Monday, October 18, 2021

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पत्रकारिता में राजनैतिक हस्तक्षेप का आरोप लगाते हुए हंगरी के पत्रकारों ने सौंपे सामूहिक इस्तीफे

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हंगरी के सबसे बड़े स्वतंत्र समाचार आउटलेट में संपादकीय बोर्ड और दर्जनों पत्रकारों ने इस्तीफा दे दिया है। यह घटना इसके प्रधान संपादक को राजनीतिक हस्तक्षेप के दावों के बीच निकाल दिए जाने के दो दिनों के बाद जाकर घटित हुई है।

इंडेक्स.एचयू के लगभग 90 संपादकीय कर्मचारियों में से 70 से अधिक कर्मचारियों ने, जिनमें डेस्क सम्पादक भी शामिल हैं, इस सप्ताह के आरंभ में स्ज़बोलस डल की बर्खास्तगी के मद्देनज़र अपने-अपने इस्तीफे सौंपने के बाद शुक्रवार को न्यूज़ रूम से बाहर निकल गए थे।

इस्तीफा देने के फैसले पर उप संपादक वेरोनिका मुंक का कहना था कि “रेड लाइन की सीमा पार हो चुकी थी।”

हंगरी और अंग्रेजी भाषा में एक ओपन लैटर प्रकाशित करते हुए नौकरी से इस्तीफ़ा देकर जाते हुए पत्रकारों ने आउटलेट की वेबसाइट पर इस पत्र को प्रकाशित किया है। इसमें कहा गया है कि”संपादकीय बोर्ड का मानना है कि पत्रिकारिता में स्वतंत्र संचालन की स्थितियाँ अब नहीं रहीं, जिसके चलते उन्होंने अपनी नौकरी को खत्म करने का फैसला लिया है”।

एक छात्र के तौर पर इस न्यूज़ एजेंसी को ज्वाइन करने के बाद से 18 वर्षों तक काम कर चुकी मुन्क ने बताया कि शुक्रवार को आखिरी बार न्यूज़ रूम से बाहर निकलते समय कई पत्रकारों की आँखों में आंसू थे।

रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स के अनुसार यूरोपीय यूनियन में मीडिया की स्वतंत्रता के मामले में सबसे बदतर देश के रूप में विख्यात हंगरी में इंडेक्स को अंतिम सबसे मुख्य स्वतंत्र आउटलेट के तौर पर मान्यता मिली हुई थी। धुर दक्षिणपंथी प्रधानमंत्री विक्टर ओर्बन द्वारा अपने शासन के पिछले एक दशक के दौरान, मीडिया परिदृश्य को धीरे-धीरे समेट कर रख दिया गया है। इस बीच कई न्यूज़ आउटलेट या तो सरकार समर्थकों द्वारा खरीद लिए गए हैं या बंद होने के लिए मजबूर कर दिए गए थे।

शुक्रवार को पुर्तगाल की यात्रा पर जाते हुए हंगरी के विदेश मंत्री पेइटर स्ज़िजारेटो ने दावा किया कि इंडेक्स में हुई इस उथल-पुथल के पीछे सरकार की ओर से हस्तक्षेप का आरोप सरासर गलत है, जबकि कंपनी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी लसाडेलो बोदोलाई ने जोर देकर कहा है कि इंडेक्स की सम्पादकीय नीति पर कोई बाहरी दबाव नहीं था।

मुन्क के अनुसार हाल के दिनों में संपादकीय विभाग के कर्मचारियों द्वारा कई बैठकों में बोडोलई को डल को बहाल करने के लिए अनुरोध किया गया था। “उन्होंने बार-बार बहाली से इंकार किया था। उनका कहना था कि यह एक निजी फैसला है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि यह असली वजह है।“

खबर है कि एक सरकार समर्थक व्यवसायी ने इस साल की शुरुआत में इंडेक्स की होल्डिंग कंपनी में हिस्सेदारी हासिल कर ली थी, और एक महीने पहले वेबसाइट ने अपने पाठकों को इस बात से आगाह किया था कि इसकी संपादकीय स्वतंत्रता खतरे में है। “इंडेक्स एक मजबूत किला था, जिसे वे ध्वस्त करना चाहते हैं,” डल ने बुधवार को अपने निकाले जाने के बाद न्यूज़रूम के साथ एक विदाई भाषण में इस बात की घोषणा कर दी थी।

वर्तमान में जारी वैश्विक आर्थिक संकट को देखते हुए और स्वतंत्र मीडिया के लिए हंगरी के धूमिल होते वातावरण में अपनी नौकरी छोड़ने को लेकर लिए गए इस कठिन निर्णय के बाद, पूर्व इंडेक्स पत्रकार अब इस बात पर विचार कर रहे हैं कि वे अपने प्रोजेक्ट को किस प्रकार से एक बार फिर से जारी रख सकते हैं।

मुन्क कहती हैं “हम भविष्य के बारे में क्या हो सकता है, विचार कर रहे हैं। हमारे पास अपनी योजना का अभी कोई पूरा खाका तैयार नहीं है, लेकिन हम चाहेंगे कि सब एक साथ एकजुट बने रहें। हम इस बात को जानते हैं कि हंगरी में मीडिया का जो माहौल है उसमें ऐसा करना वास्तव में काफी कठिन साबित होने जा रहा है।“

ज्ञात हो कि हंगरी में प्रधानमंत्री ने 30 मार्च को संसद में कोरोनावायरस संकट के मद्देनजर बहुमत के बल पर कई आपातकालीन शक्तियों को डिक्री के रूप में हासिल कर लिया था। इस नए नियमों के तहत गलत अफवाह फैलाने के आरोपियों को पांच साल तक की कैद की सजा सुनाये जाने का प्रावधान शामिल था। साथ ही आठ साल तक की अवधि तक सजा उसके लिए है जो हंगरी में कोरोनोवायरस के प्रकोप को रोकने के लिए उठाये गए नियमों को भंग करते पाया जाएगा।

इसके अलावा, उपचुनाव और जनमत संग्रह देश में तब तक नहीं हो सकते, जब तक कि आपातकाल की स्थिति प्रभावी है। अगला संसदीय चुनाव 2022 में होने वाला है। कई यूरोपीय संघ के नेताओं ने इस बीच इन कदमों को लेकर हंगरी की कड़ी आलोचना की है।

यूरोपीय आयोग के उपाध्यक्ष, वेरा जोरोवा ने गुरुवार को कहा, “मैंने हंगरी में आम तौर पर मीडिया और विशेष रूप से इंडेक्स के हालात के बारे में गहरी चिंताएं व्यक्त की हैं।”

बुडापेस्ट में शुक्रवार शाम मीडिया की स्वतंत्रता के समर्थन में एक विरोध मार्च की योजना बनाई गई।

सौजन्य: द गार्डियन 24 जुलाई 2020

प्रस्तुति और अनुवाद: रविंद्र सिंह पटवाल 

रविंद्र पटवाल

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