Monday, October 25, 2021

Add News

अजब-गजब श्रद्धांजलि: पंडित राजन मिश्रा के नाम पर खुला और फिर बंद भी हो गया अस्पताल!

ज़रूर पढ़े

बनारस। संगीत के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान रखने वाला बनारस घराना जब अपने अस्तित्व को बचाने का रास्ता तलाश रहा है तो बनारस घराने के जाने -माने गायक स्वर्गीय पंडित राजन मिश्रा के नाम पर बनारस में संगीत विश्वविद्यालय या अकादमी बनाने के बजाय अस्थायी अस्पताल बना कर उन्हें श्रद्धांजलि दिया गया। लेकिन अब यह भी बंद कर दिया गया है।

पंडित राजन मिश्रा का कोरोना से निधन हो गया था। बेहतर होता उनके नाम पर काशी में कोई संगीत विश्वविद्यालय की स्थापना की जाती जिससे न केवल पस्त हो चले बनारस घराने की धड़कन को नई पहचान मिलती बल्कि बनारस की सदियों की समृद्धशाली संगीत परम्परा से नई पीढ़ी रूबरू हो पाती। ये न कर राजनीति के बेसुरे आकाओं ने नाम बड़े और दर्शन छोटे की तर्ज पर जल्दबाजी में  बीएचयू के एम्फीथियेटर मैदान में डीआरडीओ की ओर से बनाए गए अस्थायी अस्पताल का नामकरण पंडित राजन मिश्रा के नाम पर कर दिया।

कोरोना के दूसरी लहर में बड़े पैमाने पर हुई मौतों के बाद गफलत की निद्रा से जागी सरकार ने इसे तैयार करवाया था। फिलहाल कोरोना की दूसरी लहर के धीमे पड़ने और मरीजों की संख्या में कमी को देखते हुए अब इसे बंद कर दिया गया है। इसमें भर्ती कोरोना के दर्जन भर मरीजों को सर सुंदरलाल अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया है। कोरोना के संभावित तीसरी लहर के मद्देनजर इसका मूलभूत ढांचा बरकरार रहेगा ताकि जरूरत पड़ने पर इसे चालू किया जा सके।

प्रश्न ये है कि संगीत के इस महारथी का नाम अस्थायी अस्पताल से जोड़ने के पीछे क्या मंशा थी जब अस्पताल को बंद ही होना था? किसी संगीतज्ञ को श्रद्धांजलि देने के इस तरीके के पीछे सरकार की दिवालिया सोच जाहिर होती है अस्पताल के बाहर लगे विशालकाय होर्डिंग में एक तरफ पं राजन मिश्रा तो दूसरी तरफ बनारस के सांसद और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की तस्वीर दरसअल दो अलग-अलग छोर हैं जो संगीत और राजनीति के अंतर्विरोधों को उजागर करती है।

एक छोर अगर ज़िंदगी को सुरीला और मन को सीमाओं के परे ले जाकर सत्यम, शिवम्, सुन्दरम की भावना से जोड़ता है तो दूसरा छोर जिंदगी को बेरस बनाकर दिलों में दूरियां और मन में कड़वाहट भरता है। ऐसे में किसी सियासतदां से उम्मीद करना नादानी होगी कि वो सुर-ताल के साधकों को यथोचित सम्मान देगा। नहीं तो शहनाई के उस्ताद बिस्मिल्लाह खां साहब के छोटे साहबजादे और तबला वादक नाजिम हुसैन ये न कहते संगीत के लिए सियासत में कोई जगह है क्या? और न ही सितार वादक पंडित देवब्रत मिश्रा कहते बनारस घराना है कहां? और पंडित छन्नूलाल मिश्र अपनी पत्नी और बेटी के लिए इंसाफ मांगते हुए सियासत के दर से निराश न लौटते।

       (वाराणसी से भाष्कर गुहा नियोगी की रिपोर्ट।)

तत्काल समाचारों के लिए, हमारा जनचौक ऐप इंस्टॉल करें

Latest News

एक्टिविस्ट ओस्मान कवाला की रिहाई की मांग करने पर अमेरिका समेत 10 देशों के राजदूतों को तुर्की ने ‘अस्वीकार्य’ घोषित किया

तुर्की के राष्ट्रपति रेचेप तैय्यप अर्दोआन ने संयुक्त राज्य अमेरिका, जर्मनी, फ़्रांस, फ़िनलैंड, कनाडा, डेनमार्क, न्यूजीलैंड , नीदरलैंड्स, नॉर्वे...
जनचौक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें

Janchowk Android App

More Articles Like This

- Advertisement -