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बैलाडीला पर्वत को फर्जी तरीके से अडानी को सौंपने के मामले की जांच शुरू, 29 ग्रामीणों ने करवाया बयान दर्ज

दंतेवाड़ा। छत्तीसगढ़ के बस्तर स्थित बैलाडीला पहाड़ी के 13 नंबर पहाड़ को उत्खनन के लिए अडानी को फर्जी ग्राम सभा कर देने के बहुचर्चित मामले में बने जांच दल ने हिरौली गांव के ग्रामीणों का बयान दर्ज किया। महीने भर में दो बार जांच टलने के बाद आख़िरकार 106 लोगों में से 29 ग्रामीणों ने जांच दल के सामने अपना बयान दर्ज करवाया।

हिरौली गांव से बयान दर्ज कराने आए 22 वर्षीय गुड्डी मंडावी ने बताया कि “मैंने भी आज जांच समिति के सामने अपना बयान दर्ज करवाया। मेरा भी नाम 2014 के ग्राम सभा में सचिव के द्वारा दर्ज किया गया था। मैं उस समय कुआंकोंडा हॉस्टल में पढ़ाई कर रहा था, मेरी उम्र 18 साल भी नहीं हुई थी”। गुड्डी आगे कहता है कि “मैं पढ़ा लिखा हूं मैं क्यों अंगूठा लगाऊंगा लेकिन ग्राम सभा के 2014 के प्रस्ताव में नाम भी है और अंगूठा भी लगा है।” गुड्डी कुंजाम आगे कहते हैं कि अडानी को खनन सौंपने के लिए की गयी ग्राम सभा पूरी तरह से फर्जी थी।

मौके पर मौजूद ग्रामीण महिलाएं।

बता दें कि विगत दिनों 7 जून को आदिवासियों ने अपने विराजमान देवता पर्वत को अडानी को देने के विरोध में तीन जिले के हजारों आदिवासियों ने ऐतिहासिक हुंकार रैली और अनिश्चित कालीन प्रदर्शन करने के जरिये फर्जी ग्राम सभा कर अडानी को ठेके में देने का विरोध किया था। एनएमडीसी और एनसीएल जॉइंट वेंचर कपनी ने अडानी इंटरप्राइजेज कंपनी को 25 साल के लिए लौह अयस्क उत्खनन करने के लिए माइनिंग लीज पर दिया है। अडानी के ठेकेदार माइनिंग करने के उस स्थान पर वनों की कटवाई करा रहे थे तभी एका बड़ा आन्दोल संयुक्त पंचायत संघर्ष समिति के द्वारा खड़ा कर दिया गया। इसके तहत हज़ारों आदिवासियों ने एनएमडीसी प्रशासनिक भवन के सामने 7 दिन तक अनिश्चित कालीन हड़ताल किया।

जिला प्रशासन और राज्य सरकार द्वारा दो शर्तों को माने जाने के बाद आंदोलनकारियों ने अपना आंदोलन स्थगित किया। इसमें 15 दिन के अंदर फर्जी ग्राम सभा की जांच होनी थी। लेकिन दो बार जांच टलने के बाद 16 जुलाई को मात्र 29 लोगों का ही बयान दर्ज किया गया ।

बता दें कि मंगलवार को हुई ग्राम सभा जांच में संयुक्त पंचायत संघर्ष समिति के 15 सदस्यों को भी शामिल किया गया और उस जांच में शामिल सामाजिक कार्यकर्ता बल्लू भावनी ने बताया कि जितने भी लोगों का आज बयान हमारे सामने दर्ज किया गया है सभी लोगों ने 2014 में कोई भी ग्राम सभा नहीं होने की बात अपने बयान में दर्ज करवायी है।

बल्लू भवानी ने बताया कि सबसे पहले उस समय के तत्कालीन सचिव बसंत नायक का बयान दर्ज किया गया है। जब जांच अधिकारी ने सचिव को ग्राम सभा के सम्बंध में पूछा तो उन्होंने ग्राम सभा हुई है ऐसा तो जरूर बोला लेकिन यह भी कहा कि कोई सरकार का आदेश नहीं था और कोई नोडल अधिकारी भी इस ग्राम सभा के लिए सरकार की तरफ से नहीं आया था। बल्लू भवानी के मुताबिक सचिव ने बताया कि उन पर एनएमडीसी के अधिकारियों के द्वारा बार-बार दबाव बनाया जा रहा था। सचिव के बयान के आधार पर देखें तो पूरा मामला फ़र्ज़ी है और इस जांच में फैसला आदिवासियों के ही पक्ष में आने की उमीद है लिहाजा आदिवासी आधी लड़ाई पहले ही जीत चुके हैं।

बयान दर्ज कराते ग्रामीण।

अपना बयान दर्ज करने पहुंचे हिरोली ग्राम के तत्कालीन सचिव रहे बसंत नायक ने बताया कि हिरौली में ही ग्राम सभा प्रस्ताव पास किया गया था और सरपंच खुद अपना हस्ताक्षर किए थे। सचिव मानते हैं कि इस ग्राम सभा के लिए कोई सरकार का आदेश नहीं था। एनएमडीसी के अधिकारी उन पर बार-बार दबाव बना रहे थे तब उन्होंने लिख कर दे दिया।

फर्जी ग्राम सभा के लिए बनाए गए जांच अधिकारी दंतेवाड़ा एसडीएम नूतन कुमार कवर ने बताया की 29 लोगों का बयान दर्ज किया गया है और बाकी जो बचे हैं उनको जिला प्रशासन और राज्य सरकार के आला अधिकारियों द्वारा सूचित किया जाएगा। फिर उसके बाद बचे लोगों का बयान दर्ज होगा। जिला प्रशासन भी चाहता है कि जितना जल्दी हो सके जांच पूरी हो। उन्होंने कहा कि वो सरकार को रिपोर्ट सौपेंगे और जांच संबंधी अभी कोई खुलासा करना उचित नहीं है। जब पूरी जांच होगी तब सारी रिपोर्ट पेश की जाएगी। और ग्रामीण लोगों के सहयोग के बिना पूरा जांच होना संभव नहीं है, वो सहयोग करेंगे तो जांच जल्द पूरी होगी।

छत्तीसगढ़ बचाओ आंदोलन संगठन के आलोक शुक्ला ने बताया कि पूरा मामला शीशे की तरह साफ है और ग्राम सभा की पुरीनी रिपोर्ट को सिरे से खारिज करदिया जाना चाहिए। उसके दस्तावेजों को देखकर कोई भी कह सकता है कि पूरा मामला फर्जी था। पहाड़ के सांस्कृतिक, धार्मिक पहलुओं को छुपाकर, जैव विविधता पर झूठ बोलकर, फर्जी ग्रामसभा के आधार पर हासिल की गई वन स्वीकृति को निरस्त किया जाना चाहिए।

इस मामले में मनीष कुंजाम कहते हैं कि कागजों में दिख रहा है कि ग्राम सभा पूरी तरीके से फर्जी है। ये जांच के नाम पर लोगों को परेशान कर रहे हैं। अधिकारियों के ऊपर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है।

(बस्तर से जनचौक संवाददाता तामेश्वर सिन्हा की रिपोर्ट।)

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