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Monday, September 27, 2021

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प्रयागराज: आदिवासी प्रधान के उत्पीड़न मामले में 10 राजनीतिक दलों ने की उच्च स्तरीय जांच की मांग

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कल कोविड -19 दिशा निर्देश का पालन करते हुए पूर्व विधायक और कांग्रेस नेता अनुग्रह नारायण सिंह की अगुवाई में दस राजनीतिक दलों के पदाधिकारी /प्रतिनिधि प्रयागराज कार्यालय में मंडलायुक्त से मिलकर कहा कि महोदय हम सब राजनीतिक पार्टियों के पदाधिकारी/प्रतिनिधि बारा थाना के पुलिस अधिकारियों द्वारा सेहुड़ा ग्राम प्रधान व वीडीसी सदस्य शीला पाल के पति अन्य ग्राम वासियों के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज करने का विरोध करते हैं, और पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने व ग्राम प्रधान रज्जन कोल को तत्काल रिहा करने की मांग करते हैं। प्रतिनिधि मंडल का संयोजन डॉ. कमल उसरी ने किया। जबकि राजनीतिक दलों के प्रतिनिधि मंडल में मुख्य रूप से कांग्रेस से पूर्व विधायक अनुग्रह नारायण सिंह, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी से आनंद मालवीय, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) से अखिल विकल्प, भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी लेनिनवादी) से सुनील मौर्य, लोकतांत्रिक जनता दल से जुबेर अहमद कुरेशी, समाजवादी पार्टी से अंनत बहादुर सिंह यादव, आम आदमी पार्टी से ज्योति प्रकाश चौबे, सोशलिस्ट यूनिटी सेंटर ऑफ़ इंडिया(कम्युनिस्ट) से घनश्याम मौर्य, ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन से जीशान रहमानी शामिल रहे, बहुजन समाज पार्टी से चिंतामणि वर्मा व वेलफेयर पार्टी ऑफ़ इंडिया से जावेद मोहम्मद ने भी मांग का समर्थन किया है, प्रतिनिधि मंडल में डॉ कमल उसरी,वरिष्ठ कर्मचारी नेता व सीओसी प्रदेश अध्यक्ष सुभाष चन्द्र पाण्डेय, सेहुड़ा ग्रामवासी अर्जुन कोल भी शामिल थे।

 जसरा विकासखंड के 28 ग्राम प्रधानों ने लिखा पत्र

कल प्रयागराज जिले के जसरा विकास खंड बारा में अखिल भारतीय प्रधान संगठन के बैनर तले प्रधान संगठन जसरा के कार्यकारिणी की बैठक हुयी। इसमें 28 ग्राम प्रधानों ने शिरकत की। बैठक में सेहुड़ा ग्राम प्रधान रज्जन कोल का मामला मुख्य रूप से चर्चा का विषय रहा। ग्राम प्रधानों की बैठक में एक साझा बयान जारी करके रज्जन कोल की रिहाई, और दोषी पुलिसकर्मियों पर कार्रवाई, सेहुड़ा ग्रामवासियों के ख़िलाफ़ दर्ज फर्जी मकदमा वापस लेने, भय का माहैल दूर करके क़ानून का शासन स्थापित करने हेतु एक उच्च स्तरीय जांच की मांग वाले ज्ञापन पर बैठक में शामिल समस्त ग्राम प्रधानों ने हस्ताक्षर किये।  

दो दिन पहले भी बारा ब्लॉक के 28 प्रधानों के प्रधान संघ ने पत्र लिखकर निर्दोष प्रधान की रिहाई और दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की थी।

सेहुड़ा ग्राम के ग्रामवासी अपवने ग्राम प्रधान की गिरफ़्तारी और पुलिसिया दमन के खिलाफ़ लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। 26 अगस्त को गांव वालों ने पुलिस महानिरीक्षक कार्यालय का घेराव करके एसओ व सीओ बारा के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की मांग की। 31 अगस्त को जिलाधिकारी कार्यलय के बाहर धरना देकर सीओ बारा के ख़िलाफ़ उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।

पीयूसीएल की फैक्ट फाइंडिग टीम ने किया सेंहुड़ा गांव का दौरा

प्रयागराज जिले के बारा तहसील के सेहुड़ा गांव में पुलिस प्रशासन द्वारा आदिवासी ग्राम प्रधान और दलित बहुजन आदिवासी समुजाय के ग्रामवासियों के उत्पीड़न मामले में 29 अगस्त 2021 दिन रविवार को पीयूसीएल इलाहाबाद की एक फैक्ट फाइंडिंग टीम सेहुड़ा गांव आयी थी। फैक्ट फाइंडिंग टीम में पीयूसीएल के सोनी आजाद, अंकेश मद्धेशिया और मनीष सिन्हा के साथ-साथ इलाहाबाद हाईकोर्ट के दो वरिष्ठ अधिवक्ता माता प्रसाद और चंद्रपाल थे।

