26.1 C
Delhi
Friday, September 24, 2021

Add News

गैर सरकारी पीएम केयर्स का प्रचार सरकारी वेबसाइट पर क्यों?

ज़रूर पढ़े

पीएम केयर्स को जब गैर सरकारी घोषित कर दिया गया है तो सरकारी मंत्रालयों के साइट पर उसका विज्ञापन क्यों? कल रात वित्त मंत्रालय और रक्षा मंत्रालय के वेबसाइट पर पीएम केयर्स का यह विज्ञापन दिखा। दोनों केंद्रीय मंत्री पीएम केयर्स ट्रस्ट के सदस्य हैं और प्रधानमंत्री की तस्वीर का भी उपयोग किया गया है। वैसे तो प्रधानमंत्री की तस्वीर का उपयोग पहले भी हुआ है और खबर थी कि उसके लिए पांच सौ रुपए का जुर्माना भी हुआ था। पर सवाल है कि गैर सरकारी ट्रस्ट का प्रचार सरकारी वेबसाइट पर सरकारी सेवको द्वारा क्यों? कहने की जरूरत नहीं है कि पीएम केयर्स ट्रस्ट के ट्रस्टी अगर प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्री हैं जो सरकारी वेतन पाते हैं तो उन्हें पार्ट टाइम जॉब करने की छूट नहीं होनी चाहिए।

प्रधानमंत्री का काम चंदा बटोर कर देश की सेवा करना नहीं है। प्रधानमंत्री को देश के संसाधनों से उन्हें मजबूत कर उससे पैसे जुटाना है और उनका सर्वश्रेष्ठ उपयोग करके जनता को अधिकतम राहत देना है। ये नहीं हो सकता कि जनता पैदल चले, ट्रेन में भूखों मरे और प्रधानमंत्री चंदा बटोर कर खर्च करने के आदर्श मौके का इंतजार करते रहें।

अगर प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्री ऐसी छूट लेंगे तो सभी सरकारी कर्मचारियों को यह छूट मिलनी चाहिए। इसके अलावा, प्रधानमंत्री अगर केंद्रीय मंत्रियों के साथ मिलकर ‘सेवा’ कर रहे हैं और इसलिए यह छूट है तो क्या ऐसी छूट सभी सरकारी सेवकों को नहीं मिलनी चाहिए। निजी क्षेत्र अपने कर्मचारियों या निदेशकों को भी ऐसी छूट दे? और यह सब सवाल तब जब नरेन्द्र मोदी की सरकार ने 14800 गैर सरकारी संगठनों (एनजीओ) को भिन्न कारणों से बंद करा दिया है। अगर वहां नियमों का उल्लंघन हो रहा था तो यहां नहीं हो रहा है? और अगर उन्हें बंद करा दिया गया तो इसे क्यों चलना चाहिए। सेवा तो वो भी कर रहे थे।

यही नहीं, पीएम केयर्स अगर सरकारी नहीं है तो निजी संस्थान के रूप में ही चलाया जाना चाहिए। इसका एक कर्ता-धर्ता होना चाहिए जो ट्रस्ट का वेतनभोगी कर्मचारी हो और संचालन (यानी गलतियों) के लिए जिम्मेदार हो। अभी की स्थिति में अगर ट्रस्ट के किसी कानून के उल्लंघन के लिए वित्त मंत्री जिम्मेदार हों तो वित्त मंत्रालय के तहत कौन सा अधिकारी उनके खिलाफ कार्रवाई की सोच भी पाएगा? वैसे ही, देश में कितने ही ट्रस्ट, कितने ही एनजीओ और सेवा संस्थान आयकर में छूट का अधिकार प्राप्त करना चाहते हैं पर वर्षों से आवेदन करने के बाद भी यह सुविधा नहीं मिलती है।

दूसरी ओर पीएम केयर्स को यह सब सुविधा लगभग पहले दिन से है। सीएसआर के पैसे लिए ही जा रहे हैं। ऐसे में यह कहना गलत है कि पीएम केयर्स का पैसा सरकारी नहीं है। फिर भी अगर उसे निजी संस्थान की तरह चलाया जाना है तो निजी संस्थान की ही तरह चलाया जाए। जैसे न्याय होना ही नहीं चाहिए न्याय होता हुआ दिखना भी चाहिए वैसे ही ईमानदारी बरती ही नहीं जानी चाहिए दिखनी भी चाहिए। मैं नहीं समझता कि ऐसा दिख रहा है फिर भी अगर गैर सरकारी संस्थान ही रहना है तो वैसा ही दिखना भी चाहिए।

रिश्वत की जो परिभाषा मैं समझता हूं उसके अनुसार सरकारी सेवकों का चंदा मांगना गलत है। यह बात तो स्कूल में ही समझ में आ गई थी कि चंदा वही अधिकारी दिला सकता है जो स्कूल के लिए खरीदारी करता है या सप्लायर को भुगतान के चेक देता है। यह ठीक है कि अंतिम फैसला कोर्ट में होता है लेकिन उससे पहले ही किसी को भी बदनाम किया जाता रहा है। इस हिसाब से चंदा मांगना अगर गलत है तो प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों को चंदा नहीं मांगना चाहिए वरना गांव में मंदिर बनाने से लेकर गांव वालों को घर पहुंचाने के लिए चंदा बटोरना कोई भी शुरू कर देगा और प्रधानमंत्री को देखकर भी लोगों ने शुरू नहीं किया है तो इसीलिए कि यह गलत है और उन्हें पता है कि उनके साथ क्या सलूक होगा। वैसे भी ट्रस्ट बनाकर चंदा लेना पकौड़े बेचने से आसान है और कमाई भी ज्यादा। फिर भी लोग नहीं कर रहे हैं तो कारण यही है।

(संजय कुमार सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल दिल्ली में रहते हैं। यह लेख उनके फेसबुक पेज से साभार लिया गया है।)

तत्काल समाचारों के लिए, हमारा जनचौक ऐप इंस्टॉल करें

Latest News

धनबाद: सीबीआई ने कहा- जज की हत्या की गई है, जल्द होगा खुलासा

झारखण्ड। धनबाद के एडीजे उत्तम आनंद की मौत के मामले में गुरुवार को सीबीआई ने बड़ा खुलासा करते हुए...
जनचौक के नए ऐप से अपने फोन पर पाएं रियल टाइम अलर्ट और सभी खबरें डाउनलोड करें

Janchowk Android App

More Articles Like This

- Advertisement -

Log In

Or with username:

Forgot password?

Forgot password?

Enter your account data and we will send you a link to reset your password.

Your password reset link appears to be invalid or expired.

Log in

Privacy Policy

Add to Collection

No Collections

Here you'll find all collections you've created before.