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पश्चिम बंगाल उप चुनाव में साफ हो गया बीजेपी का सूपड़ा, प्रदेश अध्यक्ष की सीट तक नहीं बची

कोलकाता। भाजपा जहां 2021 में पश्चिम बंगाल में सरकार बनाने की बात कर रही है, उसके लिए यह जबर्दस्त झटका है कि वह विधानसभा की तीनों सीट पर हुए उपचुनाव में हार गई। तृणमूल कांग्रेस तीनों सीट कालियागंज, करीमपुर और खड़गपुर सदर न केवल जीतने में कामयाब रही बल्कि भाजपा और कांग्रेस से उनकी सीटें छीनने में भी सफल रही। सबसे बड़ी बात तो यह है कि भाजपा की भी वह सीट जिससे प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष सांसद बनने के पहले विधायक हुआ करते थे।

दिलीप घोष के बारे में कहा जाता है कि भाजपा यदि सत्ता में आई तो मुख्यमंत्री की कुर्सी के ये पहले हकदार होंगे। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष जहां अपनी ही सीट गंवा बैठे, वहीं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष जयप्रकाश मजूमदार भी उपचुनाव में बुरी तरह पराजित हुए हैं। लोकसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन करने वाली भाजपा खाली हाथ रह गयी है।

खड़गपुर सदर सीट पर भाजपा की हार पार्टी के लिए एक झटका माना जा रहा है। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष मेदिनीपुर से लोकसभा चुनाव जीतने से पहले यहां से विधायक थे। खड़गपुर सदर में भाजपा उम्मीदवार प्रेमचंद्र झा को तृणमूल कांग्रेस के प्रदीप सरकार ने 20853 मतों के अंतर से हराकर भगवा पार्टी से यह सीट छीनकर तृणमूल कांग्रेस की झोली में डाल दिया।

नदिया जिले की करीमपुर सीट पर तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार बिमलेंदु सिन्हा रॉय ने अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी भाजपा उम्मीदवार व प्रदेश भाजपा के उपाध्यक्ष जयप्रकाश मजूमदार को 24,073 मतों से हराकर उपचुनाव जीता। तृणमूल कांग्रेस ने इस सीट पर अपनी पार्टी का कब्जा बरकरार रखा। तृणमूल कांग्रेस की महुआ मोयत्रा ने पिछले विधानसभा चुनाव में करीमपुर सीट पर जीत दर्ज की थी, बाद में वह कृष्णानगर लोकसभा सीट से निर्वाचित हो गयीं। वहीं दूसरी तरफ कालियागंज में पहली बार तृणमूल कांग्रेस के तपन देव सिंह ने जीत का परचम लहराया है।

कालियागंज सीट पर तृणमूल कांग्रेस उम्मीदवार तपन देब सिंह को 2304 मतों से जीत मिली। जबकि लोकसभा चुनाव में कालियागंज में भाजपा को 57 हजार वोटों से लीड मिली थी. गौरतलब है कि कांग्रेस विधायक प्रेमथनाथ राय के निधन के बाद कालियागंज सीट खाली हुई थी। कांग्रेस ने उनकी पुत्री धृताश्री को मैदान में उतारा था जो इस उपचुनाव में तीसरे नंबर पर रहीं।

बहरहाल चुनाव परिणाम के बाद तृणमूल कांग्रेस सुप्रीमो व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा, यह विकास और लोगों की जीत है। बंगाल की जनता ने एनआरसी और घमंड की राजनीति के खिलाफ जनादेश दिया। लोगों ने भाजपा को नकार दिया है। ममता बनर्जी ने तंज कसा- एक, दो, तीन भाजपा का विदाई दिन। हम इस जीत का श्रेय बंगाल की जनता को देते हैं। भाजपा अपने अहंकार और बंगाल के लोगों को अपमानित करने का परिणाम भुगत रही है। लोगों ने उसे सिरे से खारिज कर दिया है। भाजपा इस देश के नागरिकों को शरणार्थी घोषित करने और उन्हें हिरासत में भेजना चाहती है।

उन्होंने कहा कि माकपा और कांग्रेस खुद को मजबूत करने के बजाय पश्चिम बंगाल में भाजपा की मदद कर रही हैं। ममता ने कहा कि महाराष्ट्र और हरियाणा के हालिया विधानसभा चुनाव तथा बंगाल विधानसभा उपचुनाव के नतीजे भाजपा के खिलाफ लोगों के आक्रोश को प्रदर्शित करते हैं। गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव 2019 में भाजपा ने बंगाल की 42 लोकसभा सीटों में से 18 पर जीत दर्ज की थी।

(सत्येंद्र प्रताप सिंह वरिष्ठ पत्रकार हैं और आजकल कोलकाता में रहते हैं।)

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