फैक्ट फाइंडिंग रिपोर्ट में कहा गया है कि वहां पर गांव के बड़ी संख्या में लोग जिसमें महिला और पुरुष दोनों उपस्थित थे। एक ग्रामीण अंजनी के अनुसार गांव के कुछ दूर पर एक पुरवा (जिसे गोंदिया का पुरवा कहते हैं) में एक संदिग्ध व्यक्ति को पकड़ा गया। जिस स्थान से संदिग्ध व्यक्ति को पकड़ा गया था वहां रहने वाले विक्रम यादव ने बताया कि वह संदिग्ध व्यक्ति 23 अगस्त रात 9 बजे के आसपास लगभग 2 घंटे से संदिग्ध अवस्था में घूम रहा था। गांव में इसके पहले भी चोरी की कई घटनाएं हो चुकी हैं। इसलिए प्रधान ने 112 नंबर डायल करके पुलिस को सूचना दी। ग्रामीण अंजनी और शुभम के अनुसार उसके बाद पीआरबी (पुलिस) की गाड़ी पहुंची। पुलिस ने उस व्यक्ति को विक्षिप्त करार देते हुए ले जाने से इंकार कर दिया।

ऐसी स्थिति में ग्राम प्रधान रज्जन कोल द्वारा जब विशेष आग्रह किया गया तब 112 नंबर की टीम द्वारा वहां के एस.ओ से बात कराई गई और SO टीकाराम वर्मा द्वारा ग्राम प्रधान को भद्दी-भद्दी गाली दी गई। उस वक्त मोबाइल का स्पीकर ऑन था और वहां पर उपस्थित सभी ग्रामवासियों ने उस अपमानजनक भाषा को सुना। एसओ महोदय द्वारा ग्राम प्रधान पर लगातार यह दबाव डाला गया कि आप उस व्यक्ति को अपने घर में रख लें। हालांकि अंततः एसओ के द्वारा पुलिस की टीम भेजकर उस विक्षिप्त व्यक्ति को ले जाया गया तथा ग्रामीणों को भी थाने आने को कहा गया। जब प्रधान ग्रामीणों सहित अपने भाई अर्जुन कोल के साथ थाने पहुंचे तब थाने के बाहर ही ग्राम प्रधान को भाई समेत गिरफ्तार कर लिया गया तथा ग्रामीणों की जबरदस्त पिटाई की गई जिसमें महिलाएं भी थीं। महिलाओं को काफी चोटें भी आई हैं और वहां उस समय कोई महिला सिपाही उपस्थित नहीं थी। अगले दिन दिन में 11:00 बजे जब ग्रामीणों द्वारा CO महोदय के पास ग्राम प्रधान को छोड़ने को कहा गया तब CO के द्वारा  ग्राम प्रधान के भाई अर्जुन कोल समेत चंद लोगों के खिलाफ एफ.आई.आर दर्ज कर अर्जुन कोल को छोड़ दिया गया लेकिन ग्राम प्रधान रज्जन कोल अभी भी जेल में बंद हैं। जबकि सीओ ने उसी वक्त आश्वासन दिया था कि आप लोग घर जाएं ग्राम प्रधान को छोड़ दिया जाएगा।

पीयूसीएल की टीम जब बारा थाने में इस संबंध में फैक्ट-फाइंडिंग करने एसओ के पास गई, तो उन्होंने इस प्रकरण पर कहा कि 23 तारीख को 8. 30-9 बजे के बीच हमारी गाड़ी (PRV) 112 नंबर की गाड़ी द्वारा ख़बर मिलने के बाद गांव पहुंची और बहुत आग्रह के बाद संदिग्ध को थाने लेते आई। SO महोदय के द्वारा यह भी कहा गया कि ग्राम प्रधान जो नशे में थे उन्होंने गांववासियों के साथ मिलकर पुलिस के साथ दुर्व्यवहार किया तथा जब ग्रामीणों की भीड़ थाने पहुंची तब भीड़ द्वारा हवाई फायरिंग भी की गई। ऐसी स्थिति में पुलिस द्वारा आत्मरक्षार्थ के लिए हल्का बल प्रयोग किया गया। SO के अनुसार ग्रामीण हथियार, लाठी-डंडे तथा पत्थर से लैस होकर आए थे। इन सब परिस्थितियों के मद्देनजर थाने को मुकदमा दर्ज करना पड़ा। हालांकि पीयूसीएल की टीम को एसओ महोदय द्वारा आश्वासन दिया गया है कि निर्दोष के साथ कहीं कोई जुर्म नहीं होगा तथा ग्राम प्रधान को कानून के अनुसार रिहा कर दिया जाएगा। उन्होंने यह भी कहा है कि अभी विवेचना चल रही है और विवेचना के दौरान ग्रामीणों को परेशान नहीं किया जाएगा।

