ रही है।

(कुमुद प्रसाद जनचौक की सब एडिटर हैं।)

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