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कांग्रेस के अंदर और बाहर हार्दिक से दरपेश होंगी कई चुनौतियां

अहमदाबाद। 1986 में 36 वर्ष की आयु में अहमद पटेल को गुजरात प्रदेश कांग्रेस समिति का अध्यक्ष बनाया गया था। तब पटेल को युवा अध्यक्ष माना गया था। लगभग 34 वर्षों बाद कांग्रेस हाई कमान ने एक बार फिर प्रदेश को युवा कार्यकारी अध्यक्ष दिया है। पाटीदार अनामत (पटेल आरक्षण) आंदोलन का चेहरा बने हार्दिक पटेल को 26 वर्ष की आयु में कांग्रेस ने बड़ी ज़िम्मेदारी दे दी है। दिलचस्प बात यह है कि कांग्रेस की छात्र इकाई के अध्यक्ष भी उम्र में हार्दिक से बड़े हैं।

अहमदाबाद से 60 किलोमीटर की दूरी पर वीरमगाम है जो हार्दिक पटेल का गांव है। साधारण परिवार के हार्दिक पटेल गुजरात की राजनीति में जगह बनाने से पहले “सरदार पटेल ग्रुप” नाम के सामाजिक संगठन से जुड़े फिर अनामत आंदोलन में सक्रिय होकर ‘पाटीदार अनामत आंदोलन समिति (PAAS)’ नाम का संगठन बनाया और फिर उसके संयोजक बने। 2017 के विधान सभा चुनाव में हार्दिक पटेल , जिग्नेश मेवानी और अल्पेश ठाकोर ने भाजपा के विरुद्ध प्रचार किया था।

कांग्रेस भले ही सत्ता में नहीं पहुँच पाई हो लेकिन जीते विधायकों के नम्बर से संतुष्ट थी। क्योंकि भाजपा ने गुजरात मॉडल के नाम पर 2014 लोकसभा चुनाव लड़ा था। 2017 गुजरात विधानसभा चुनाव में राज्य में हुए आंदोलनों ने सत्ता विरोधी लहर बनाई थी। जिसका ही नतीजा था कि भाजपा की संख्या दो डिजिट में आ गई। 2019 लोकसभा चुनाव से पहले हार्दिक पटेल कांग्रेस में शामिल हुए थे। परंतु कांग्रेस एक भी सीट जीतने में सफल नहीं रही। हार्दिक पटेल का जाम नगर से लोकसभा चुनाव लड़ना तय था। लेकिन बीजेपी के कानूनी चक्रव्यूह के चलते 2019 का चुनाव वह नहीं लड़ सके। विधान सभा में आयु 25 साल से कम थी। हार्दिक पटेल ने 22 वर्ष की आयु में अनामत के अधिकार को मुद्दा बनाकर राज्य व्यापी आंदोलन के जरिये भाजपा के दिग्गजों को उनकी असलियत बता दी थी।

अनामत आंदोलन में पुलिस की गोलियों से 14 पाटीदार शहीद हुए थे। और करोड़ो की संपत्ति का नुकसान हुआ था। जिसके बाद हार्दिक पटेल के खिलाफ सरकार ने दर्जनों केस दर्ज किये। हार्दिक पर देश द्रोह और देश के खिलाफ युद्ध छेड़ने की धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ। हालांकि कोर्ट ने देश के खिलाफ युद्ध की धारा को निकाल दिया था। भाजपा सरकार में दर्ज होने वाले मुकदमों के अनुपात में कांग्रेस में हार्दिक की हैसियत भी बढ़ती गयी। इन सब के बीच हार्दिक की नियुक्ति से कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं में असंतोष बढ़ना स्वाभाविक है। हार्दिक के सामने अब दो बड़ी चुनौतियां हैं। पहला कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं को संतुष्ट करना और दूसरा पाटीदार समुदाय को कांग्रेस के नजदीक लाना।

हार्दिक पटेल की नियुक्ति को प्रदेश के कई वरिष्ठ नेता वैसे भी हज़म नहीं कर पा रहे हैं। खुलकर भले ही कोई नहीं बोल रहा है लेकिन असंतोष बिल्कुल स्पष्ट है। दूसरी तरफ हार्दिक पटेल इस तरह की किसी बात को खारिज करते हुए कहते हैं, “मैंने पार्टी के सभी वरिष्ठ नेताओं से बात की। कुछ ने मुझे खुद बुलाया और हर कोई मेरे गुजरात कांग्रेस का अध्यक्ष बनने से खुश है। हर किसी का मुझे समर्थन है। आखिरकार हम सब चाहते हैं कि गुजरात में एक बार फिर से कांग्रेस की सरकार बने।”

