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पत्रकार को प्रताड़ित करने के मामले में मानवाधिकार आयोग ने मांगा अहमदाबाद पुलिस से जवाब

अहमदाबाद। मानव अधिकार आयोग की राज्य इकाई द्वारा अहमदाबाद शहर के पुलिस कमिश्नर को नोटिस जारी किया गया है। मामला एक पत्रकार सहल कुरेशी को लॉक डाउन के समय ज़ोन 2 के DCP धर्मेंद्र शर्मा द्वारा धमकाने का है। मानव अधिकार संरक्षण अधिनियम 1993 के अन्तर्गत नोटिस जारी कर आयोग ने क्रमशः घटना की संपूर्ण जानकारी पुलिस कमिश्नर के दस्तखत के साथ बीस दिन में देने को कहा है। आयोग ने समय मर्यादा में जवाब न मिलने पर कार्यवाही की चेतावनी भी दी है।

अहमदाबाद के शाहपुर में फेरी वालों और पुलिस के बीच कहा सुनी के बाद झड़प हो गई थी। जिसके बाद पुलिस ने सर्च ऑपरेशन के नाम पर आम लोगों से मार पीट और तोड़ फोड़ की थी। जिसके चलते बड़ा तनाव हो गया था। पुलिस ने पहले दिन 17 और दूसरे दिन 11 लोगों को धारा 307 के तहत गिरफ्तार किया था। और आठ लोगों को अभी भी फरार बताया जा रहा है।

शाहपुर घटना में जनता का पक्ष

शाहपुर के लोगों के अनुसार 8 मई को शाहपुर पुलिस ने एक बुजुर्ग जो दूध बेच रहे थे, को पुलिस ने जगह से उठने को कहा और ले जाने लगे जिसका उपस्थित लोगों ने विरोध किया। विरोध करने वालों में अधिकतर महिलाएं थीं। पुलिस गाली गलौज कर उन्हें ले जा रही थी। लोगों के विरोध पर पुलिस ने लाठी चार्ज कर दिया। जिसके बाद पुलिस पर भी पत्थर फेंके गए। रमज़ान महीना होने के कारण फ्रूट, दूध तथा अन्य जरूरी वस्तु खरीदने के लिए लोग मोहल्ले में निकला करते थे। जिसकी छूट भी थी।

यह घटना भी उसी समय हुई थी जब मुस्लिम रोज़ा इफ्तार की तैयारी में लगे हुए थे। इस घटना के तुरंत बाद पुलिस बल बड़ी संख्या में आया और रोज़ा इफ्तार के समय शाहपुर में इलाके में खड़े बहुत से वाहनों में तोड़ फोड़ की। लोगों के घरों में घुसकर महिला, पुरुष और बुजुर्ग सभी के साथ मार पीट कर 17 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस पर आरोप है कि उन्होंने गर्भवती महिला और मंद बुद्धि  व्यक्ति के साथ भी मार पीट की।

पुलिस का पक्ष

शाहपुर पुलिस स्टेशन के इंस्पेक्टर आर के अमीन आरोप को नकारते हुए कहते हैं, “मैं घटना के समय उपस्थित था। जो बातें FIR में दर्ज हैं वही सही हैं।” FIR के अनुसार ” ऊपरी अधिकारियों के आदेश के बाद लॉक डाउन का सख्ती से पालन हो इसलिए पुलिस, RAF, SRP के जवानों और नगर निगम के कर्मचारियों के साथ पेट्रोलिंग करते समय पुलिस ने डोडियावाड नाके पर, शाहपुर रेडीमेड के पास बैठे दो तीन युवकों को बुलाया तो उन लोगों ने स्टाफ के साथ वाद-विवाद शुरू कर दिया।

यूसुफ रेडीमेड सेंटर के मालिक ने आप पास के लोगों को एकत्र कर लिया। देखते ही देखते 2000 की भीड़ एकत्र हो गई। भीड़ से आवाज़ आ रही थी पुलिस रोज़ाना परेशान करती है। आज सबक सिखाना है। आज पुलिस को जिंदा नहीं जाने देना है। आस पास के लोगों ने चीखते चिल्लाते हुए पुलिस स्टाफ पर पत्थर फेंकने शुरू कर दिये। घटना की जानकारी कंट्रोल रूम को दी गई। जिसके बाद क्राइम ब्रांच और आस पास पुलिस स्टेशन के स्टाफ घटना स्थल पर आ गए। फिर भी जुनूनी भीड़ ने पथराव जारी रखा पुलिस ने आँसू गैस के गोले छोड़े और आगे की कार्यवाही की”।

शाहपुर की इस घटना को लोकल मीडिया में कोई खास जगह नहीं मिली थी। देश लाइव नाम का यूट्यूब चैनल चलाने वाले सहल कुरेशी ने पुलिस की बर्बरता और मारपीट को उजागर किया था। कुरेशी ने चैनल के माध्यम से उन महिलाओं के इंटरव्यू दिखाए थे जो पुलिस बर्बरता का शिकार बनीं थीं या चश्मदीद थीं। पुलिस को टीस थी कि जिस खबर को हम मुख्य धारा के मीडिया से छिपाने में कामयाब हो गए। वह यूट्यूब के माध्यम से उजागर कर दी गई। सहल कुरेशी अपनी इसी पत्रकारिता को धमकी का कारण मानते हैं।