 पीयूसीएल की फैक्ट फाइंडिंग टीम के निष्कर्ष 

० सेहुड़ा गांव जहां की लगभग पूरी आबादी गरीबी रेखा के नीचे जीवनयापन कर रही है और अधिकांश आबादी जो अनुसूचित जाति और पिछड़ी जाति की है उनका उस संदिग्ध व्यक्ति को लेकर कोई पूर्वाग्रह नहीं था। 

० एसओ की यह बात जो एफआईआर में दर्ज है कि ग्रामीणों ने हवाई फायरिंग की और हथियार की बरामदगी की गई। लेकिन यह बात समझ से परे है कि जो आबादी दो वक्त की रोटी नहीं जुटा पा रही है वह हथियार की व्यवस्था कैसे करेगी। और पुलिस द्वारा हथियार की बारामदगी के संदर्भ में भी कोई जानकारी नहीं दी गई।

० बड़ी संख्या में महिलाओं को चोटें आई हैं जो पीयूसीएल की टीम ने प्रत्यक्ष देखा।

० ग्रामप्रधान पर यह आरोप लगाना कि वह नशे में धुत थे और उन्होंने पुलिस के साथ दुर्व्यवहार किया यह उचित नहीं मालूम पड़ता क्योंकि वहां पर उपस्थित सारे ग्रामीण इस बात पर एकमत थे कि ग्राम प्रधान नशे में नहीं थे और वह शराब वैगरह से कोसों दूर रहते हैं।

० पुलिस द्वारा दर्ज की गई एफआईआर में ग्राम प्रधान की गिरफ्तारी 24 अगस्त की दोपहर 2 बजकर 10 मिनट पर सेहुड़ा नहर की पुलिया के पास बताई गई है जबकि उनकी गिरफ्तारी 23 अगस्त की रात 12 बजे के आसपास हो चुकी थी। इसका सबसे ज्वलंत उदाहरण यह है कि सामाजिक कार्यकर्ता और उस क्षेत्र में समाज के निचले तबकों के बीच काम करने वाले डॉक्टर कमल उसरी के फोन नंबर(9450616825) पर जब ग्राम प्रधान का फोन(7275561635) आया वह वक्त लगभग रात 12 बजे का था और ग्राम प्रधान का फोन लोकेशन बारा थाने के अंदर बताई गई। ऐसी स्थिति में यह बात हास्यास्पद है कि उनकी गिरफ्तारी 24 अगस्त को दोपहर में हुई।

० साथ ही यह बात समझ से परे है कि जिस व्यक्ति की गिरफ्तारी दोपहर 2 बजकर 10 मिनट पर बताई जा रही है उसका चालान 2 बजकर 30 मिनट पर और (मेडिकल जसरा सामुदायिक केन्द्र पर) 2 बजकर 35 मिनट पर कैसे हो सकता है?

० इस बात की भी जांच की जानी चाहिए कि वह संदिग्ध व्यक्ति जिसे विक्षिप्त बताया जा रहा है वह वाकई में विक्षिप्त है भी या पुलिस प्रशासन इसकी आड़ में लोगों को परेशान कर रही है।

० ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस कस्टडी में ग्रामप्रधान के साथ मारपीट भी की गई है। एफआईआर में गिरफ्तारी से एक दिन पहले इंजरी (चोट) का भी जिक्र है। गिरफ्तारी से एक दिन पहले चोट कैसे आई यह बात समझ से परे है। 

० उपरोक्त बातों को ध्यान में रखते हुए पीयूसीएल की टीम इन सब बातों की निष्पक्ष जांच के साथ-साथ यह भी मांग करती है कि इस मामले की निष्पक्ष विवेचना बारा थाने द्वारा संभव नहीं है। इसलिए इसकी जांच किसी अन्य थाने और उच्च स्तर के अधिकारियों से कराई जाए।

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