इस वर्ष के अंत में नगर निगम और पंचायत के चुनाव हैं। सभी छह महानगर पालिकाओं में बीजेपी का कब्ज़ा है जो कांग्रेस के लिए बड़ी चिंता का विषय है। 2017 में कांग्रेस को शहरी क्षेत्रों में मिली निराशा से ही राज सत्ता हाथ आते-आते रह गई थी। सूत्रों के अनुसार नगर निगम चुनाव में हार्दिक के अलावा निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवानी की बड़ी भूमिका होने वाली है। हार्दिक की नियुक्ति के जरिये हाई कमान ने सूबे के नेताओं को एक संदेश दे दिया है। वह यह कि अब विरासत की राजनीति नहीं चलेगी। संघर्ष से सत्ता मिलती है। शायद इसीलिए राहुल गांधी को हार्दिक में अधिक संभावनाएं दिखती हैं।

हार्दिक पटेल की मातृसंस्था सरदार पटेल ग्रुप (SPG) के अध्यक्ष लालजी भाई पटेल से इस संवाददाता ने हार्दिक की नियुक्ति पर बातचीत की।

प्रश्न : हार्दिक पटेल SPG में कब शामिल हुए थे और कब तक रहे ?

उत्तर : 31अक्टूबर 2012 को सरदार पटेल की जयंति के दिन हार्दिक सरदार पटेल ग्रुप में शामिल हुए थे। उन्हें वीरमगाम का अध्यक्ष बनाया गया था। 2015 तक हार्दिक SPG में थे। 25 अगस्त 2015 को प्रातः 6 बजे उन्होंने PAAS के बैनर से नये संगठन की घोषणा की। उसके बाद से वह PAAS संयोजक के तौर पर आंदोलन में सक्रिय रहे।

आगे फिर इसी संगठन के नाम से हम लोगों ने मिलकर अनामत आंदोलन चलाया। सरकार द्वारा 10% EBC कोटा दिए जाने तथा जनता द्वारा स्वीकार कर लिए जाने के बाद आंदोलन समाप्त हो गया। परंतु अब कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने पर मैंने उसे बधाई दी और साथ ही कहा कि हम सामाजिक लड़ाई और सामाज के लिए साथ हैं। मैं किसी राजनैतिक दल में नहीं हूँ इसलिए राजनैतिक तौर पर हम इकट्ठे नहीं हो सकते।

प्रश्न : हार्दिक पटेल की नियुक्ति को पाटीदार समुदाय कैसे देखता है?

उत्तर : हार्दिक पटेल ने जब 31 मार्च 2019 को कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ली थी तो समाज को निराशा हुई थी। एक पाटीदार का एक बड़े दल का कार्यकारी अध्यक्ष बनना समाज के लिए गौरव की बात है। लेकिन समाज में इस समय कोई उत्साह नहीं दिख रहा है।

लालजी भाई पटेल।

प्रश्न : क्या आने वाले नगर निगम चुनाव में हार्दिक से कांग्रेस को लाभ होगा ?

उत्तर : अभी नगर निगम और पंचायत चुनाव में देरी है। हार्दिक को कार्यकारी बनाया गया है अध्यक्ष तो अमित चावड़ा ही हैं। बीजेपी में अध्यक्ष पद की नियुक्ति अभी होनी है। हो सकता है बीजेपी फिर से किसी पाटीदार को ही अध्यक्ष नियुक्त कर दे। इसलिए अभी कुछ नहीं कह सकते।

प्रश्न: सोशल मीडिया पर कुछ लोग हार्दिक की प्रवीण तोगड़िया के साथ एक तस्वीर वायरल कर रहे हैं। क्या हार्दिक का संबंध विश्व हिंदू परिषद या RSS के साथ था ?

उत्तर : हार्दिक के पिता बीजेपी में थे। उनके संबंध आनंदी बेन से अच्छे थे। प्रवीण तोगाड़िया पाटीदार समुदाय से आते हैं। इसलिए एक बार वीरमगाम में प्रवीण भाई का सम्मान किया था। संगठन से जुड़ाव नहीं रहा है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार हार्दिक पटेल के अलावा तीन और नेताओं को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया जायेगा। पद संभालने से पहले हार्दिक पटेलों की कुलदेवी के मंदिर खोडल धाम दर्शन के लिए गए हैं। जानकारों का मानना है कि हार्दिक से कांग्रेस को बहुत बड़ा लाभ मिलने की आशा बहुत कम है क्योंकि पाटीदार समुदाय बीजेपी का वोटर माना जाता है। हार्दिक की नियुक्ति से युवाओं में थोड़ा फर्क पड़ सकता है। हार्दिक की नियुक्ति के बाद कांग्रेस को पिछड़े वर्ग को भी संतुष्ट करना पड़ेगा।

(अहमदाबाद से जनचौक संवाददाता कलीम सिद्दीकी की रिपोर्ट।)

This post was last modified on July 13, 2020 6:44 pm

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