लॉक डाउन के समय पुलिस पर भेदभाव के आरोप

शाहपुर की घटना के अलावा इसी ज़ोन में एक अन्य घटना हुई थी जिसे कुरेशी ने दिखाया था। पुलिस पर आरोप था कि वह केवल मुस्लिमों की गाड़ियां रोक कर परेशान कर रही है अन्य समुदाय को बिना हिचक आने जाने दे रही है। कोरोना के कारण गर्भवती महिलाएं सरकारी एंबुलेंस का उपयोग करने से बच रही थीं। जिसके चलते जमीयत उलेमा हिंद ने एक एंबुलेंस को ऐसे मरीजों की सेवा करने के लिए रखा था। पुलिस मरीज़ वाली एंबुलेंस को रोकती थी और मुस्लिम होने के कारण उन्हें परेशान किया जाता था। जिसकी शिकायत विधायक गयासुद्दीन शेख ने पुलिस के उच्च अधिकारियों से भी की थी। लॉक डाउन के समय एलिस ब्रिज के पास पुलिस ने जमीयत की एंबुलेंस को रोक कर शराब की हेरा फेरी का आरोप लगाया था। जबकि ऐसी कोई बात नहीं निकली थी। पुलिस का आरोप बेबुनियाद था। इसकी भी रिपोर्टिंग सहल कुरेशी ने की थी।

कब और कैसे धमकी दी गई

23 मई को अहमदाबाद के शाहपुर में पुलिस द्वारा उलेमाओं तथा मुस्लिम के अगुआ नेताओं की एक मीटिंग बुलाई गई थी। मीटिंग का उद्देश्य भी पुलिस और जनता के बीच का तनाव कम करना था। मीटिंग के बाद DCP धर्मेंद्र शर्मा ने उपस्थित मीडिया से बात की। इस बात चीत में सहल कुरेशी ने कई तीखे सवाल भी पूछे। सहल कुरेशी ने पुलिस कांस्टेबल द्वारा शराब पीकर ड्यूटी करने तथा यह जानना चाहा कि शहर में लॉक डाउन में भी शराब कैसे आ रही है। इस प्रश्न पर धर्मेंद्र शर्मा भड़क गए और कैमरा बंद करा दिया। उसके बाद शर्मा ने कुरेशी को धमकी देते हुए कहा कि यही है सहल कुरेशी।

तुम ही हो सहल कुरेशी जो घर घर जाकर महिलाओं से कह रहे थे कि पुलिस ने तुम्हें मारा है। महिलाओं को इकट्ठा किया था। सोशल डिस्टेंसिंग भंग किया था इसके खिलाफ FIR दर्ज करो। जबकि कुरेशी सफाई देते हुए कहते हैं, मैं तो बार बार सोशल डिस्टेंसिंग के पालन के लिए कहता हूँ। जिस पर DCP कहते हैं वायरल वीडियो निकालकर FIR दर्ज करो। यह बातें कैमरा बंद होने के बाद ऑडियो  चालू रह जाने से रिकॉर्ड हो गई। इसी के आधार पर कुरेशी ने मानव अधिकार आयोग, पुलिस अधीक्षक, गुजरात हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा था। इसी पत्र के बाद आयोग ने अहमदाबाद के पुलिस कमिश्नर से 20 दिनों के भीतर जवाब तलब किया है।

तीन आरोपी कोरोना पॉजिटिव निकले थे।

पुलिस ने 9 मई तक 29 लोगों को गिरफ्तार किया था। इन सभी को घटना के पांचवें दिन जज के समक्ष हाजिर किया गया तो देरी से हाजिर करने पर जज ने नाराज़गी व्यक्त करते हुए कारण पूछा तो पुलिस ने बताया

” पकड़े गए सभी 29 आरोपियों को शाहपुर पुलिस स्टेशन के एक रूम में कोरंटीन कर सभी का कोरोना टेस्ट किया गया। तीन आरोपीयों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। एक आरोपी की आयु अधिक होने के कारण छोड़ दिया गया। कोरोना पॉजिटिव आरोपियों को सिविल अस्पताल भेज दिया गया। कोरोना टेस्ट के कारण देरी हुई। ” जिस पर जज ने कहा कि कोर्ट को 24 घंटे में जानकारी दी जानी चाहिए।

सभी को जज के सामने पेश किया गया। 5 आरोपियों ने पुलिस स्टेशन में पुलिस द्वारा मारपीट की जाने की जानकारी जज को दी जिसे संज्ञान में लिया गया। जज ने 307 जैसी गंभीर धारा लगाने पर भी सवाल उठाये थे। इन आरोपियों पर 307,337,332,333, 186,143,145,147, 149, 151, 152, 188, 120B, 427, डिसास्टर मैनेजमेंट एक्ट, एपिडेमिक डिसीस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

जेल में भी फैला कोरोना संक्रमण

आपको बता दें यह घटना मई के दूसरे सप्ताह की है। साबरमती जेल में मई के अंतिम सप्ताह और जून के पहले सप्ताह में कई कैदियों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी। जेल में भी क्वारंटाइन रूम बनाया गया है। 1 जून को जेल के आठ कैदियों को अहमदाबाद सिविल अस्पताल में कोरोना संक्रमण के इलाज के लिए दाखिल किया गया था। 13 मई को इन 25 आरोपियों को सेंट्रल जेल भेजा गया था। परंतु अभी यह स्पष्ट नहीं है कि जेल में संक्रमण कैसे फैला।

(अहमदाबाद से जनचौक संवाददाता कलीम सिद्दीकी की रिपोर्ट।)

This post was last modified on June 28, 2020 11:59 pm

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